💙 क्षमा 💚 कमल भंसाली

” क्षमा” को सरल व शांत जीवन के लिए सारगर्भित शब्द ही नहीं अपितु जीवन को सही निर्देश प्रदाता समझना सही होगा। इंसान कितनी ही ऊंचाइयों तक का सफर कर ले, उसकी जीवन अवधि तो सीमित ही रहती है। गलतियां दैनिक जीवन के व्यवहारों मे होने वाली एक सहज प्रक्रिया है, उन गलतियों को सुधारने में क्षमा के योगदान को हम पूर्ण रुप से नकार नहीं सकते। जैन धर्म व जैन शास्त्रों ने क्षमा को सिर्फ ह्रदय से जोड़ा ही नहीं अपितु आत्मशुद्धि का एक बेजोड़ साधन बताया है। इसके पीछे इसकी सात्विकता की सुंदरता को जानना जरूरी है। “समत्सवरी” के पावन अवसर का हर कोई सही उपयोग अगर करने की चाह रखता है तो “क्षमा याचना दिवस” कभी नहीं भूलना चाहिए। सभी व्यवहारिक सम्बन्धों के साथ हर रिश्तें को भी क्षमा द्वारा मधुरता प्रदान करनी चाहिए। क्षमा को कभी कायरता नहीं समझनी चाहिए, सच में तो ये तो वीरो का आभूषण है। आप सभी से मेरी भी क्षमा याचना मन, वचन और कर्म से किसी भी रुप मे अगर आप मुझसे आहत हुए । आशा है, आप “क्षमा” पर रचित इस मुक्क्तक रुप मे कविता का महत्व समझेंगे।
“क्षमा याचना” सहित
प्रस्तुति✍💖 कमल भंसाली 💟
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क्षमा सिर्फ जीवन का सार ही नहीं उसका यह आधार
लेने वाले का देने वाले पर कर्मो का दिया है अधिकार
क्षमा से ही तय होता जीवन का सहज सरल सा प्रकार
सच है यही तय करता जीवन का हर गंभीर आकार
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युग परिवर्तन से जीवन बहुत सी नकारत्मकता ले लेता
अहिंसा की चाहत पर हिंसा का बोलबाला बढ़ जाता
संयम का वजन बढ़ जाने से व्यवहार मधुरता खो देता
क्षमा की भावना फिर से जीवन को स्नेहभूत कर देता
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“क्षमा” का संदेश हर धर्म के गुरुओं की ज्ञानित भाषा
काम, क्रोध, मोह और लालच है हिंसा की परिभाषा
सहज जीवन जीना है तो न करे कभी कोई भी हिंसा
गलती हुई तो क्षमा मांगने व देने की रहे सदाअभिलाषा
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क्षमा स्वर्णिम सवेरा, दूर करता शत्रुता गहनतम अंधेरा
शंकित मन को करता निडर, ये है मित्रता की प्रेम डगर
इंसान कुछ भी हुआ भूल जाता अमृत का भंडार गहरा
सहनशीलता जीव का आधार क्षमा उसका एक प्रकार
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क्षमित हो न रखे कुछ भी वैमनस्य आत्मा के भीतर
क्षमा तहे दिल से जो करे देवत्व रहता है उसके अंदर
क्षमा जीवन आकाश का चंद्रमा शीतलता है बेशुमार
“क्षमा वीरस्य भूषणम”न समझे इसे कायरता का श्रृंगार
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रचियता: कमल भंसाली

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🌷कृष्णा 🌹कृष्णा 🌷कमल भंसाली

कृष्णा कृष्णा
बढ़ रही जग में तृष्णा
जग की अब एक ही पुकार
तुम धरा पर फिर आओ एक बार
कृष्णा…..

नन्द के लाल
यशोदा ने किया कि कमाल
तुम्हे लिया संभाल
बदल गया है जग की चाहतो का भूगोल
तुम बिन कौन जो इसे ले संभाल
आओ नन्द दुलारे
कृष्णा….

नटखट थे तुम
तुम ही थे सारथी
तुम्ही थे सुदामा साथी
तुम जग रथ सारथी
तुम्ही थे द्रौपदी की पुकार
आज तुम्हारी दरकार
समझलों जग की हाहाकार
आओ फिर एकबार
कृष्णा….

सांवले सलोने
बंसी रही पुकार
देख सहेलियों संग राधा का इंतजार
मुस्कराये माखन चोर
हमें तो तुम पर ही एतवार
जग के पालन हार
अब तेरा ही इंतजार
दुनिया के पालन हार
कृष्णा…