👾जीवन सत्य👽कमल भंसाली

वक्त हवाओं से कभी नहीं बदलता
न ही ये सिर्फ ख्बाबों से ही सजता
सिर्फ सही गलत कर्मों से बदलता

हर पथ में धूप और छांव दोनो होते
हमारे तो सिर्फ कदम ही आगे बढ़ते
मंजिलो की चाह में रास्ते हम बदलते

कर्ज है जिंदगी, लौटाना है वापस जरूरी
ये हम सांसों की घबराहट से समझ जाते
फिर हम क्यों गलत पथ से नहीं लौट जाते

समझदार जो होते, अंधेरों से कभी न डरते
अफसोस की जिंदगी में भी कभी न रुकते
हर अहसास को कसौटी की आग पर तपाते

स्वर्णमयी विचार यही कहते, अंत को हम स्वीकार करते
सदाबहार हर हवा नहीं होती, ये चिंतन तो हम रोज करते
पर बिगड़े हालात कम को ही संभलने का सही जज्बा देते

आज जो जी रहे, वो कल का यकीन नहीं हो सकता
तार साँसों का कभी भी किसी भी तरह से टूट सकता
मृचिकाओं के जंजाल में अंत कभी शिष्ट नहीं हो सकता

आओ, आज स्वीकार करते, मृत्यु का द्वार खुला ही रहता
न जाने हम, यह पल कब, कैसे, किस रास्ते सामने आता
होगा कोई जो दृष्यत न हो हमें सिर्फ संकेतो से ही समझाता
रचियता✍️ कमल भंसाली