🍂बेचैनिया 🍂उर्दु और हिंदी सम्पन्न मुक्तक शायरी युक्त रचना✍ कमल भंसाली

बेचैनिया मेरे दिल की बहुत कुछ कहती
आज भी उनकी सूरत इन निगाहों में रहती
बिन कुछ कहे वो इस जिंदगी से दूर चले गये
जिस्म को छोड़ गये रुह को साथ मे ले गये
बेचैनिया…..

ख़ुदा उनकी खैर करे मेरी तरह उन्हें मजबूर न करे
हसरतों का कहना कल से दिल उनका दीदार न करे
वफ़ा की कसमों में रुस्वाई अब और इंतजार न करे
दिल ही टूटा है, जाम तो आज भी मुझे बेकरार करे
बेचैनिया….

कयामत हुस्न गुलजार हो दिल पर जब छा जाता
आईना प्यार का बन चेहरे को नूरमहल बना देता
बेवफाई का एक पत्थर दिल के शीशे को तोड़ देता
दस्तूर प्यार का प्रेमित दिल टूट कर जुड़ नहीं पाता
बेचैनिया…

आश्कि दिल को कौन समझाए, मौहब्बत न कर
जग में और भी बहुत कुछ उन्हीं की इबादत कर
हुस्न जलजला दिल का परवान की खैर न करे
शमा में परवाना जल कर भी उसकी आरजू करे
बेचैनिया….

ख्वाईसे अब कहां रह गई उम्र उनके इंतजार में गई
उदासियों के लम्हों में उनकी धुंधली तस्वीरे रह गई
लगता है चांदिनी भी चांद के आलिंगन में सो गई
कसम से मकतूल दिल मे उनकी यादे खाक हो गई
बेचैनिया….

टूटी हुई हसरतों को लेकर जहां से दूर चला जाऊंगा
परछाइयों के श्मशान में दफन भी कर दिया जाऊंगा
तयशुदा जिंदगी जुस्तजू दीदारे यार की अब न करे
कोई नाजायज पलश्त नयन बूंद जनाजे पर न गिरे
बेचैनिया…..

कलम से✍💔कमल भंसाली

💖वादिया प्यार की💖 कमल भंसाली

दिलरुबा वादिया प्यार की कर रही तेरा मेरा इंतजार
तेरी रुस्वाई से अनजान खुशनमां मौसम भी बेकरार
हर गिरह खोल दो अंजामे मौहब्बत को इबादत दो
महफ़िल जब सजी तो प्यार की शमा को जलने दो

दिलवर मेरे, तुझे दिल की गहराइयों से प्यार किया
तेरी आहटों तक का बेकरारी से इंतजार ही किया
लहराती तेरी घनरी जुल्फों में चांद का दीदार किया
इबादत से हुस्न ऐ इश्क की दास्तन में यकीन किया

वक्त बदल जाये, सुख दुःख धूप छावं बन कर छाये
कभी सजदे भी न लूं तो भी सुर्ख लब सदा मुस्कराये
तन्हाई भरी शामें तेरे आँचल की खुशबू पर इतराये
कसम तुम्हारी बेकरारी से तेरे आने तक मुझे सताये

देख तेरे चेहरे की रंगत इशारे कर रही तेरी अंखिया
पिया मिलन चाह में बदन ले रहा है तन्हा अंगड़ाइयां
लबों को मजबूर न कर प्यार के कुछ कशीदे गाने दे
एहतशाम से प्यार को खुशगवार फरियाद करने दे

मौहब्बत तो दिल की ,आरजुओं की मन्नत है प्यार
रुह में जन्नत का शुकून, संग रहे जीवन भर दिलवर
वक्त की जरूरत वफ़ा, मंजिलों तक की फरेबे नजर
वादिया प्यार की कर रही तेरे मेरे मिलन का इंतजार

गरुर ए हुस्न दिलवर तेरे दिल में किल्लत प्यार की
दस्तूर मौहब्बत कहती गुजारिस नहीं ऐसे यार की
पाक आरजुओं की इश्के हकीकी इश्रत अंजाम
इल्मे मजलिस बदगुमां दाग, रुस्वाई बेवफाई पैगाम

रचियता✍💗कमल भंसाली

💖प्रेमसत्यम💖 कमल भंसाली

दर्द ऐ दास्तां
बहुत कुछ कहती
जिंदगी
गमगीन गेरो से नहीं
अपनों से होती
मोह के चक्रव्यूह में
प्रेम को ढाल समझ
चुप, छुप सब कुछ सहती
जग ने जाने
इसी ख्याल में
तमाम उम्र की पीड़िता बन जाती
मानसिक विक्षप्ता से त्रस्त हो
स्वयं में स्वयं को तलाशती
अफ़सोस से कहती
काश उसे
“अपनों के अपनेपन की समझ होती ” !

समझ अगर
इतनी ही रखे जिंदगी
कोई किसी का कुछ नहीं
किसी की “साँसों” पर,
कोई भी सम्बन्ध न्यौछावर नहीं
शब्दों का खेल है
“प्रेम”
इसमें उलझे नहीं
दस्तूर स्वार्थ के
सब हंस के निभाये
ताकि तीर निशाने पर लग जाये
इसलिए सब “प्रेम” “प्रेम” की रट लगाये

सार यही समझ में आया
दर्द के पहलू में
अपनों का दिया जब गम समाता
प्रत्यमित्र जिंदगी को बना देता
अफ़सोस से
भीतर भीतर ही जिंदगी कुलबुलाती
शायद बुदबुदा कर कहती
काश ” सच्चे प्रेम” और ” मोह” का अंतर समझती
तो प्रेम को प्रदूषित नहीं बनाती
जग में “प्रेम” को परिभाषित कर पाती
।।प्रेम ही “सत्यम, सुंदरम”।।

रचियता कमल भंसाली

🙎मायूस इंतजार🙋कमल भंसाली

महबूब मेरे देख छाये नभ में कितने सितारे
पर तेरे आने के इंतजार में दिखते धुंधले सारे
तुम्हारे आने से चांदनी अपनी राह भूल जायेगी
प्रेमित हो अपने चाँद से लिपट कर शर्मायेगी
महबूब मेरे….

💓

गुलशन के खिले फूलो की रंगत भँवरे बदल देते
तेरे हुस्न को शायद हम भी इंद्रधनुषी रंग दे देते
जलवा तुम्हारा जग में कहर बन कर छा ही जाता
संगम हमारा प्रेमीयों के लिए मिसाल ही बन जाता
महबूब मेरे….

💓

उदास शाम तेरे इंतजार में बेकरार हो रही
मेरे दिल की धड़कने तेरे लिए गीत गा रही
नीड़ को उड़ते पंक्षी देख मुझे दिलाशा दे रहे
हर आहट को तेरे आने की आहट बता रहे
महबूब मेरे…

💟

तुम आ जाओ दीप इंतजार के कहीं बुझ न जाये
न आने से कहीं बेताब दिल के अंधेरे बढ़ न जाये
जग लगता सूना तुम बिन दिल को कैसे समझाये
महबूब मेरे तुम बिन शाम बिंदास हो ढल न जाये
महबूब मेरे….

💗

कहते है, इंतजार दर्दे दिल बढ़ाता
जीने के मकसद को मायना देता
ये सोच तेरा इन्तजार मै सह लेता
बेवफा हो प्रेम में कहा नही जाता

💘

आसार थे जो वही बात हुई
उदास हो शाम रात में ढल गई
मासूम सी चांदनी भी मायूस हुई
बेवफाई तुम्हारी बदनामी मेरी हुई
तुम नहीं आये,आरजू ए वफ़ा कत्लेआम हुई
मेहबूब मेरे……

💔💔💔

✍रचियता💖कमल भंसाली

💑👉साथी मेरे, योंही मेरे साथ साथ चल 💑👈 शादी की शुभ वर्षगांठ पर जीवन संगिनी शायर को सप्रेम, सह-अस्तित्व पूर्ण भेंट ✍🙏कमल भंसाली

दोस्तों,
जीवन की कई विचित्रताओं में शादी का बन्धन एक अलग तरह की उपलब्धि होती है, खासकर उस समय जब जीवन यौवन से भरपूर प्रेममय होने लगता। खूबसूरती उस समय जिस्म के हर अंग पर बिखरी रहती है। इस माहौल में नारी और पुरुष दोनों को एक सुंदर पर समझदार साथी की जरुरत होती है। हमारे देश की संस्कृति में हर माता – पिता अपनी सन्तान की इस चाह को सामाजिक संस्कारों और रस्मों के अंतर्गत पूर्ण करना, अपना धर्म और कर्तव्य आज भी मानते है। माना समय परिवर्तन शील होता है, पर हकीकत यह भी है, शरीर व मन के स्वरुप में भी बदलाव हर दिन आता रहता है, जिंदगी की इस समझ को अगर दो जीवन साथी समझदारी से आगे बढ़ाते है, तो निश्चित है, दाम्पत्य जीवन एक सुखद अनुभव की सैर करता है। “42”, साल का सफर “शायर” के साथ हमसफ़र के रुप निश्चित ही मेरे जीवन को सक्षमता प्रदान करने वाला रहा। प्रेम व स्नेह की इस यात्रा जीवन संगिनी के रुप में उसने हर कर्तव्य का सही पालन किया । फर्ज बनता है मेरा, जीवन को प्राप्त इस सक्षम उपहार के लिए विधाता का शुक्रिया अदा करू और उसके स्वस्थ स्वास्थ्य की प्रार्थना करता रहूं।इतने साल के दाम्पत्य जीवन में उतार चढाव आना स्वभाविक है, पर आपसी तालमेल जीवन मनमोहक रहता है, यही हमारी आपसी उपलब्धि है।

“प्राभृत प्रामाण्य ” के रुप में यह कविता सफल दाम्पत्य जीवन को समर्पित है।आपका आशीर्वाद और मंगलकामनाओं से हमारा इस धरा पर तय जीवन गतिमय रहे, यही कामना है।

अगर चाँद और सितारों के भी होते जज्बात
“हमराही” जीवन के मेरे
देख हमें
शायद यही वे कहते
क्या ऐसी होती बेमिसाल मौहब्बत
एक ही सांस में दो दिल धड़कते
और
हर रोज कहते
चलो साथ साथ चलते
जमाने के गुलशन में
सदाबहार दिल के आशियना में
मौहब्बत के आँगन में
हम
“कमल” यी “कमल” खिलाते
इस पथ को
इस साल फिर नये आयामों से सजाते

💖

जिस्मों की क्या परवाह
प्रेम का बना रहें प्रवाह
ये ही करते आज प्रार्थना
प्रभु,साथ हमारा निभाना

💔

साथ तेरे
गुजारा, “साथी”
समय भी निखरा, “साथी”
पर यादों में
आज भी वो दिन बिखरा
जब चांदनी बन
तुम मेरे जीवन-नभ में छायी
दूर हुआ आशंकाओं का अन्धेरा
सच कहता
जिंदगी आज भी मुस्कराती
प्रेम वन्दना के
नये नये गीत गाती
हर उलझन का समाधान
साथ साथ ढूंढती
देख, तेरी मासूम सूरत
जीने की आज भी वजह बताती
कल को किसने देखा
पर आज का विश्वास अपना बनाये रखना
जन्मों का बन्धन होता
“प्यार”
उसे यों ही अपनाये रखना

💗

जीवन साथी मेरे
कल रास्ता
कहीं रुक जाये
हम में से एक आगे पीछे हो जाये
जीवन के जंगल में
हम सदा के लिए भटक जाये
अफ़सोस के गीत न गाना
फिर कभी
जब धरती पर आये
तो फिर एक बार फिर
हमराही बन गले लगा लेना
अगर….

🌹

कल भी फूल खिलेंगे
कलिया महकेगी
चाँद भी होगा
सितारे भी होंगे
सूर्य भी चमकेगा
सभी
शायद ये दुआयें देंगे
जन्मों तक
ये बन्धन बना रहे
“कमल”
“शायर”
के जीवन का गुलशन
आत्मिक प्यार से
सुरमई सुरभि
बन सदा हरा भरा रहें
अपने पथ की तय मंजिल तक
“प्रेमाश्रयी” से सजाते रहे

सम्पूर्ण प्रेम सहित : कमल भंसाली ( रचियता)

🍹प्यार करो🍦कमल 💜भंसाली💛

पाश्चात्य देशों से आयातित “वैलंटाइन डे” जिसका कल हमारे देश का एक बड़ा धनाढ्य शिक्षित वर्ग खासकर नव जीवन को पसन्द करने वाले बड़ी गर्मजोशी से स्वागत करेंगे। ये युवक – युवतियों के लिए प्रेम का इजहार करने का दिन माना जाता है। संकोच की सब सीमाओं को लांघकर मनाया जानेवाला यह दिवस भारतीय संस्कृति के अनुरूप कहीं भी नजर नहीं आता, पर बदलते समय के प्रभाव को नकारना आज मुश्किल है।अगर उपरोक्त इंग्लिश शब्द का हमारी भाषा के अंतर्गत परिभाषित किया जाय तो “प्रेम दिवस” एक सही सटीक परिभाषा होगी। हकीकत में हमारी संस्कृति के अनुरूप यह दिन कोई नया महत्व नहीं रखता, क्योंकि भारत में हर रिश्ते में प्रेम हर रोज छलकता है। परन्तु पाश्चात्य देशों के इस त्यौहार में जिस प्रेम को महत्व दिया गया वो प्रेमी – प्रेमिका के आपसी रिश्तों को नजदीकियों की विशेष छूट देने का बहाना ही लगता है। इस कविता का सार इतना ही तथाकित प्रेम- दिवस को हमारे देश के सामाजिक रीति- रिवाजों के अंतर्गत ही आगे बढ़ाना सही है, इससे ज्यादा कुछ और नहीं……कमल भंसाली

***”प्यार” करो ***

हां,
“प्यार” करो
इससे इंकार न करो
“प्यार”
जीवन का श्रृंगार
प्यार
मन की उपासना
दिल से इसे स्वीकार करो

बिन प्यार
जीने को नहीं मिलता
कोई आधार
प्यार हर एक अधिकार
इसका दुरूपयोग न करो
फिर, प्यार करो
जी भर कर करो

पर ध्यान रहे
प्यार न हो मोहताज
सिर्फ एक दिन का
ये तो सतरंगी
सुरमई प्रेमांग
इसके हर ढंग पर
विश्वास को न्यौछावर करो
फिर, प्यार करो…

सुबह की हर कली
भास्कर की किरणों से खिलती
धवल चांदनी भी
प्यार से ही मुस्कराती
हर आवश्यकता की जननी
जिंदगी
प्यार की चाहत से ही
आगे बढ़ती
इस पर जरा गौर करो
फिर, प्यार करों….

प्यार
को प्यार ही रहने देना
इसे रिश्तों की
बस्ती में बसा देना
कोई इल्जाम न देना
उपहारों से कीमत न आंकना
आज के मिलन को
व्यापार का नाम न देना
बन्धन है प्यार
इसकी नाजुकता बनाये रखना
सपनों में बसा
इसे टूटने न देना
हो सके
तो तपस्या के फूलों से
जीवन के
गुलदस्ते में सदाबहार रखना
मेरी इस बात को
थोड़ा समझ कर स्वीकार करो
फिर, प्यार करो

एक दिवस का प्यार
बिन बंदिश बहक जाता
जिस से जिस्म दहक जाता
फिर प्यार नहीं
वासना का शूल इसे चुभ जाता
जिंदगी को
दर्द की गहरी खाई में
अस्तित्व विहीन कर जाता
जाते जाते
बदनामी के आँचल से ढक जाता
कड़वे सच की औषधि
“संयम” की आज के लिए स्वीकार करो
फिर, प्यार करो

वक्त बदल ता रहता
जिंदगी का दामन भी ढीला पड़ जाता
पर सच्चा प्यार
जीवन की हर राह को हर्षाता
एक आंसू
जब न रहे, तो
अगर किसी के नयनों गिरता
तो प्यार
प्रार्थना बन उपाषित हो जाता
धरती को
मकसदों का गुलशन बना देता
इस तपस्या को “आत्मा” से स्वीकार करो
फिर, प्यार …….

रचियता: कमल भंसाली

🌼ठंडे फूलों की चाहत🌼कमल भंसाली

तमस सर्दी का अति गहराया
भास्कर कहीं भी नजर न आया
बर्फीली हवाओ ने रूह को कंपकपाया
अधखिली कलियों की खुशबू ने जताया
देखो, सर्दी का सुहावना मौसम आया

पत्तों ने फूलों से कहा
कल तुम चले जाओगे
किसी गर्म गुलदस्ते में
सहजता से सज जाओगे
किसी खूबसुरत अंगुलियो का
तपिस भरा स्पर्स पाओगे
माहौल की मधुरता में खो जाओगे
हमें तो तुम शायद भूल ही जाओगे

फूल सर्द होकर बोले
भूलना कहां होता आसान
जब तक साथ थे जिंदगी निखरी सी लगती
सुहानी मधुरतम सर्दी प्रतिसंगी प्रेम प्रच्छादन कराती
उष्णता क्षण दो क्षण ही अच्छी लगती
जब सच्ची “दोस्ती”पास होती
सर्द ऋतु तो योंही ठिठुरती अच्छी लगती…..रचियता *कमल भंसाली*