अस्तित्व

कहां दर्द है मेरे दिल में
कहां ख़ुशी है मेरी आत्मा में
अनजान है दोनों मेरे लिए
रिश्तों की नींव में अपनों ने
मुझे कहां चिना दिया
अनभिज्ञ हूं,अपने अस्तित्व से

मैने तो रिश्तों के पेड़ को सींचा
प्यार और जज्बात से
कभी कभी अपने त्याग
ओंर क्षमा दान से
पर फल तो उसमे लगे
अभिमान और अंहकार के

कह गये कहने वाले
विकलांग रिश्तों को सहन करना
उनके सामने मौन रहकर
उनके अस्तित्व को मान देना
कहीं एक फर्क है आप मे और उनमे
यह समझने का मौका जरुर देना
रिश्तो के बंधन कभी न तोड़ना

>>>●कमल भंसाली●