👨‍👩‍👧‍👧रिश्तों का बाजार ✍️कमल भंसाली

“रिश्तो” के बाजार मे
दुनिया के “व्यवहार” मे
तलाश है अपने प्यार के अस्तित्व की
जीवन में उनके होने के महत्व की

माना, इस बाजार की महिमा निराली
अनोखी होती इसकी कार्य प्रणाली
यहां सब कुछ बिकता
पर सही कुछ भी नहीं दीखता
जो दीखता वो तो एकदम
“सस्ता” भी नहीं मिलता
जो नहीं पसंद किसी को आता
वो दुकान की धरोहर बन
” पुरानी पहचान ” कहलाता

ऊपरी मान समान अनोखे उत्पादन
ऊंची दुकान फीके पकवान
चलती मुद्रा है ‘झूठी शान’
ठग कर भी लोग नहीं होते यहां परेशान
‘रिश्ते’ ही होते आखिर धरती के भगवान

देखो देखो कितने है यहां महान
गले मिलने से लगता
हो जायेगे अभी हम पर कुर्बान
मानों सब लुटा देंगे ये मेहरबान
शब्दों में होगा प्रेम का इजहार
समय पर नहीं होते दर्शन यार
हां, कुछ ऐसा ही होता
रिश्तों का लुभावना प्यार

खास जरूरत न होगी
जब किसी रिश्ते कि
तो बदल जायेगा इनका व्यवहार
तुम इसे कुछ भी कहलो
दुकानदर तो होता ही ईमानदार
फिर भी
मै तो इतना ही कहूंगा
“रिश्ते ” निभानी की “जिम्मेदारी”
इस दुनिया के बाजार में
सही होती सिर्फ
खरीददार की “समझदारी”
रचयिता ✍️” कमल ” भंसाली

💑प्रेम यात्रा👨‍❤️‍👨✍️कमल भंसाली

जलन जब सीने में हो
आंखों में बहता हो
जब निशब्द पानी
बता !
महबूब मेरे
जिंदगी
कैसे तुझे भूल जाएगी
जब याद तेरी आयेगी
तो लहराती तेरी तस्वीर
कैसे मेरा दिल बहलायेगी
💌
आज तूं नहीं
कल मैं नहीं
कोई बात नहीं
तेरे जज्बात ही सही
इस जन्म में मुलाकात
फिर नहीं
तो भी
कोइ बात नहीं
पर
तेरे बिना
जिन्दगी से डर लगता
मौत से तो कभी नहीं
बिन तेरे जीना सहज नहीं
मौत से कोई परहेज नहीं
💟
मानता
प्रेम की परकाष्ठाता
एक विश्वास
एक आस्था
जो
मिलन में कदापी नहीं
घावों की गहनता
जलन में कभी नहीं
पर जानले
मेरे सनम
जुदाई मेरे लिये
दर्द की
कोई सौगात नहीं
है,
ये तो सिर्फ
एक मकसद
एक प्रेममय यात्रा
जिसका कोई
आदि न कोई अंत
क्योंकि
मैं ठहरा
प्रेम पथ का राही

रचियता ✍️…..कमल भंसाली

🚶ख्याल💃✍️कमल भंसाली

दिल तोडा हजार बार
सितमगर ने नहीं पूछा
हाल मेरा एकबार
कैसे कर लूं
ऐसे प्यार पे एतबार
दिल…

माना नादां दिल था मेरा
उस पर था अपने वारा
भूल हुई जज्बात का था मारा
न जाना प्यार में भी कभी होता सवेरा
चारों तरफ तो छाया धुंध भरा अंधेरा
दिल….

नाजनीन को कैसे समझाऊं
डूबे दिल को
कैसे उसके कजरारे नैनों
में तैरना सिखाऊं
लब पर उसके भी प्यार के छाये साये
इस अहसास को उसे
कैसे आहिस्ता से समझाऊं
दिल….

है “खुदा”
दिल उसका सलामत रखना
मेरे अहसासित प्यार को
लम्बी उम्र की दुआ देना
जिंदगी
बिन प्यार न चले
उसका ख्याल
मेरे दिल में
सदा यों ही बनाये रखना
दिल…..
रचियता✍️ कमल भंसाली

👨‍❤️‍👨तेरी जुदाई✍️कमल भंसाली

वक्त की रुसवाई और तुम्हारी बेवफाई
सनम मेरे दिल को दे रही दर्दीली तन्हाई
हालात बदल गये हो गई हमारी जुदाई
खाई कसमों को मौहब्बत रास न आई
वक्त…

मौसम का मिजाज भी काफी बिगड़ गया
चांद भी गम के काले बादलों में छिप गया
तन्हा हो दिल तेरे इश्क में बदनाम हो गया
प्यार का तुम्हारा तौहफा दिल को रुला गया
वक्त…

कल तूं जब कभी किसी गैर के आलिंगन में होगी
कसम से हमारी राहे उस दिन से अलग अलग होगी
वो शायद जिंदगी की आखरी जज्बाती रात होगी
जिसमें बेवफा कहकर ही दिल को सांत्वना मिलेगी
वक्त….

जिसकी भी बनो तुम उसकी ही रहना
अब कभी पहलू बदल न बदनाम होना
कल मेहंदी जिसके भी नाम की रचाना
उसको ही जन्म भर का प्रियतमा बनाना
वक्त…

टूटा दिल भी अजीब सी आरजू करता रहता
झूठी मौहब्बत के लिए सदा ही इबादत करता
दिल देकर दर्द के मंजर के इर्द गिर्द ही घूमता
अपनी हस्ती भूल परवाना बन कर जल जाता
वक्त…

रचियता ✍️ कमल भंसाली

नफरत दिल में इतनी✍💝 कमल भंसाली

नफरत दिल में न इतनी बसाये
कि संसार में अनचाहे बन कर रह जाये
जीना सब का बराबर का हक
हो सके तो दिल को यह बात समझाये
इंसान है इसलिए सही होगा
इंसानियत की राह के ही मुसाफिर कहलाये
नफरत..

हर धर्म यही कहता मैं सब में एक समान सा रहता
तुम फिर क्यों इसे अलग अलग होने का संकेत देते
कितने अच्छे कितने बुरे अगर स्वयं को तुम जान लेते
मैं जीवन का सार बन तुम्हारे आत्मा मे ही सदा बसता
नफरत..

बातें बड़ी बड़ी करके खेल कई प्रकार के खेलते
आडम्बरों की छाया में क्यों इतने पाप को झेलते
स्वयं समझने का दावा कर स्वयं ही अनजान रहते
स्वार्थ में नैतिकता की राह एक कदम भी नहीं चलते
नफरत…

सीधा सा जीवन कम जरूरतों की चाहत रखता
विलासिता के मटमैला चोले में वजूद फंस जाता
हसरतों के वश में आकर वो सब कुछ भूल जाता
माया जाल में फंस जाता वो इंसान नहीं रह पाता
नफरत…

फलसफा जीवन का इतना साँसों का राज जितना
जीना है सही तो हर कर्म में अहिंसा का साथ रखे
सत्य की सीढ़ियों से सफलता की मंजिल को पाना
मानवता ही धर्म इसे ही जीवन भर ये विश्वास रखे
नफरत…..
रचियता✍ 💖 कमल भंसाली

“सम्बन्धों” मुक्तक आज के संदर्भ में

दोस्तों,
मुक्तक के रुप आज के बनते -बिगड़ते सम्बन्धों को समझने की एक मेरी अनचाही कोशिश है। नहीं चाहता सांसारिक सम्बन्ध जीवन की गरिमा भूल जाये। सबसे बड़ा खतरा संस्कारों को भूल नई स्वतंत्र राहों की तलाश से है। पर कहते है जो जुड़ता वो बढ़ता जो टूटता वो विलीन हो जाता। भगवान से प्रार्थना है सम्बन्धों की दुनिया सदाबहार रहे। शुभकामनाओं सहित✍ लेखक व रचियता**कमल भंसाली
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रिश्ते जो एक बार बिगड़ जाते
वापस कम ही जुड़ पाते
क्योंकि सच्चाई के जो पन्ने होते
वो नदारद हो जाते
बिन सही मलहम के हरे घाव तो
हरे ही रह जाते
लगे जख्म भी कभी सूख नहीं पाते
इसलिए
बिगड़े आपसी सम्बन्ध कभी सुधर नहीं पाते

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समझने की बात समझनी जरूरी होती
हर सम्बन्ध की अपनी कुछ मजबूरी होती
छोटी चिंगारी बन जब कोई बात बिगड़ जाती
निश्चित है, हर रिश्तों को स्वार्थ की बीमारी लग जाती
अच्छे रिश्तों की छवि दिल छोड़ दिमाग में चढ़ जाती
लाइलाज बीमारी है यह रिश्तों के प्राण तक ले जाती

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जीवन और सम्बन्ध का है आपसी गढ़ बंधन
एक दूसरे के पूरक करते समझ के अनुबन्धन
“खुद जियो और दूसरों को जीने दो” है प्रबंधन
जिससे विश्वास की सीमा का न हो कभी उल्लंघन

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अर्थ के संसार ने आज रिश्तों की परिभाषा बदल दी
हर रिश्तों की कीमत जरुरत अनुसार तय कर दी
बिन संस्कारों की जिंदगी बिन परवाह की राह चलती
“कल को किसने देखा” कहकर आज पर ही इतराती
जब तन्हा हो असहाय बन जाती, फांसी पर चढ़ जाती
जीवन में सम्बन्धों के महत्व का अदृश्य संदेश दे जाती

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न कोई माता, न कोई पिता, युग अब यही सन्देश देता
स्वयं से ही स्वयं बना रिश्तों की महिमा को ठुकरा देता
जीना खुद का अधिकार, अब खुद को यह ही भाता
हर सम्बन्ध अब दिल के अंदर की यात्रा नहीं करता
बाहरी दुआ सलाम में मधुरता से मुस्करा कर रह जाता
सतह पर जरुरत के समय तक थोड़ी देर साथ चलता
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सब मुक्तक यही कहते “सम्बन्धों” से जीवन बनता
सम्बन्ध से ही जीवन आगे की तरफ यात्रा करता
हर रिश्ता हर दिन का सहयात्री, सोये को जगाता
भावपूर्ण हो जो स्नेह,विश्वास और प्रेम से निभाता
जीवन की हर मंजिल तक हर “सम्बन्ध”अमर रहता
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💖💖 ✍ रचियता💘 कमल भंसाली 💝💝

💑अधूरी चाहते💑 शायरी युक्त कविता✍ कमल भंसाली

दोस्तों,
आज के युग में “प्रेम” की स्थिति बड़ी दयनीय सी महसूस हो रही है। अर्थ और आधुनिक साधनों के महत्व के विस्तार के साथ दिमागी तेजी ने प्रेम पोषक सरल तत्व को स्वीकार करना छोड़ दिया है। प्रेम की राह के हमसफर बनकर भी लोग अपनी निजी सुविधाओं का ज्यादा ख्याल रखते है। “त्याग” और “संयम” की जगह लोग इल्जाम और बदनामी का सहारा लेकर “प्यार” की पवित्रता को नष्ट कर रहे है। आप इसे उर्दू और हिंदी शब्दों के संगम से बनीे शायरी युक्त कविता कह सकते है। प्रयास यही है कि हम समझे कि”प्रेम” आज भी इंसान की नहीं खत्म होने वाली “चाहत” है। लेखक व रचियता : कमल भंसाली

मेहरबानी ही थी उनकी जो कभी प्यार किया
हमें बेवफाई का सौदाई कहा स्वीकार किया
हमने माना खुद को हमने ही बदनाम किया
इल्जाम उनका दिल से हम ने स्वीकार किया

पर उन्हें न कभी मायूसी का आलम दिया
जहर जुदाई का चुपचाप सहा और पिया
आरजू हमारी उनके कदमों की पायल रही
जब मन किया उनका पहन कर उतार दिया

बेवफा हमें वो कहे इस रस्म का निर्वाह करना होगा
दिल किसी का टूटे ये “प्यार” का कोई दस्तूर होगा
पर ख्यालात हमारी मौहब्बत का तो है कुछ और
महसूस कर लो “समझ मौहब्बत” की होती कुछ और

सुरमई रोशन हो जाती कभी कोई शाम
दिल की महफिल सजती उनके ही नाम
अब तो अँधेरों की ही तलाश सदा रहती
अधूरी प्रेम कहानी सब कुछ छिपा जाती

उनकी तस्वीर को सदा भीगी पलकों से छुआ
खुद को खोकर उन्हें अपनी धड़कनों में पाया
प्रेमित हुए फूलों के हर रंग से चेहरा चित्रित किया
तस्वीर अधूरी रही फिर भी इसे “प्रेम” नाम ही दिया

कुछ बैचेनिया आज भी उदासियां दे देती
जब उनमें किसी पलकों की झुकावट होती
बिंदिया उनकी जब भी पसीने से बिखर जाती
आंसूं की बूंद बन मेरे तसव्वुर से निखर जाती

बड़ी बेबाक होती जिंदगी की अजीब राहें
पता नहीं ये किसे कब चाहे कब भूल जाये
प्रीतम से सितमगर तक का दस्तूर निभाये
इनायत की राह में कांटो की चुभन सह जाये

नहीं कहता प्यार में सदा हमारा इकरार रहे
पर इजहार से हर मौसम में सदा बहार रहे
आरजू इतनी समझें कि वफा सदा बेकरार रहे
आलमे तसब्बुर हो जहां की निगाहों में वजूद रहे

✍💖 रचियता 💕कमल भंसाली