💑”अलविदा 💑कमल भंसाली

“अलविदा” ही कहा था
मैंने
तुम्हारे नैन भर आये
कुछ दर्द के साये
जो तुमने मुझ से छिपाए
अफसोस ही कह लो
साथ चले, पर दिख नहीं पाये
पता नहीं आज
कैसे सामने उभर आये?

गम की कोई किताब होती
तो सब कुछ समझ जाता
तेरी बेवक्त मुस्कान में
दर्द, तुम्हारे तलाशता
पीकर उन्हें शायद
शकुन से विदा लेता
जग में “प्यार” को
अपनी मंजिल समझा देता

होठ, तेरे,
अब क्यों थरथराते
मेरे “अलविदा” पर
शब्दों को चिपका कर
दर्द, तेरे, छिपा ते
औदास्य, चेहरे में
समा ये, निः स्पृही राज गहरे
बाहर आ रहे
आज ही, क्यों सारे ?

तुम्हारी चुप्पी को
बन्धन समझ
साथ निभाता रहा
कुछ शंकाओं के फूल
तेरे जुड़े में सजाता रहा
अनचाहे समर्पण में
अपनी ही आत्मा तलाशता रहा

कब ख्याल करता
औरत के दिल में क्या, क्या होता ?
बदन के हर हिस्से को छुआ
अगर एक कोना
तेरे, मन का टटोल लेता
तो सच कहूं
मुझे, “अलविदा” न कहने का
भी, अफसोस नहीं होता…..”कमल भंसाली”

 

अधूरा स्पर्श ★★★★ कमल भंसाली★★★★

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“अलविदा” ही कहा था
मैंने
तुम्हारे नैन भर आये
कुछ दर्द के साये
जो तुमने मुझसे छिपाए
अफ़सोस ही कहलो
साथ चले, पर दिख नहीं पाये
पता नहीं आज
कैसे सामने उभर आये ?

गम की कोई किताब होती
तो सबकुछ समझ जाता
तेरी बेवक्त मुस्कान में
दर्द, तुम्हारे तलाशता
पीकर उन्हें शायद
शुकुन से विदा लेता
जग में “प्यार” को
अपनी मंजिल समझा देता

होठ, तेरे,
अब क्यों थरथराते
मेरे “अलविदा” पर
शब्दों को चिपकाकर
दर्द, तेरे, छिपा ते
औदास्य, चेहरे में
समाये, निः स्पृह राज गहरे
बाहर आ रहे
आज ही, क्यों सारे ?

तुम्हारी चुप्पी को
बन्धन समझ
साथ निभाता रहा
कुछ शंकाओं के फूल
तेरे जुड़े में सजाता रहा
अनचाहे समपर्ण में
अपनी ही आत्मा तलाशता रहा

कब ख्याल करता
औरत के दिल में क्या, क्या होता ?
बदन के हर हिस्से को छुआ
अगर एक कोना
तेरे, मन का टटोल लेता
तो सच कहूं
मुझे, “अलविदा” न कहने का
भी, अफ़सोस नहीं होता…..”कमल भंसाली”

कभी अलविदा न कहना…..

“यह कविता उन नवयुवकों और नवयुवतियो के संदर्भ में लिखी जो जीवन साथी बनकर अपने नए सम्बंधों को समझने में असर्मथ होते है, और गलत मार्ग दर्शन के कारण अपने जीवन पर एक प्रश्न खड़ा कर लेते है । वों नही जानते, क्या कर रहे, जो सम्बंध सोच समझ कर बना, वो थोड़ी सी गलतफ़हमियों और गलत चिंतन के कारण टूट गया । वो, यह भी नहीं जानते, अपने जीवन को असुरिक्षत होने का बोध दे रहे है । गुजारिस है, कविता की भावना को समझे । गलत न ले”…..

जमाना लाख रंग बदले
आ, दुआ करते तेरा मेरा
साथ कभी न बदले
तय है, जीवन पथ नहींआसान
कभी आएगी धूप
कहीं होगा, खुला आसमान
न मुझे होगा, सहने का अभिमान
न हीं, तुम समझना उड़ने में है, शान

सुबह की प्रथम किरण बन
मुझे अपनी मुस्कराहट देंना
बीती रात के सपनों को
अपना गहना समझना
एक हाथ अपना, मेरे कन्धे
पर रख कर इतना ही कहना
पावन प्रेम हम दोनों के
नयनो में सदा बसना

नन्हे फूल और कलिया
कल हमारी बगिया में, महकेंगे
जीवन की सेज पर, सितारे सजेंगे
खुशियों की चांदनी में नहायेंगे
भूल मत जाना, फूल कलियों को
संस्कार के गुलदस्ते में, सजाना
याद रखना, साथ जिंदगी भर निभाना

आ, दुआ करे, न कभी दूर हो
न ही हम कभी मजबूर हो
दूर क्षितिज की तरफ देख
वहां तक खींचते है, अपने
प्रेम मिलन की लम्बी रेख
हम अंतर्मन से न टूटने देंगे
हाँ, हम जिंदगी भर साथ रहेंगे

कभी उदासियों की शाम हों
दिल मेरा, तुम्हारे न पास हों
गमगीन क्षणों में इंतजार को
अपने बीते पलों से सजाना
मुझे याद कर जरा मुस्करा देना
कभी, तुम नाराज मुझसे हो
मेरी मुस्कराहट को, क्षमा समझ लेना
पर, कभी अलविदा न कहना…..

कमल भंसाली