🕊️जीवन आधार🕊️ ✍️कमल भंसाली

गम नहीं अपनी हार का
मकसद फिर तैयार करूंगा
जिसमें जश्न होगा जीत का
नवनीत नव निर्माण का
🌾🌾
नहीं रुकूंगा उन राहों में
जिसमे तमस के फूल खिलते
कदम उन शूलों पर ही रखूंगा
जो मंजिलों तक चुभते
🌻🌻
कल की कलकल का न हो स्वर
न कोई हो उदासी की धीमी लहर
अपने पराये की धूप न लाये कहर
हर दिन को बनाऊंगा और बेहतर
🌺🌺
दोस्ती दुश्मनी में न बीते कोई प्रहर
पल पल में रहे सिर्फ अपनी खबर
चल अब होकर जरा बेखबर बेकरार
मंजिलो को ही रहे सिर्फ अब इंतजार
🥀🥀
कैसी हार कैसी जीत
नादानी के ये सब गीत
दोनों ही मेरे मन के मीत
यही है मधुर जीवन संगीत
🌹🌹
पश्चताप नहीं अपनी हार का
दीवाना हूं बहती हुई बयार का
तूफानों से नहीं डूबती किश्ती
ख्याल रखता अपनी पतवार का
🍂🍂
ज्ञानोदय की भोर से जब भी चमकेगा भास्कर
उसकी रश्मि से संचारित हो जिस्म का चमत्कार
आत्मिक शुद्धि की सारी कल्पनाओं में न हो विकार
हर पीयूष भावनाओं को ऐसे ही मीले जीवन आधार
🍀🕊️रचियता ✍ कमल भंसाली️

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💑प्रेम यात्रा👨‍❤️‍👨✍️कमल भंसाली

जलन जब सीने में हो
आंखों में बहता हो
जब निशब्द पानी
बता !
महबूब मेरे
जिंदगी
कैसे तुझे भूल जाएगी
जब याद तेरी आयेगी
तो लहराती तेरी तस्वीर
कैसे मेरा दिल बहलायेगी
💌
आज तूं नहीं
कल मैं नहीं
कोई बात नहीं
तेरे जज्बात ही सही
इस जन्म में मुलाकात
फिर नहीं
तो भी
कोइ बात नहीं
पर
तेरे बिना
जिन्दगी से डर लगता
मौत से तो कभी नहीं
बिन तेरे जीना सहज नहीं
मौत से कोई परहेज नहीं
💟
मानता
प्रेम की परकाष्ठाता
एक विश्वास
एक आस्था
जो
मिलन में कदापी नहीं
घावों की गहनता
जलन में कभी नहीं
पर जानले
मेरे सनम
जुदाई मेरे लिये
दर्द की
कोई सौगात नहीं
है,
ये तो सिर्फ
एक मकसद
एक प्रेममय यात्रा
जिसका कोई
आदि न कोई अंत
क्योंकि
मैं ठहरा
प्रेम पथ का राही

रचियता ✍️…..कमल भंसाली

🙌संवेदन पूर्ण सत्य🕸️कमल भंसाली

“दुनिया में अगर कोई सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है वह है “दूसरों के द्वारा बोलेजाने वाला सत्य”, यह एक तथ्य है, इससे इंकार करना शायद ही आसान होगा। “सत्य” बोलने वाले लोगो की तादाद नगण्य के आसपास ही अब रहती परन्तु किसी समय झूठ बोलने वालो की गिनती हुआ करती थी, इस बात को आज का आधुनिक युग शायद ही स्वीकार करेगा। आज सत्य को एक हारा हुआ खिलाड़ी या नेता भी स्वीकार करने से झिझकता है। शाश्वत चिंतन करे तो ये बात समझ में आ सकती है कि दुनिया का अस्तित्व पूर्ण सत्य में आज भी समाया है, हम चाहे या नहीं प्रकृति अपने आप को सत्य से अलग नहीं कर सकती। हम कितना ही झूठ का दैनिक जीवन में प्रयोग कर ले पर आत्मा उसे अंदर तक नहीं ले पाती, हमारे बोले हुए किसी भी झूठ पर उसका कराहना महसूस किया जा सकता है।

“हम जी रहे है यह सत्य हो सकता है” परन्तु हम ‘सही’ जी रहे ये संदेहपूर्ण है। सवाल किया जा सकता है, क्या सत्य पूर्ण जीवन जीया सकता है ? उत्तर आज के युग में आसान नहीं लग रहा कारण जीवन की गतिविधिया आजकल झूठ के इर्द गिर्द ही ज्यादा समय बिता रही है। कभी सत्य को जीवन की धुरी समझा जाता था, आज उसकी जगह झूठ ले रहा है, इसे जीवन की विडम्बना ही कहे क्योंकि जीवन आज इसी कारण शायद टूट कर बिखर रहा है। जीवन को आज सब सांसारिक सुविधायें बहुत तेजी से प्राप्त हो रही है और बताना भी जायज नहीं होगा जीवन अपना सास्वत मूल्य खो चूका है, और स्वयं ही किसी त्रासदी का शिकार होकर दुनिया को अलविदा कह देता है। सही भी है, झूठ का भारीभरकम वजन कब तक ढोयेगा।

चाणक्य राजनीति के गुरु थे उन्होंने राजधर्म के लिए कई तरह की चालाकियों का सहारा लिया परन्तु झूठ को दूर रहकर। उनके इस कथन पर गौर करते है ” सत्य मेरी माता है। आध्यात्मिक ज्ञान मेरा पिता है। धर्माचरण मेरा बंधु है। दया मेरा मित्र है। भीतर की शांति मेरी पत्नी है। क्षमा मेरा पुत्र है। मेरे परिवार में ये छह लोग है।” काश आज के राजनेताओं में इस तरह के विचार अपनाये हुए होते तो निश्चित ही भारत आंतरिक रुप से कमजोर और गरीब राष्ट्र की गिनती में न होता।

इंसान का व्यक्तित्व प्रकृति ने बड़ी सूझबूझ वाला बनाया है, सर्वगुण और अवगुण वाले संसार में उसको अपना व्यक्तित्व स्वयं निर्धारण करने का अधिकार भी उसे दिया। सक्षम व्यक्तित्व वाले व्यक्ति के जीवन दर्शन पर सरसरी नजर डालने से इस बात से इंकार नहीं करना पड़ेगा कि बिना असत्य का सहारा लिए वो इस मंजिल तक पंहुचे है।

असहाय सी स्थिति है आज जीवन की, भाग्य से प्राप्त खुशहाली अति अर्थ के दीमक से हर दिन जीवन को छीजत प्रदान कर रही है। पल की मोहताज जिंदगी अर्थ के कारण कटुता भरे वातावरण में कई तरह की शारीरिक और मानसिक बीमारियों के विषालु कीटाणुओं से ग्रस्त हो रही है। इस का प्रमुख कारण हम सब समझकर भी नहीं समझते वो है “अति दौलत की भूख”।
हर रोज हमारे आसपास ही क्या हमारे स्वयं के जीवन मे उसकी कमी या अति, जीवन को संकुचित होने का अनुभव कराती है। जब की जानते है, जब तक जीवन है, तब तक मालिक होने का दावा कर सकते है पर उसके बाद उसका मालिक कोई और स्वतः ही हो जाता। अतः इस सत्य को स्वीकार कर लेना ही सही होता है अर्थ के कारण किसी भी सम्बन्ध को कटुता का अनुभव न दिया जाय। कठिन समय मे आपसी प्रेम काफी फलदायक होता है।

कहते है जीवन की शुरुआत प्रेम से हुई और प्रेम सदा सत्य से संपन्न रहना पसन्द करता है, झूठ से वो सदा नफरत करता है। किसी शारीरिक बंधन के चलते वो झूठ को मजबूरी से सहन करता है। इस तथ्य को रिश्तों की दुनिया में सदृश्य समझा जा सकता है। रिश्तों के बनते बिगड़ते तेवर जीवन को कई तरह से प्रभावित करते है। रिश्तों की मधुरता जीवन को सकारात्मक चिंतन प्रदान कर उसे मजबूत कर सकती है। गलत भावनाओं के बस में होकर रिश्तों में कटुता का संकेत देना मात्र जीवन के पथ को कठोरता प्रदान कर सकता है, अतः रिश्तों के प्रति हमारी संवेदनशीलता में सत्य का अंश सही मात्रा में रखना उचित लगता है। जीव विज्ञानी डेविड जार्ज हस्कल का यह कथन आज के युग अनुसार अक्षरस सत्य लगता है कि ” The forest is not a collection of entities (but) a place entirely made from strands of relationship”.

आलोचना से पीड़ित प्रेम कभी भी जीवन को सुख नहीं देता परन्तु समझने की बात है बिना आलोचना का प्रेम चापलूसी की या गुलामी की श्रेणी में आता है, प्रेम का निम्नतम पतन भी यहीं होता है, इस सत्य को कितना ही कड़वा कह लीजिए पर ह्रदय इसे स्वीकार कर सन्तुलित रहता है। आधुनिक अर्थतन्त्र की इस दुनिया की विडंबना ही कहिये इंसान के पास हजारों साधनों का भरपूर भंडार हर दिन तैयार हो रहा है, शरीर नाच रहा सब कुछ भोग रहा पर मन तो खालीपन का शिकार हो रहा। सबके रहते इंसान जब उम्र या किसी कारण से लाचार होता है तो टूट कर बिखर जाता है और दिल के अरमान दिल मे ही रह जाते, कोई सुनने वाला, कोई मन से सेवा करने वाला नहीं रहता उसके आस पास। इसका एकमात्र सत्य उतर यही हो सकता:

“जो दिया नहीं वो मिला नही
झूठ से सत्य कभी दबा नहीं
प्रेम को साधन नहीं संवेदना चाहिए
सही जीने के लिये इस सत्य की समझ चाहिए”

लेखक: कमल भंसाली ।

💑अधूरी चाहते💑 शायरी युक्त कविता✍ कमल भंसाली

दोस्तों,
आज के युग में “प्रेम” की स्थिति बड़ी दयनीय सी महसूस हो रही है। अर्थ और आधुनिक साधनों के महत्व के विस्तार के साथ दिमागी तेजी ने प्रेम पोषक सरल तत्व को स्वीकार करना छोड़ दिया है। प्रेम की राह के हमसफर बनकर भी लोग अपनी निजी सुविधाओं का ज्यादा ख्याल रखते है। “त्याग” और “संयम” की जगह लोग इल्जाम और बदनामी का सहारा लेकर “प्यार” की पवित्रता को नष्ट कर रहे है। आप इसे उर्दू और हिंदी शब्दों के संगम से बनीे शायरी युक्त कविता कह सकते है। प्रयास यही है कि हम समझे कि”प्रेम” आज भी इंसान की नहीं खत्म होने वाली “चाहत” है। लेखक व रचियता : कमल भंसाली

मेहरबानी ही थी उनकी जो कभी प्यार किया
हमें बेवफाई का सौदाई कहा स्वीकार किया
हमने माना खुद को हमने ही बदनाम किया
इल्जाम उनका दिल से हम ने स्वीकार किया

पर उन्हें न कभी मायूसी का आलम दिया
जहर जुदाई का चुपचाप सहा और पिया
आरजू हमारी उनके कदमों की पायल रही
जब मन किया उनका पहन कर उतार दिया

बेवफा हमें वो कहे इस रस्म का निर्वाह करना होगा
दिल किसी का टूटे ये “प्यार” का कोई दस्तूर होगा
पर ख्यालात हमारी मौहब्बत का तो है कुछ और
महसूस कर लो “समझ मौहब्बत” की होती कुछ और

सुरमई रोशन हो जाती कभी कोई शाम
दिल की महफिल सजती उनके ही नाम
अब तो अँधेरों की ही तलाश सदा रहती
अधूरी प्रेम कहानी सब कुछ छिपा जाती

उनकी तस्वीर को सदा भीगी पलकों से छुआ
खुद को खोकर उन्हें अपनी धड़कनों में पाया
प्रेमित हुए फूलों के हर रंग से चेहरा चित्रित किया
तस्वीर अधूरी रही फिर भी इसे “प्रेम” नाम ही दिया

कुछ बैचेनिया आज भी उदासियां दे देती
जब उनमें किसी पलकों की झुकावट होती
बिंदिया उनकी जब भी पसीने से बिखर जाती
आंसूं की बूंद बन मेरे तसव्वुर से निखर जाती

बड़ी बेबाक होती जिंदगी की अजीब राहें
पता नहीं ये किसे कब चाहे कब भूल जाये
प्रीतम से सितमगर तक का दस्तूर निभाये
इनायत की राह में कांटो की चुभन सह जाये

नहीं कहता प्यार में सदा हमारा इकरार रहे
पर इजहार से हर मौसम में सदा बहार रहे
आरजू इतनी समझें कि वफा सदा बेकरार रहे
आलमे तसब्बुर हो जहां की निगाहों में वजूद रहे

✍💖 रचियता 💕कमल भंसाली

👽अंतिम इंतजार 👾मौत👹कमल भंसाली

“मौत”
मेरे लिए पावन
उसका दामन “शिव” सावन
जीवन केअंतिम क्षोर पर
अस्त होते जिस्म का आह्ववान
मौत तो है “महान”

जन्म के बाद का
एकमात्र सत्य
“मौत”
बाकी दुनिया सिर्फ अस्तित्व
पल में समाई अंतिम सांस
बेकरारी से
जिसका करती इंतजार
मानो बिछड़ी प्रेमिका की
आलिंगन के लिए तैयार
उसके बिना जीवन का चलना बेकार
यही मेरा “मौत” से एकमात्र इकरार

समझ मेरी
अक्सर कहती मुझसे
“मौत” से न कभी डर
सही कर्म हो तो बनाती निडर
तय करती आस्थाओं का अगला सफर
मकसद से मिले अगले जीवन की नई डगर

“मौत”
धर्म कर्म के गुलशन की बहार
अपना लेना ही सही जब लेने आये द्वार
जाना तय तो फिर “मौत” की क्या फिकर
रोते आये हंसते ही जाना रखो ऐसा जिगर
“क्या तेरा क्या मेरा” बने रहे दिलखुश हमसफर
जब कहे मौत चल मेरे साथ चलने को रहे तब तैयार
अच्छा ही लगेगा कर्मो का अंतिम ये आत्मिक सफर
दोस्तों, “मौत” मेरे लिए
सुनहरी उज्ज्वल अंतिम डगर
उसका आगमन ही अब “इंतजार”
रचियता: कमल भंसाली

😆तुम्हारी मुस्कराहट😅✍ कमल भंसाली

तुम जरा मुस्करालो
जिंदगी को मकसद मिल जायेगा
जरा मेरा यकीन कर लो
हर मंजिल को स्वर्णिम सवेरा मिल जायेगा
तमस में भटकती राहों को मंजिल द्वार मिल जाएगा
पथ गीतों को बहारों के आने का संदेश मिल जाएगा
तुम जरा….

तुम्हारे मुस्कराने के हर अंदाज से
चमन की हर कली खिलखिलाती
दीप आशाओं के प्रज्वलित करती
सुख सन्देश की किरणे बिखेर जाती
अपनी एक मुस्कराहट को जरा सहमति दे दो
मुस्कराकर जग को ये स्वर्णिम सा सन्देश दे दो
तुम जरा….

कल तुम्हारी मुस्कराहट जीवन पथ की हो जाएगी
तेरी मुस्कराहट मेरे से होती हर मंजिल तक जाएगी
हमारी हो जग में हर चेहरे की रौनक बन इठलाएगी
स्वरः वीणा के सुर में सज लय से मधुरता ही लायेगी
सह्रदय से निकली मुस्कराहट मंदाकिनी बन जाएगी
तुम….

कल न भी होंगे तो मुस्कराहट जहां में रहेगी
यह अमानत हमारी सदाबहार ही कहलाएगी
उपहार हमारा यह हर सांस में खुशबू ही फैलाएगा
हर दिन उज्ज्वलता की प्रखरता से निखर जाएगा
यह ख्याल कर जब हर कोई मधुरता से मुस्करायेगा
सच कहता जग मुस्कराहटों का गुलशन कहलायेगा
तुम जरा….

मायूसी को जिंदगी में न पनाह दो तो मुस्कराओगे
उदासी को अंदर तक न सैर कराओ तो मुस्कराओगे
प्रेम को जीवन का मकसद बनाओ तो मुस्कराओगे
मकरन्द बन कर छा जाओ तो भी तुम मुस्कराओगे
पल की एक मुस्कराहट से हर दिल मे बस जाओगे
तुम जरा…