🤳खुद को लिखते रहों👈कमल भंसाली

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😁आज और कल😂 कमल भंसाली

कल की बात न कभी करना कल नहीं होता अपना
कल के लिए देखो सपना पर आज ही होता अपना
क्षण क्षण कर आता वो समय ही होता सिर्फ अपना
मांगो मुरादे हजार पर आज जो पाये वोही है अपना

हसरते जब जवान होती तब आकर्षक ही लगती
जरूरते उतनी रखे जो आज के लिए जीती मरती
कल में खोया हर साया आंखों को धुंधला कर देता
आज का लक्ष्य कल तक जीने की राह तय कर देता

समय की धारा में बहता पल का स्वर्णिम फूल
तब तक रहता सदाबहार जब तक हमारे उशूल
बिछड़ गए बिगड़ गये पल बन जाते उड़ती धूल
भटके कदम तो राहों में बिखर जाते दर्दीले शूल

क्या बताऊँ कर्मवीर की तुम न हो अतिअधीर
कर्म पथ पर चलना जिससे हर कल हो गंभीर
देह की अपनी इज्जत इस पर करना जरा गौर
उदय अस्त होते सूर्य में छिपी है कल की तस्वीर

माना कल की चाह में हर जीवन आगे बढ़ता
पर सुख दुःख का अनुभव वो आज में करता
कल की राह कठिन न हो आज ही तय करता
उस अनिश्चित कल के लिए वो शहीद हो जाता

जो शहीद हो उनका सम्मान करें
कल के लिए अच्छे कर्म अर्जित करे
कल सबकी लाये सुनहरी उर्जित भोर
इसलिए आज के पर्यावरण पर करे गौर

न आज बड़ा न कल को हम समझे छोटा
इस कविता ने इतनी प्रार्थना को ही समेटा
मानव है हम गतिशील जीवन के है मालिक
आज कल की शुभता में हर जीवन हो सार्थक