😜पर्यावरण🤑 कमल भंसाली

वक्त बेवक्त
बड़ी बेवजह
जिंदगी मुझसे
अपने होने की वजह पूछती
मेरे अंदर के
कलुषित रक्त को
तंग करती
तमतमा कर
उससे यही कहता
मेरी होकर
वो ये सब क्यों पूछती ?
मुझमे अपने होने की
विश्वास की कमी
अक्सर
क्यों ढूंढती ?

सहम सी जाती
थोड़ी धीमी हो जाती
पर बुदबुदाती
अपने ही गैरों जैसे होते
नाजुक रिश्तों को भूल जाते
वजूद मेरा भी
तिलमिला जाता
जिंदगी मेरी ही है
ये मैं भी भूल जाता

पर जब कभी
बाद में शांति से सोचता
सन्दर्भ जब रिश्तों का आता
तो सही से मन में
उनका अस्तित्व क्यों धुंधला जाता
प्यार में
कभी कभी
शक के धुंए का
फूल कैसे उग जाता !

तब यही समझ में आता
हक और अधिकार की रफ्तार में
दिल का पर्यावरण बिगड़ जाता
मैल कहीं तरह से
दिल पर शक की घनेरी कालिख छोड़ जाता
जिंदगी का सवाल
उत्तर की वजह दे जाता
अपने अस्तित्व को
एक नया आयाम दे जाता

रचियता कमल भंसाली

🙏विदाई 2018🙏कमल भंसाली

आओ, कर नमन विदाई दे, भाई
वर्तमान साल से हो रही, जुदाई
जाना आना प्रकृति का आधार
विगत ही देता सुख का उपहार
आओ…

जानेवाले को करते सत सत प्रणाम
आने वाले का भी करते अभिवादन
जीवन का यही है सर्व सच्चा बन्धन
इस बन्धन को करे सहस्त्रों सलाम
आओ….

नया साल सबका हो अति शुभकारी
अनुभव और ज्ञान से बने उपकारी
मानव का मानव से, हो कल्याण
जीवन से किसी का न हो पलायन
आओ…

देखो, सर्द ऋतु लवलीन हो मुस्करा रही
फूलों से, वादियों को भी दुल्हन बना रही
नये साल का भास्कर भी होगा, अति प्रखर
उल्लसित हो मन पायेगा सफलता का शिखर
आओ…

हर साल है अनूठा न सच्चा न ही झूठा
वक्त का करिश्मा कितना तीखा मीठा
सत्यता की धुरी पर ही घूमता, हर वर्ष
कभी गम कभी खुशी, स्वीकृत हों सहर्ष
आओ…

अनुभव विरासत की देकर कर वर्ष करे विहार
जगत जननी जन्मभूमि को कर के नमस्कार
आने वाले का जाना तय, यही है जीवन का सफर
नव में रहे, पर भव में बने रहे देवत्व सा व्यवहार
आओ…..

💃क्षण भर🕴️✍️कमल भंसाली

बदली सी तेरी सूरत बहुत कुछ कहती
इन आँखों में अब छवि दूसरे की सजती
तेरे गुमशुदा ख्यालों में अब बेवफाई रहती

मुखरित हुआ जब भी छुपा हुआ प्यार तुम्हारा
सच कहता ह्रदय विश्वास से कहता ये नहीं मेरा
उसांस भर न कहना ये सिर्फ अहसास ही मेरा

माना स्वल्प जीवन बहुत सारे अरमान रखता
पर बेरुखी की कंपकंपी से जिगर ठहर जाता
एक अदृष्यत स्वप्न पलकों तले छिप सा जाता

सबकुछ समझ कर ही मै सदा मुस्कराता
असहज न हो प्रिय प्यार में ऐसा भी होता
क्षण के लिए मन का समर्पण भटक जाता

प्यार का प्यार ही रहने दो अब इसका इम्तहां न दो
तुम न समझो कसक प्यार की सिर्फ मुझे विश्वास दो
तौहफा है प्यार बिन कसम का जुनून इसमें बहने दो

कदम भटके दिल कहीं और तेरा भटके
दिलवर बेगानी हसरतों के न लगे झटके
लौट आ कई तूफानों में कश्ती न अटके

प्रिय सांझ सवेरे में कितना कुछ घट बढ़ जाता
उम्मीद नाउम्मीद से वर्तमान का पन्ना भर जाता
शुकून ही मिलता प्रियतम लौट कर घर आ जाता
क्षण भर का भटका प्यार आलिंगन में समा जाता

🙌संवेदन पूर्ण सत्य🕸️कमल भंसाली

“दुनिया में अगर कोई सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है वह है “दूसरों के द्वारा बोलेजाने वाला सत्य”, यह एक तथ्य है, इससे इंकार करना शायद ही आसान होगा। “सत्य” बोलने वाले लोगो की तादाद नगण्य के आसपास ही अब रहती परन्तु किसी समय झूठ बोलने वालो की गिनती हुआ करती थी, इस बात को आज का आधुनिक युग शायद ही स्वीकार करेगा। आज सत्य को एक हारा हुआ खिलाड़ी या नेता भी स्वीकार करने से झिझकता है। शाश्वत चिंतन करे तो ये बात समझ में आ सकती है कि दुनिया का अस्तित्व पूर्ण सत्य में आज भी समाया है, हम चाहे या नहीं प्रकृति अपने आप को सत्य से अलग नहीं कर सकती। हम कितना ही झूठ का दैनिक जीवन में प्रयोग कर ले पर आत्मा उसे अंदर तक नहीं ले पाती, हमारे बोले हुए किसी भी झूठ पर उसका कराहना महसूस किया जा सकता है।

“हम जी रहे है यह सत्य हो सकता है” परन्तु हम ‘सही’ जी रहे ये संदेहपूर्ण है। सवाल किया जा सकता है, क्या सत्य पूर्ण जीवन जीया सकता है ? उत्तर आज के युग में आसान नहीं लग रहा कारण जीवन की गतिविधिया आजकल झूठ के इर्द गिर्द ही ज्यादा समय बिता रही है। कभी सत्य को जीवन की धुरी समझा जाता था, आज उसकी जगह झूठ ले रहा है, इसे जीवन की विडम्बना ही कहे क्योंकि जीवन आज इसी कारण शायद टूट कर बिखर रहा है। जीवन को आज सब सांसारिक सुविधायें बहुत तेजी से प्राप्त हो रही है और बताना भी जायज नहीं होगा जीवन अपना सास्वत मूल्य खो चूका है, और स्वयं ही किसी त्रासदी का शिकार होकर दुनिया को अलविदा कह देता है। सही भी है, झूठ का भारीभरकम वजन कब तक ढोयेगा।

चाणक्य राजनीति के गुरु थे उन्होंने राजधर्म के लिए कई तरह की चालाकियों का सहारा लिया परन्तु झूठ को दूर रहकर। उनके इस कथन पर गौर करते है ” सत्य मेरी माता है। आध्यात्मिक ज्ञान मेरा पिता है। धर्माचरण मेरा बंधु है। दया मेरा मित्र है। भीतर की शांति मेरी पत्नी है। क्षमा मेरा पुत्र है। मेरे परिवार में ये छह लोग है।” काश आज के राजनेताओं में इस तरह के विचार अपनाये हुए होते तो निश्चित ही भारत आंतरिक रुप से कमजोर और गरीब राष्ट्र की गिनती में न होता।

इंसान का व्यक्तित्व प्रकृति ने बड़ी सूझबूझ वाला बनाया है, सर्वगुण और अवगुण वाले संसार में उसको अपना व्यक्तित्व स्वयं निर्धारण करने का अधिकार भी उसे दिया। सक्षम व्यक्तित्व वाले व्यक्ति के जीवन दर्शन पर सरसरी नजर डालने से इस बात से इंकार नहीं करना पड़ेगा कि बिना असत्य का सहारा लिए वो इस मंजिल तक पंहुचे है।

असहाय सी स्थिति है आज जीवन की, भाग्य से प्राप्त खुशहाली अति अर्थ के दीमक से हर दिन जीवन को छीजत प्रदान कर रही है। पल की मोहताज जिंदगी अर्थ के कारण कटुता भरे वातावरण में कई तरह की शारीरिक और मानसिक बीमारियों के विषालु कीटाणुओं से ग्रस्त हो रही है। इस का प्रमुख कारण हम सब समझकर भी नहीं समझते वो है “अति दौलत की भूख”।
हर रोज हमारे आसपास ही क्या हमारे स्वयं के जीवन मे उसकी कमी या अति, जीवन को संकुचित होने का अनुभव कराती है। जब की जानते है, जब तक जीवन है, तब तक मालिक होने का दावा कर सकते है पर उसके बाद उसका मालिक कोई और स्वतः ही हो जाता। अतः इस सत्य को स्वीकार कर लेना ही सही होता है अर्थ के कारण किसी भी सम्बन्ध को कटुता का अनुभव न दिया जाय। कठिन समय मे आपसी प्रेम काफी फलदायक होता है।

कहते है जीवन की शुरुआत प्रेम से हुई और प्रेम सदा सत्य से संपन्न रहना पसन्द करता है, झूठ से वो सदा नफरत करता है। किसी शारीरिक बंधन के चलते वो झूठ को मजबूरी से सहन करता है। इस तथ्य को रिश्तों की दुनिया में सदृश्य समझा जा सकता है। रिश्तों के बनते बिगड़ते तेवर जीवन को कई तरह से प्रभावित करते है। रिश्तों की मधुरता जीवन को सकारात्मक चिंतन प्रदान कर उसे मजबूत कर सकती है। गलत भावनाओं के बस में होकर रिश्तों में कटुता का संकेत देना मात्र जीवन के पथ को कठोरता प्रदान कर सकता है, अतः रिश्तों के प्रति हमारी संवेदनशीलता में सत्य का अंश सही मात्रा में रखना उचित लगता है। जीव विज्ञानी डेविड जार्ज हस्कल का यह कथन आज के युग अनुसार अक्षरस सत्य लगता है कि ” The forest is not a collection of entities (but) a place entirely made from strands of relationship”.

आलोचना से पीड़ित प्रेम कभी भी जीवन को सुख नहीं देता परन्तु समझने की बात है बिना आलोचना का प्रेम चापलूसी की या गुलामी की श्रेणी में आता है, प्रेम का निम्नतम पतन भी यहीं होता है, इस सत्य को कितना ही कड़वा कह लीजिए पर ह्रदय इसे स्वीकार कर सन्तुलित रहता है। आधुनिक अर्थतन्त्र की इस दुनिया की विडंबना ही कहिये इंसान के पास हजारों साधनों का भरपूर भंडार हर दिन तैयार हो रहा है, शरीर नाच रहा सब कुछ भोग रहा पर मन तो खालीपन का शिकार हो रहा। सबके रहते इंसान जब उम्र या किसी कारण से लाचार होता है तो टूट कर बिखर जाता है और दिल के अरमान दिल मे ही रह जाते, कोई सुनने वाला, कोई मन से सेवा करने वाला नहीं रहता उसके आस पास। इसका एकमात्र सत्य उतर यही हो सकता:

“जो दिया नहीं वो मिला नही
झूठ से सत्य कभी दबा नहीं
प्रेम को साधन नहीं संवेदना चाहिए
सही जीने के लिये इस सत्य की समझ चाहिए”

लेखक: कमल भंसाली ।

🚶ख्याल💃✍️कमल भंसाली

दिल तोडा हजार बार
सितमगर ने नहीं पूछा
हाल मेरा एकबार
कैसे कर लूं
ऐसे प्यार पे एतबार
दिल…

माना नादां दिल था मेरा
उस पर था अपने वारा
भूल हुई जज्बात का था मारा
न जाना प्यार में भी कभी होता सवेरा
चारों तरफ तो छाया धुंध भरा अंधेरा
दिल….

नाजनीन को कैसे समझाऊं
डूबे दिल को
कैसे उसके कजरारे नैनों
में तैरना सिखाऊं
लब पर उसके भी प्यार के छाये साये
इस अहसास को उसे
कैसे आहिस्ता से समझाऊं
दिल….

है “खुदा”
दिल उसका सलामत रखना
मेरे अहसासित प्यार को
लम्बी उम्र की दुआ देना
जिंदगी
बिन प्यार न चले
उसका ख्याल
मेरे दिल में
सदा यों ही बनाये रखना
दिल…..
रचियता✍️ कमल भंसाली

💘वो मेरा दिल ही तो है 💝✍️कमल भंसाली

जीवन की हर रस्म में
हर गम को सहन करने वाला
वो मेरा दिल ही तो है
क्यों न इससे ही प्यार करुं

हर रिश्तें पर जो न्यौछावर हुआ
वो मेरा दिल ही तो है
क्यों न इसका इकरार करुं

उम्र की ऊंची नीची पगडंडियों पर
बिन रफ्तार खोये साथ चला
वो मेरा दिल ही तो है
क्यों इससे मैं इंकार करुं

घायल हुआ दुनिया के दस्तूरों से
बिन शिकायत धड़कता रहा
वो मेरा दिल ही तो है
क्यों न इसका इकरार करुं

जिस्म की हर कमजोरी को
हर पल सहा
वो मेरा दिल ही तो है
क्यों न उसका शुक्रिया अदा करुं

जन्म से पहले से
मृत्यु तक की यात्रा का हमसफर
निर्धन पर निडर
वो मेरा दिल ही तो है
क्यों न उसका ही गुणगान करुं

रचियता✍️कमल भंसाली

👏मेरे प्रभु👏कमल भंसाली✍️

हे प्रभु
खूबसूरती मेरे जीवन को दीजिये
मेरी सारी कमियों को हर लीजिये
पथ की कठिनाइयों को दूर कीजिये
महत्व जीवन का सब समझा दीजिये
👏
हे प्रभु
जिसे अभी तक जीवन समझता रहा
आपको भूल रास्ते नये तलाशता रहा
उनकी हर कमी को ही अपनाता रहा
इस भूल को मेरी आज सुधार दीजिये
👏
हे प्रभु
मानव मन मेरा सदा कमजोर रहा
वासनाओं के फूल ही सूंघता रहा
संयम ही जीवन है ये भूलता रहा
इस भूल का निदान समझा दीजिये
👏
हे प्रभु
असत्य की धुरी पर घूमता रहा जीवन
पथ भटका न मिली कोई सही मंजिल
आदर्शों के गीत तो सदा ही गाता रहा
पर अपनाने से हरदम ही कतराता रहा
जीवन की सही मीमांसा समझा दीजिये
👏
हे प्रभु
जीवन आपका दिया है पवित्र वरदान
समर्पण आप में ही रहे जब तक रहे प्राण
जिस विधि से करुं मैं सही से वापस प्रयाण
उस यज्ञ की सारी रस्में आज समझा दीजिये
👏
हे प्रभु
सकल सफल रहे मेरा यह अनमोल जीवन
हर पथ आपको समर्पित होकर बने पावन
इस जन्म की हर पीड़ा का हो यहीं समापन
गमन पथ को अब मेरी मंजिल समझा दीजिये

👏🏼रचियता और प्रार्थना कार✍️ कमल भंसाली👏