नफरत दिल में इतनी✍💝 कमल भंसाली

नफरत दिल में न इतनी बसाये
कि संसार में अनचाहे बन कर रह जाये
जीना सब का बराबर का हक
हो सके तो दिल को यह बात समझाये
इंसान है इसलिए सही होगा
इंसानियत की राह के ही मुसाफिर कहलाये
नफरत..

हर धर्म यही कहता मैं सब में एक समान सा रहता
तुम फिर क्यों इसे अलग अलग होने का संकेत देते
कितने अच्छे कितने बुरे अगर स्वयं को तुम जान लेते
मैं जीवन का सार बन तुम्हारे आत्मा मे ही सदा बसता
नफरत..

बातें बड़ी बड़ी करके खेल कई प्रकार के खेलते
आडम्बरों की छाया में क्यों इतने पाप को झेलते
स्वयं समझने का दावा कर स्वयं ही अनजान रहते
स्वार्थ में नैतिकता की राह एक कदम भी नहीं चलते
नफरत…

सीधा सा जीवन कम जरूरतों की चाहत रखता
विलासिता के मटमैला चोले में वजूद फंस जाता
हसरतों के वश में आकर वो सब कुछ भूल जाता
माया जाल में फंस जाता वो इंसान नहीं रह पाता
नफरत…

फलसफा जीवन का इतना साँसों का राज जितना
जीना है सही तो हर कर्म में अहिंसा का साथ रखे
सत्य की सीढ़ियों से सफलता की मंजिल को पाना
मानवता ही धर्म इसे ही जीवन भर ये विश्वास रखे
नफरत…..
रचियता✍ 💖 कमल भंसाली

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“सम्बन्धों” मुक्तक आज के संदर्भ में

दोस्तों,
मुक्तक के रुप आज के बनते -बिगड़ते सम्बन्धों को समझने की एक मेरी अनचाही कोशिश है। नहीं चाहता सांसारिक सम्बन्ध जीवन की गरिमा भूल जाये। सबसे बड़ा खतरा संस्कारों को भूल नई स्वतंत्र राहों की तलाश से है। पर कहते है जो जुड़ता वो बढ़ता जो टूटता वो विलीन हो जाता। भगवान से प्रार्थना है सम्बन्धों की दुनिया सदाबहार रहे। शुभकामनाओं सहित✍ लेखक व रचियता**कमल भंसाली
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रिश्ते जो एक बार बिगड़ जाते
वापस कम ही जुड़ पाते
क्योंकि सच्चाई के जो पन्ने होते
वो नदारद हो जाते
बिन सही मलहम के हरे घाव तो
हरे ही रह जाते
लगे जख्म भी कभी सूख नहीं पाते
इसलिए
बिगड़े आपसी सम्बन्ध कभी सुधर नहीं पाते

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समझने की बात समझनी जरूरी होती
हर सम्बन्ध की अपनी कुछ मजबूरी होती
छोटी चिंगारी बन जब कोई बात बिगड़ जाती
निश्चित है, हर रिश्तों को स्वार्थ की बीमारी लग जाती
अच्छे रिश्तों की छवि दिल छोड़ दिमाग में चढ़ जाती
लाइलाज बीमारी है यह रिश्तों के प्राण तक ले जाती

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जीवन और सम्बन्ध का है आपसी गढ़ बंधन
एक दूसरे के पूरक करते समझ के अनुबन्धन
“खुद जियो और दूसरों को जीने दो” है प्रबंधन
जिससे विश्वास की सीमा का न हो कभी उल्लंघन

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अर्थ के संसार ने आज रिश्तों की परिभाषा बदल दी
हर रिश्तों की कीमत जरुरत अनुसार तय कर दी
बिन संस्कारों की जिंदगी बिन परवाह की राह चलती
“कल को किसने देखा” कहकर आज पर ही इतराती
जब तन्हा हो असहाय बन जाती, फांसी पर चढ़ जाती
जीवन में सम्बन्धों के महत्व का अदृश्य संदेश दे जाती

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न कोई माता, न कोई पिता, युग अब यही सन्देश देता
स्वयं से ही स्वयं बना रिश्तों की महिमा को ठुकरा देता
जीना खुद का अधिकार, अब खुद को यह ही भाता
हर सम्बन्ध अब दिल के अंदर की यात्रा नहीं करता
बाहरी दुआ सलाम में मधुरता से मुस्करा कर रह जाता
सतह पर जरुरत के समय तक थोड़ी देर साथ चलता
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सब मुक्तक यही कहते “सम्बन्धों” से जीवन बनता
सम्बन्ध से ही जीवन आगे की तरफ यात्रा करता
हर रिश्ता हर दिन का सहयात्री, सोये को जगाता
भावपूर्ण हो जो स्नेह,विश्वास और प्रेम से निभाता
जीवन की हर मंजिल तक हर “सम्बन्ध”अमर रहता
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💖💖 ✍ रचियता💘 कमल भंसाली 💝💝

💑अधूरी चाहते💑 शायरी युक्त कविता✍ कमल भंसाली

दोस्तों,
आज के युग में “प्रेम” की स्थिति बड़ी दयनीय सी महसूस हो रही है। अर्थ और आधुनिक साधनों के महत्व के विस्तार के साथ दिमागी तेजी ने प्रेम पोषक सरल तत्व को स्वीकार करना छोड़ दिया है। प्रेम की राह के हमसफर बनकर भी लोग अपनी निजी सुविधाओं का ज्यादा ख्याल रखते है। “त्याग” और “संयम” की जगह लोग इल्जाम और बदनामी का सहारा लेकर “प्यार” की पवित्रता को नष्ट कर रहे है। आप इसे उर्दू और हिंदी शब्दों के संगम से बनीे शायरी युक्त कविता कह सकते है। प्रयास यही है कि हम समझे कि”प्रेम” आज भी इंसान की नहीं खत्म होने वाली “चाहत” है। लेखक व रचियता : कमल भंसाली

मेहरबानी ही थी उनकी जो कभी प्यार किया
हमें बेवफाई का सौदाई कहा स्वीकार किया
हमने माना खुद को हमने ही बदनाम किया
इल्जाम उनका दिल से हम ने स्वीकार किया

पर उन्हें न कभी मायूसी का आलम दिया
जहर जुदाई का चुपचाप सहा और पिया
आरजू हमारी उनके कदमों की पायल रही
जब मन किया उनका पहन कर उतार दिया

बेवफा हमें वो कहे इस रस्म का निर्वाह करना होगा
दिल किसी का टूटे ये “प्यार” का कोई दस्तूर होगा
पर ख्यालात हमारी मौहब्बत का तो है कुछ और
महसूस कर लो “समझ मौहब्बत” की होती कुछ और

सुरमई रोशन हो जाती कभी कोई शाम
दिल की महफिल सजती उनके ही नाम
अब तो अँधेरों की ही तलाश सदा रहती
अधूरी प्रेम कहानी सब कुछ छिपा जाती

उनकी तस्वीर को सदा भीगी पलकों से छुआ
खुद को खोकर उन्हें अपनी धड़कनों में पाया
प्रेमित हुए फूलों के हर रंग से चेहरा चित्रित किया
तस्वीर अधूरी रही फिर भी इसे “प्रेम” नाम ही दिया

कुछ बैचेनिया आज भी उदासियां दे देती
जब उनमें किसी पलकों की झुकावट होती
बिंदिया उनकी जब भी पसीने से बिखर जाती
आंसूं की बूंद बन मेरे तसव्वुर से निखर जाती

बड़ी बेबाक होती जिंदगी की अजीब राहें
पता नहीं ये किसे कब चाहे कब भूल जाये
प्रीतम से सितमगर तक का दस्तूर निभाये
इनायत की राह में कांटो की चुभन सह जाये

नहीं कहता प्यार में सदा हमारा इकरार रहे
पर इजहार से हर मौसम में सदा बहार रहे
आरजू इतनी समझें कि वफा सदा बेकरार रहे
आलमे तसब्बुर हो जहां की निगाहों में वजूद रहे

✍💖 रचियता 💕कमल भंसाली

😁जरा मुस्कराइये😀 कमल भंसाली

“मुस्कराहटों” की अगर वजह होती
तो यकीन कीजिये
“जिंदगी” दिल की दुनिया
से दूर ही रहती
फिर शायद
अजनबी राह में स्वयं चलने को
बिन मकसद मजबूर होती
कुछ नहीं कहती
चुपचाप
बेवजह साँसों का साथ निभाती
इसलिए जरा दिल की भी सुनिये
मुस्कराने की वजह मत ढूंढिये
सिर्फ
“मुस्कराइए”
🌹
कुछ लम्हें बहुत खूबसूरत होते
उनमें जीने के अंदाज निराले होते
निगाहों में हजारों हसीन सपने तैरते
आस्थाओं के “कमल” चाहे उनमें कुछ ही खिलते
मुस्कान मुखरित गुल हो
चमन को गुलिस्तां बना देते
जरा धड़कते दिल से सोचिये
बेवजह भी कभी
सिर्फ
“मुस्कराइये”
🌹

माना हर चुभन से दिल घबराता
जब कभी
जहां की चट्टानों से टकराता
“प्यार” की ख्वाईस रखने वाला क
नाजुक दिल
अपनी ही उदासियों में बिखर जाता
यकीन मानिये
एक मुस्कान से उभर भी जाता
जरा अपने दिल की सुनिये
मुस्कराने की आदत पैदा कीजिये
सदा मुस्कराइये
सिर्फ
“मुस्कराइये”
रचियता✍ कमल भंसाली

👿रिश्ते👿कमल भंसाली

जिन रिश्तों में दिल नहीं दिमाग नजर आये
उनमें अपनेपन की छावं कम ही नजर आये
अति पास होकर भी दूर की आवाज बन जाये
रिश्तों का ये स्वरुप देखकर मन घबरा जाये

माना स्वयं स्वार्थ में रचा बंधा है जग सारा
पर प्यार के सैलाब में ही बहता जग सारा
टूट जाता जब दिल तो कोई अपना नहीं लगता
रिश्तों की दुनिया मे आदमी अकेला सब सहता

कुछ रिश्तों की अपनी ही होती मजबूरिया
नजदीक के होकर भी उनकी अपनी दूरियां
दस्तूर निभाता जीवन ये सब कुछ सह लेता
पर अपनों के दिये दर्द से कभी उभर न पाता

नये युग का एक ही फलसफा है मेरे भैया
इस युग में प्यार से बड़ा है ठनठनाता रुपया
बुद्धि और भाग्य से जिसने भी इसे जब पाया
वो रिश्तों के प्रति संकुचित होते नजर आया

पर कुछ भी कह लो रिश्तों का पेड़ अब भी हरा
शरीर जब जबाब दे तब रिश्तों से मिलता सहारा
सम्बन्ध होते बुनियादी हर अस्तित्व के ये प्रहरी
रिश्तों बिना संभव नहीं होती है दस्तूरी दुनियादारी

“फूल से भी नाजुक से होते रिश्ते
व्यवहार की खाद से पोषित होते
अपनेपन के जल से सींचे जाते
त्यागी धूप से सदा फूल बन खिलते
“महक है जीवन की” हम, कहते हर “रिश्ते”

रचियता✍💝कमल भंसाली

💙 क्षमा 💚 कमल भंसाली

” क्षमा” को सरल व शांत जीवन के लिए सारगर्भित शब्द ही नहीं अपितु जीवन को सही निर्देश प्रदाता समझना सही होगा। इंसान कितनी ही ऊंचाइयों तक का सफर कर ले, उसकी जीवन अवधि तो सीमित ही रहती है। गलतियां दैनिक जीवन के व्यवहारों मे होने वाली एक सहज प्रक्रिया है, उन गलतियों को सुधारने में क्षमा के योगदान को हम पूर्ण रुप से नकार नहीं सकते। जैन धर्म व जैन शास्त्रों ने क्षमा को सिर्फ ह्रदय से जोड़ा ही नहीं अपितु आत्मशुद्धि का एक बेजोड़ साधन बताया है। इसके पीछे इसकी सात्विकता की सुंदरता को जानना जरूरी है। “समत्सवरी” के पावन अवसर का हर कोई सही उपयोग अगर करने की चाह रखता है तो “क्षमा याचना दिवस” कभी नहीं भूलना चाहिए। सभी व्यवहारिक सम्बन्धों के साथ हर रिश्तें को भी क्षमा द्वारा मधुरता प्रदान करनी चाहिए। क्षमा को कभी कायरता नहीं समझनी चाहिए, सच में तो ये तो वीरो का आभूषण है। आप सभी से मेरी भी क्षमा याचना मन, वचन और कर्म से किसी भी रुप मे अगर आप मुझसे आहत हुए । आशा है, आप “क्षमा” पर रचित इस मुक्क्तक रुप मे कविता का महत्व समझेंगे।
“क्षमा याचना” सहित
प्रस्तुति✍💖 कमल भंसाली 💟
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क्षमा सिर्फ जीवन का सार ही नहीं उसका यह आधार
लेने वाले का देने वाले पर कर्मो का दिया है अधिकार
क्षमा से ही तय होता जीवन का सहज सरल सा प्रकार
सच है यही तय करता जीवन का हर गंभीर आकार
💕
युग परिवर्तन से जीवन बहुत सी नकारत्मकता ले लेता
अहिंसा की चाहत पर हिंसा का बोलबाला बढ़ जाता
संयम का वजन बढ़ जाने से व्यवहार मधुरता खो देता
क्षमा की भावना फिर से जीवन को स्नेहभूत कर देता
💞
“क्षमा” का संदेश हर धर्म के गुरुओं की ज्ञानित भाषा
काम, क्रोध, मोह और लालच है हिंसा की परिभाषा
सहज जीवन जीना है तो न करे कभी कोई भी हिंसा
गलती हुई तो क्षमा मांगने व देने की रहे सदाअभिलाषा
💔
क्षमा स्वर्णिम सवेरा, दूर करता शत्रुता गहनतम अंधेरा
शंकित मन को करता निडर, ये है मित्रता की प्रेम डगर
इंसान कुछ भी हुआ भूल जाता अमृत का भंडार गहरा
सहनशीलता जीव का आधार क्षमा उसका एक प्रकार
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क्षमित हो न रखे कुछ भी वैमनस्य आत्मा के भीतर
क्षमा तहे दिल से जो करे देवत्व रहता है उसके अंदर
क्षमा जीवन आकाश का चंद्रमा शीतलता है बेशुमार
“क्षमा वीरस्य भूषणम”न समझे इसे कायरता का श्रृंगार
💘
रचियता: कमल भंसाली