👉जीवन का सफर👈✍️कमल भंसाली

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👉जीवन मुक्तक 👈✍️कमल भंसाली

मुकद्दर की बात न करना वो तो सब के पास ही होता
चमकता उसी का सितारा जिसे कर्म में विश्वास होता
कसौटी होती हर कर्म फल की तभी तो भाग्योदय होता
सही कर्म करे तो अंधेरे में भी सूर्योदय का अहसास होता
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माना जिंदगी की नहीं होती कोई आसान राह
नहीं मिलती हर खुशी न ही होती पूरी हर चाह
न मंजिलों की बात करे न ही देखे हजारों सपने
हम राही है, राह पर चलने वाले ही है हमारे अपने
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कल आज कल में बीत जाते है कई सरगमी सावन
भूल जाते है हम जीवन बह जाते सब सुख के क्षण
समय को जान लिया तो संयमित हो जाता हर मन
बिन चाह का धैर्य बना देता हर आत्मा को गुलशन
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न तो कोई सवेरा होता न ही होती है कोई शाम
सच है जीवन के अंधेरे में “उजाला” उसी का नाम
जिसने भी भेजा,दिए हमें कुछ प्राणी सार्थक काम
विश्वास उसका बना रहे ये ही हमारा मूल्य और दाम
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परवाह न करना दुःख के बढ़ते अंधियारे की
पर करना अपने गलत कर्मो के बढ़ते दायरे की
दुःख का तमस तो छंट जाएगा सुख के उजाले से
पर गलत कर्म का कीचड़ जान ले लेगा आत्मा की
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गुरु बिना ज्ञान नहीं और अनुशासन बिना शान
धर्म बिना मंजिल नहीं और बिन कर्म नहीं पहचान
सत्य बिना नहीं जबान संयम बिना सब कुछ अनजान
प्रेम बिना भक्ति नहीं और बिन मृत्यु स्वर्ग नहीं आसान
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रचियता✍️कमल भंसाली

🛑दर्पण झूठ न बोले🛑कमल भंसाली

दर्पण में देखे हर कोई लगे सबको प्यारा
हर सूरत ने दर्पण में स्वयं को ही निहारा
बदनसीब दर्पण को किसी ने नहीं समझा
पर दर्पण ने दिखाया उनका असली चेहरा

कुछ सूरते दर्पण को पहचानी सी नजर आई
पर अपनेपन की उनमें सदा कमी ही नजर आई
खामोश रहा दर्पण अपने अस्तित्व पर विश्वास रहा
उनकी उनकी कमियों को नजरअंदाज करता रहा

सजी संवरी सूरत में जब कुछ भी नहीं देखता
तो खामोशी से उनके हटने का इंतजार करता
हकीकत के हर पहलू से अजनबी बन कर रहता
किसी के अंतर में झांकने का अफसोस करता

दर्पण झूठ नहीं बोलता यथार्थ को ही तौलता
असमंजस की दृष्टि में कभी धुंधला कर रह जाता
स्वयं को सुधारने का पैगाम खामोशी से दे जाता
क्षय होती सुंदरता पर गर्व न करने का संदेश दे जाता
रचियता**कमल भंसाली