🚶ख्याल💃✍️कमल भंसाली

दिल तोडा हजार बार
सितमगर ने नहीं पूछा
हाल मेरा एकबार
कैसे कर लूं
ऐसे प्यार पे एतबार
दिल…

माना नादां दिल था मेरा
उस पर था अपने वारा
भूल हुई जज्बात का था मारा
न जाना प्यार में भी कभी होता सवेरा
चारों तरफ तो छाया धुंध भरा अंधेरा
दिल….

नाजनीन को कैसे समझाऊं
डूबे दिल को
कैसे उसके कजरारे नैनों
में तैरना सिखाऊं
लब पर उसके भी प्यार के छाये साये
इस अहसास को उसे
कैसे आहिस्ता से समझाऊं
दिल….

है “खुदा”
दिल उसका सलामत रखना
मेरे अहसासित प्यार को
लम्बी उम्र की दुआ देना
जिंदगी
बिन प्यार न चले
उसका ख्याल
मेरे दिल में
सदा यों ही बनाये रखना
दिल…..
रचियता✍️ कमल भंसाली

💖हमराही💖कमल भंसाली

दोस्तों,
प्यार जिंदगी की असाधारण जरुरत है, जन्म से दिल को इसकी जरुरत महसूस होती है। प्यार अनेक सम्बन्धों में रहकर भी अपने आपको सदा अधूरा ही समझता है। व्यवहारिक और आधुनिक जीवन में प्यार भी कुछ अलग से नकारत्मक तत्वों के कारण अक्सर बीमार ही रहता है। वास्तिवकता के दृष्टिकोण से देखा जाय तो हर रिश्ते का प्यार आजकल ज्यादातर बीमार ही रहता है। परन्तु जीवन है जब तक प्यार की सलामती जरुरी है। पति- पत्नी, प्रेमी प्रेमिका और दोस्ती के रिश्ते स्वार्थ के वशीभूत रहते हुए भी आज वक्त के महत्वपूर्ण साथी है। आर्थिक युग में ये रिश्ते तभी जीवन भर साथ निभा सकते है, जब इंसान झुठ, स्वार्थ, लालच,धोखा और चालाकी से दूर हो अपने द्वारा दिये जानेवाला (हर रिश्तें को उसकी गरिमा अनुकूल) प्रेम, स्नेह और सम्मान को कभी न भूले। प्रस्तुत है, इसी संदर्भ में यह कविता।
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मौहब्बत तो तुमसे ही कि हमने सनम
तुमसे ही निभाई हमनें रुठने की रस्म
खफा जब भी तुम होते तो हम मुस्करा लेते
गैर से लगने वाले अहसासों को भी अपना लेते
💘
खता कहते हो तब तक सितम सब सह लेते
पर बेवफाई का दाग न देना सांसे सहम जाती
इल्जाम तो दर्द के फूल बन सिर्फ महक ही छोड़ते
बेवफा कहते तो जिंदगी निशब्द हो बिखर जाती
💟
जब भी मैने अपने आप को तेरे प्यार में डुबाया
सतह पर तैरती चाहत पर बहुत ही तरस आया
स्पर्श की बेकरारी ने हसरतों की झील में नहाया
तो तल में बसा प्यार हर आलिंगन में उभर आया
💖
तेरे इकरार को ही सिर्फ प्यार नहीं कहता
अपने हर एतवार को में हर क्षण समझाता
संगम जिस्म का नहीं दिल की लहरों का होता
अंदर की रुह तक का यह सफर सुहाना होता
💝
आ चल कसम लेते चाहे युग बदल जाये
सब कुछ बदले पर कदम न हम बहकाये
हमसाया बन एक मंजिल के राही कहलाये
हमराही बन जग में प्यार के फूल ही खिलाये
💔💓💟💖💕
रचियता✍💖 कमल भंसाली

🌷सच और प्यार🌷मुक्तक युक्त कविता✍ कमल भंसाली

सदिया बीती प्यार रहा अमर
पथिक चलना ऐसी ही डगर
प्यार ही हो तेरी असली मंजिल
खुशियों के फूल खिलेंगे हर पल

💖

खूबसुरती जिस्म की बदलती रहती
अवधि सांसों की भी कम हो जाती
पर प्यार की रंगत एक जैसी रहती
प्यार से रहो, धड़कने भी ये चाहती

💝

पल का प्यार, स्वाति बन कर चमकता जाता
सच्चाई की धवलता से पलमें कीमती हो जाता
रंग बदलता इजहार आरजूये ही करता जाता
इससे प्यार का अहसास कभी नहीं कर पाता

💕

हर रिश्ते में प्यार का ही बन्धन होता
खून से तो सिर्फ इसका सम्पर्क रहता
आपसी समझ बन जाता है जब प्यार
तो जीवन अपनी मंजिल करता तैयार

💑

कहते है जब तक प्यार और सच साथ साथ रहते
जीवन की बगिया में खुशियों के फूल खिलते रहते
झूठ की शराब में जो प्यार को ओतप्रोत कर रखते
एक दिन प्यार की चाहत में तिल तिल कर तरसते

👄

प्यार को जग में भगवान से कभी कम नहीं समझना
जीवन के नभ का इसे सूर्य और चन्द्रमा ही समझना
प्यार को उजियारा,सत्य को आत्म ज्ञान हीसमझना
सच्चे प्रेम को अटूट अनमोल जीवन बन्धन समझना

💟

सभी तपस्याओं का सार है, सत्य, प्यार भरा जीवन
अति चाहत की लालसा में जब भटक जाता इंसान
उसे इस लोक से उस लोक तक नहीं मिलते भगवान
कर्म बन्धन से परेशां कैसे करेगा आत्मा का निर्वाण

🙏🙏🙏 रचियता👉 कमल भंसाली👈

💘प्रेम पुष्प🌷कमल भंसाली

कहते है प्रेम पुष्प जब भी खिलते

🌻🌻🌻

अहसासित हो हर रंग में चमकते

🌸🌸🌸

भावनाओं के दरिया में मुस्कराते

🌺🌺🌺

प्रेम कुंज के शोभित तपस्वी कहलाते

 🌹🌹🌹

दिल तो है नादान, कुछ भी  न जाने
प्रेम को ही जाने, उसकों ही पहचाने
खो जाता, सो जाता हर सहर्ष स्पर्श में
लिख देता, कई खुशबुओं की दास्ताने

🍀

प्रेम है भावनओं का शानदार खेल
मिलने बिछड़ने की अजीब सी रेल
कभी कभी साथ चलने की मजबूरी
पर रहती थोड़ी बहुत दिल की दूरी

🌲

सिर्फ, रिश्तों का ही नहीं इनमें बंधन
प्रेम, जीवन का निर्भीक परिरंभ स्पंदन
सागर जैसा गहरा, चन्द्रमा जैसा सुनहरा
पर्वतों की श्रृंखला तरह, परिप्लुत चेहरा

🌿

पवित्रता का पेड़ है, हर साख से हरे भरे
भावुकता की उर्वरता में ही फलता फूलता
अहसासों की तह में ही विस्तृत जड़ जमाता
फल लगते खट्टे मीठे, मधुरता के रस से भरे

🌴

प्रेम प्रकाश की प्रथम और शायद अंतिम किरण
परिधि प्रेम की, अंकित करती इसका हर प्रकरण
संस्कारित प्रेम ही,  दुःख का करता निराकरण
बिन प्रेम जीवन बीत जाता, निर्विन हो अकारण

🌾

कहते है प्रेम चाहता करे, कोई उसका दान
प्रेम की तासीर ही है, सबका हो कल्याण
स्नेह भी प्रेम का स्वरुप, देता रहता  वरदान
आत्म प्रेम ही देता, उससे जीवन को निर्वाण

🌵

प्रेम की परिभाषा, नयनों में रहती सदा संयमित
तस्वीर इसकी दिल में होती, सर्व रंग चित्राकिंत
सच्चे प्रेमी बिन शिकवा करते, इसकी शुद्धअर्चना
प्रेम त्याग भरी है अमृतमयी साधना, जीवन उपासना……

✍रचियता : कमल भंसाली

 

😃मंजिल की खुशबू 💆✍ कमल भंसाली

सपनें हजारों देखे तुमने प्यारी जिंदगी
ख्याल भी बहुत आते तुम्हें प्यारी जिंदगी
समझ जरा हर आहट को आना नहीं कहते
दूर के ढोल तो सदा योंही सुहाने लगते
सपने सच नहीं होते, सब ख्याल अपने नहीं होते

आ जरा
बैठ मेरे पास
दे, अपना हाथ
अब समझ जरा
जीने का राज गहरा
मेहमानी अंश हम में है भरा
समझ ज्यादा सुविधाओं का खतरा
तन मन जिसने बनाया हमारा
वो रखता सारा हिसाब तुम्हारा

हर कोई, किसी का साथ नहीं निभाता
हर दीप पथ को आलोकित नहीं करता
तुम निहार, सबको सबका एक ही यथार्थ
इस जहां का दस्तूर प्यार में भी होता स्वार्थ

हर क्षण, यह समझाता
कर्म ही सच्चा दोस्त
हर, हकीकत में साथ निभाता
फल कुछ भी मिले
स्वीकार दिल से करता
नये आयामों से उसे सजाता
फिर, हमसफ़र बन साथ सदा निभाता
तेरी चाही मंजिल तक तुम्हें पंहुचाता

न गम कर न पाने का
न मायूस हो
किसी के बेगानेपन का
आगे तेरी, प्यारी मंजिल
कर रहीं, इंतजार तेरे आने का
आ ले चलता, उस राह पर
जहां अपनी मंजिल से
मिलकर, हर कोई मुस्कराता
अपने होने के अहसास को
नन्हीं आशा की बूंदों से खुशनुमां बनाता
हर ख्याल, हर सपना
जिसके आलिंगन को तरसता…रचियता✍कमल भंसाली

🍀भीगी रातों के सपने 🍀कमल भंसाली

सावन की भीगी भीगी रातों में
मुझे सपने सुहाने लगते
क्योंकि
उनमें तुम्हारी ख्वाइसों के
मस्त मस्त फूल खिलते
जो
मेरे देह दर्पण को
अपने स्वप्निल नैनों के
झरोखों से निहारते
फिर, मुझे
प्यार के गुलशन की
अजनबी अनुरागी पगडंडियों की
सैर कराते
रिमझिम रिमझिम
बरसती सावन की फुहारों से
मेरी चाहतों को
और भी भिगों देते
सावन की…

प्रियकर
सावन की
गीली मिट्टी की सोंध
फिर भला कहां पीछे रहती
वो मेरे जिस्म को
प्रेमालिंगन कर
अलबेले गीत सुनाती
अपनी इंद्रधनुषी खुशबूओं से
प्रेमान्मत्त हो
स्वर्ण लय के स्वर बिखराती
मेरे विरही दिल के
ह्र्दयकाश में
चांदनी बन छा जाती
सावन की
ऐसी हसीन रातें
बहुत कुछ कहती
जब तुम न हो
तो यही दिल बहलाती
सावन….

रात भी ज्यों ज्यों भीगती
मौसम के प्यार में
सपनें मेरे भी डुबकी लगाते
पलों के कुसुम कुंज में
प्रियतम
खब्बाबी प्यार की झील में
जब जिस्म तुम्हारा
नजर आता
होठ तेरे
आमन्त्रण देते
काली घनेरी
जुल्फे तेरी
मौसम की हरी वादियों में
अंगड़ाइयां लेती
तब मेरा अहसासित मन
उनमें डूब डूब
डुबकी लगाता
सच कहूं
तन मेरा
मधुरस से भीग
कादंबिनी
बन जाता
मन मंदाकनी बन
लहराता
दिल
सावन की घटा बन
तुम पास होती
शायद, तुम पर
प्यार ही प्यार बरसाता
सावन…
रचियता कमल भंसाली

प्रेम पर्व …..14 फरवरी …..कमल भंसाली

“14 फ़रवरी” युवाओं का मन पसन्द दिन है, इस दिन वो अपने प्रेम का बेबाक इजहार कर सकते। हालांकि भारतीय संस्कृति की देन यह दिवस नहीं है, क्योंकि हमारी सामाजिक व्यवस्था ने प्रेम के प्रदर्शन को आज तक दिल से स्वीकार नहीं किया। आज का यह दौर प्रेम के नाम पर भटक रहा है, इस तरह का प्रेम वस्तुस्थिति की सुविधाओं पर निर्भर रहता है, उसमे दिखावा ज्यादा, पर,आस्था का अभाव होता है।
इस तरह के प्रेम पर पर ज्यादा कुछ कहने की जरुरत नहीं होती, क्योंकि समय के अनूसार ही जीवन चलता है। फिर भी उन्ही युवाओं के नाम शुभकामनाओं भरी कुछ पंक्तिया, जिनका इस दिवस के प्रति लगाव है। …..कमल भंसाली

मुद्दत हुई, तुम्हारे दिल से
दिल की नहीं हुई, मुलाक़ात
आओं, फिर भी गले मिलते
देकर गुलदस्ते की सौगात

दे, उपहारों की गवाही
आज हम सरे आम कहते
प्रेम हम एक दूसरे से करते
आओं, आज “प्रेम दिवस” मनाते

कहने से कोई दोस्त नहीं होता
उपहारों से दिल खुश नहीं होता
भावनाओं में बसी दुनिया में
इन रिश्तों में प्राण नहीं होता

प्रेम तो दिल के सागर का नीर
निरन्तर बिना आवाज बहता
हर टकराहट में हर एक स्पर्श
एक सहारे का अहसास होता

आँखों में आंसू नहीं
दिल में प्रेम प्यास नहीं
अनजानी चाहत की तलाश
हकीकत में प्यार नहीं

सच्चा प्यार जो करते
वो कुछ नहीं बोलते
साथ जीवन पथ पर चलते
किसी जश्न के मोहताज नहीं होते

संस्कार हमारे यही कहते
जो सजते, वो क्षणिक होते
कुछ पल का जुनून ही होता
प्यार तो … “अनमोल ” ही होता …कमल भंसाली