🌹अजनबी प्यार 🌹 कमल भंसाली🌹

पूनम की चांदनी सा उसका चेहरा

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पहले प्यार का दर्द आज भी गहरा 

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याद आ रहे बीते लम्हों के अहसास

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उसे भूल जाऊ, असफल मेरे सारे प्रयास

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हसीन सितारों से सजी नशीली रात
मेरे दिल में छाये, कुछ रंग भरे जज्बात
इंद्रधनुषी अप्सरा जैसी, थी खूबसूरत
आज भी याद है, मुझे उसकी सूरत
थी, कोई, छोटी सी प्यारी मुलाक़ात

वो कौन थी, मुझे नहीं ख्याल
थी कोई भी, पर थी हसीना बेमिसाल
उसकी आँखों की रंगत
में, मुझे नजर आती जन्नत
कल वो मेरी हो जाए
मांगता रहता, दिल मेरा मन्नत

अफ़सोस, ऐसा कुछ नहीं हुआ
जगा सपना, सोया ही रह गया
मैं तो दीवाना हुआ
पर, नहीं हुई वो दीवानी
खत्म हो जानी थी, यहीं यह कहानी
पर एक तरफा प्यार, ऐसा होने नहीं देता
प्रथम प्यार हजार दर्द अनजाने दे जाता
एक अजनबी रिश्ता
कितनी सहजता से
दिल की गहराइयों में उत्तर जाता

हाँ, नाजो से पली
वो, गुलाबी कली
सामने वाली गली में रहती
कभी कभी ही बाहर निकलती
आदत थी उसकी,
आँख झुकाकर चलती
दो चोटी में समाये बाल, नागिन लगते
उसके सुर्ख लब कुछ भी कहने से डरते
चेहरे पर गुलाब खिलते
मानों गालो के गड्ढों में
दरवाजे जन्नत के खुलते
चाल उसकी कयामत की
नाजायज, दुश्मन लगती
कुछ दिन फिर नहीं, दिखती

कशिश से भरपूर
किसी मोड़ पे
जब कभी टकराती
लगता, मुझे
आँखों ही आँखों से जैसे कहती
डरती हूं, साजन, पर
प्यार तुम्ही से हूँ, करती
अगले पल
पास से गूजर जाती
कुछ नहीं कहती
अंगुली से आँचल संभाल गुजर जाती
सन्नाटे में, अपनी आहट छोड़ जाती
बदन की महक, फिजा में बिखर जाती
भावनाओं के जंगल में अकेला छोड़ जाती

एक दिन किस्मत हुई, जरा मेहरवान
गुजर रहा उसकी गली से
सामने था,उसका घर
खुली थी, एक खिड़की
वो, बेठी थी, कुहनियों के सहारे
दर्पण में निहारे
अपना सलोना चेहरा
जैसे खोज रही, राज गहरा
पड़ी उसकी, मुझ पर नजर
हल्की सी मुस्कान, लबो पर गई ठहर
उठाई उसने, चाहत की नजर
कसम उसकी
आँखों में मेरे छा गई बहार
लगा वादा कर गई
मिलने का इस बार
मानों जवानी को मिली, सौगात
बैचेन रहने लगा दिल, दिन रात
बदलती करवटे देती, अनेक जज्बात

पता नहीं, जूनून था या उसका प्यार
प्रार्थनामय, हो करता, रोज उसका इंतजार
सही कहा, प्यार नहीं उतरने वाला बुखार
सूरत उसकी, सामने आती बार बार

फिर जो होना था, वही हुआ नहीं
जो नहीं होना था, वही हुआ
अनकहा प्यार को खोना था, कहीं
खो गया, इस जहां में कहीं
तलाश में तमाम उम्र गुजर गई
वो, फिर कभी नजर नहीं आई
एक हल्की सी मुस्करहाट से
चीर कर, मेरा दिल ले गई
नहीं जानता, आज वो कहां
मेरे टूटे के दिल के सिवाय
सच, कुछ नहीं जानता, दोस्तों
अब अपनी प्रथम हसरतों के सिवाय…
रचियता ….कमल भंसाली

अजनबी चाहत…..कमल भंसाली

कुछ दूर ही, हम चले
साथ कब बैठे
अजनबी राहों में
मिलकर जुदा ही है, होना
एक पल को
तुमको पाकर, है, खोना
दूसरे पल का रहेगा, इंतजार
फिर, कभी, इस राह गुजरना

अजनबी होकर भी
अच्छे लगे
कुछ कशिश है, तुम में
साथ ओर भी चलते
पर, सपने तो
कभी कभी
नयनों की झील में
हंस की तरह
धवल होकर तैर ते
किसी एक की
मुस्कान पर, दिल में
एक साथ, इतने
“कमल”
कभी कभी ही खिलतें

होता कोई, छोटा सा
एक ख्याल
जो, दिल रखता संभाल
फूल अज्ञेय प्यार का
जब खिलकर, कुम्हलाता
तो खुले आसमां को
चमकने की
फरेबी सी सौगात
दे जाता
फिर कभी मिलने की
आहत चाहों की
उलझन, भरी राहें
तय करने, छोड़ जाता
बिछोह के कितने
दर्द फिजा में, बिखेर जाता

एक अजनबी मुस्कान
सुर्ख होठों पर
जब स्पर्श करती
जिंदगी बिन स्पंदन
एक क्षण को
ठहर कर, उस क्षण कों
अनेकश, सलाम करती….

कमल भंसाली