💖अंजाम ऐ मौहब्बत💖✍️कमल भन्साली

कितनी ही वफ़ा कर लो
बातें तो बेवफाई की होगी
कितनी ही राहें जुदा कर लो
तड़प तो दिल मे सदा रहेगी
💖💖💖
प्यार एक जुनून ही होता
कसमें वफ़ा का यार होता
आईने की तरह जब टूटता
तो उसमें सपनो का महल होता
💘💘💘
कल तुम महफ़िल से चले जाओगे
कसम ले लो याद कम ही आओगे
दस्तूर है दुनिया बहुत कुछ कह देती
वक्त के बाद तस्वीर दिल से हटा देती
💗💗💗
सजदे जो आज करते मौहब्बत में
कल वो ही बेवफाई का इल्जाम देते
फूलों की जगह कांटो से दामन भर देते
पाक मौहब्बत को भी जंग का तौहफा देते
💝💝💝
है खुदा, चिरागे सहरी न हो कभी कोई मौहब्बत
मसीहा प्यार का बन दिल मे रहे पाक मौहब्बत
ये ही है तेरी चाहत, ये ही हो मेरी मंजिले इबादत
जवां रहे सदा, न किसी कूचा में हो इसकी शहादत
💞💞💞
✍️ रचियता✍️ कमल भन्साली

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💐बैरागी मन💐 कमल भंसाली

मन बैरागी हुआ
तन पर पड़ गई जब छीजन की छाया
जीवन बोला ‘होशियार’
काल सामने, रहो, अब तैयार
धरती पर ऐसा कोई नहीं हथियार
जो बचा लेगा इस बार
तय है आत्मा को जाना उस पार
मेरे शेषांश पर तूं चाहे मातम कर
पर अब तो जरा प्रभु को याद कर

तन लड़खड़ाया
करने लगा गुहार
बहुत भूलें ऐसी मेरे से हुई
जिससे आत्मा को चुभती रही सुई
पर न संभला
समझता रहा
सब है, मेरा, यह धरती का धन
ये सोच
जितना अंहकारी हुआ मन
उतना ही हुआ मोह माया से सम्पन्न
ये कैसा था सम्मोहन
आत्मा का जिससे हुआ दोहन
न सोचा कभी
इस तरह से होगी
जीवन यात्रा सम्पन्न
लाचार हो जाऊंगा हर दिन
काश सही कर्म से
आत्मा को रखता “सम्पन्न’

ख्याल थोड़ा कर लेता
आने का मकसद समझ लेता
मन भी थोड़ा निरहि हो जाता
संयम को संकेद्रण कर लेता
न उलझता इच्छाओं के जाल में
जल बिन मछली के नही तड़पता हर हाल में
काम क्रोध और अंहकार से रहता थोड़ा दूर
जीवन कभी न होता कभी इस तरह मजबूर
आने को जान समझ पहलू करता अगर जीवन सफर
तो देख काल को मुस्कराता
अपने तय सफर की मंजिल पाता
जीवन भी दुःख न करता
अंतिम मुस्कान से प्रभु का दर्शन कर
शायद निहाल हो, स्वयं ही पसर जाता
रचियता: कमल भंसाली