🌷जीवन पथ मुक्तक🌷कमल भंसाली

मधुरता कितनी भी अपना लो
पर कभी कड़वापन रंग जमा जाता
रोशनी कितनी भी चांद भेज दे
पर अंधेरे कहीं न के कहीं रह जाता
ये जीवन है, कभी तो पथ भूल जाता
🌻🌻🌻
क्रोध अग्नि से भी तेज रफ्तार रखता
काया और आत्मा को जर्जर कर जाता
स्वयं की निराशा को जग जाहिर कर जाता
अच्छे अच्छे चेहरों की बदगुमां झलक दे जाता
🌺🌺🌺
लोभ और लालच से छुटकारा सहज नहीं होता
कुछ पाने की ललक से दिमाग में ठहर ही जाता
अंदर की दीवारों में सीलन का अनुभव बढ़ा जाता
तपस्वी में भी आत्मिक तृप्ति का “लालच” रह जाता
🌹🌹🌹
आचार और विचार दोनों कभी नहीं थकते
साँसों के अंतराल में ही क्षण का विश्राम करते
निरंतरता के ये दो सखा जब कभी जुदा होते
जीवन राह के कई अच्छे पड़ाव मायूस हो जाते
🏵️🏵️🏵️
सौरभ और गौरव सभी को अच्छे लगते
पर हर किसी को हर कहीं ये नहीं मिलते
भाग्य को कर्म की कर्मठता का संदेश देते
उनकी राह के हमसफर बन ये साथ चलते
🌾🌾🌾
प्रखरता और मुखरता होते जीवन के उद्देध्य
अनुशासन के दीवाने ये कर्म को ही देते आश्रय
जिने चाह है मंजिलों की वो हो जाये परिश्रमय
कुछ कम ही हासिल करे पर रहते तोआनन्दमय
🌷🌷🌷
रचियता✍️कमल भंसाली

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🌴कर्मफल🌴कमल भंसाली

टूटे हुए दिल को समझाया
जब बुरे वक्त का हो साया
कोई किसी के काम न आया
बदल जाता अपनों का सरमाया

गैरों की क्या बात करना
अपनों को क्या दोष देना
हर रिश्ता का यही कहना
हर गम स्वयं का अपना

वक्त की धूप से न घबराना
छांव की तरफ ही पैर बढ़ाना
आये अगर परिश्रम से पसीना
तो संयम के रुमाल से पौंछना

न ही रुकना न ही झुकना
स्थिर हो चलते ही जाना
याद इतना ही सिर्फ रखना
मंजिल का न हो कोई बहाना

माना सपने सुहाने होते
पर भरमाने वाले होते
जिनमे कई रंग ही होते
वो कभी सच्चे नहीं होते

करना अपनी जिंदगी पर विश्वास
समझो तो कहती हमारी हर सांस
आत्म-विश्वास से करते रहे प्रयास
अद्भुत जीवन का यही है सारांश

कल की कलकल में न बहना
आज की लय में ही सीधा तैरना
सब खोया आज में ही है समाया
“कर्मफल” का पेड़ अगर सही उगाया
रचियता✍️ कमल भंसाली

💘फिक्र👀 जीवन चिंतन मुक्तक कविता✍️कमल भंसाली

बची जिंदगी की क्या फिक्र
बीत गई अब उसका क्या जिक्र
कमजोर सांसों के धागे में बंधा
अद्भुत जीवन का चलता चक्र
🕴🚶🏃️
चमड़ी की काया में
क्या क्या नहीं समाया
हसरतों ने कितना कहर ढाया
रुकती साँसों ने ही समझाया
💆💇🚶
जिस जिस्म पर इतराया
अपना नहीं, था पराया
जितना भाड़ा चुकाया
उतना ही उसमें रह पाया
👨‍❤️‍💋‍👨💏👩‍❤️‍💋‍👩
जरा यह समझ लेता इंसान
कुछ उधार के क्षणों का वो मेहमान
समय सीमा का ख्याल रखता
हर मेहरवां, हर मेजबान
कुछ भी तुम उसे कह लो
मै तो यही कहता,यही विधि का विधान
👯👯👯🕴️
अब भी सच नितझर बहता कहता
कर्म के सिवाय कुछ नहीं रहता
जिनको हम अपना कहते
वो जग की अंतिम सीमा तक साथ रहते
💃💃💃💃
जिस्म पर न गौर करे
किसी को दुःख न हो
उसी धर्म का पालन करे
जीवन की सार्थकता का सम्मान करें
🕺🕺👯👯
इसे पैगाम नहीं कहना
सफर है जीवन, मंजिल है मरना
ये सोच है, तो सही है हमारा चलना
सच है, अपनी नश्वरता को समझना
🙏🙏🙏🙏🙏
रचियता✍️कमल भंसाली

💖योंही मेरे साथ चल💖 कमल भंसाली

15 फरवरी 1976 को जीवन का नया सफर शायर के साथ शुरु हुआ और नये नये आयामों से गुजर कर आज यही अहसास दे रहा कि सच्चा प्यार जीवन की वो अनमोल धरोहर व दौलत है, जिसे सच के साथ सदा संभाल कर रखा जा सकता है। शायर के सच्चे प्यार बिना सही जीवन की कल्पना बेमानी लगती। ये कविता उसको और उसके सच्चे प्यार को मेरी तरफ से दिल की कलम से लिखा “उपहार”। हालांकि सच्चा प्यार किसी भी अभिव्यक्ति का मोहताज नहीं होता फिर भी प्यार बिन इजहार कैसे खुश रहे “मेरे यार “।

मितवा रे
तूं मधुर चांदनी
तो मेरे तेरे नभ का चांद
यह तेरा मेरा प्यार
रहे सदा बन ‘बहार’
💓💓💓💓
तेरा मेरा साथ
युगो युगो की याद
मैं तेरा जीवन साथी
तूं ही मेरी ‘फरियाद’
यह तेरा मेरा प्यार
💝💝💝💖
हाथ में तेरा हाथ
नयनों में सपनों का साथ
जीने से ज्यादा
तेरे प्यार की चाह
ये ही है हमारी कसमें
यही है ‘वादा’
यह तेरा मेरा प्यार
❤️❤️❤️❤️
कल चमन में
और भी
प्यार के फूल खिलेंगे
हम भी
उसी सूरज की किरणों
संग खिलेंगे
जग में मर कर भी
‘जिंदा’ रहेंगे
यह है तेरा प्यार
🌷🌷🌷🌷
✍️कमल भंसाली

🌺सरस्वती वंदना🌺 कमल भंसाली

वन्दना माँ वंदना
असत्य जीवन को दो मुक्ति का दान
वीणा वादिनी मां लो मेरा सज्ञान
हंसवाहिनी उर आनन्द का दो वरदान
वंदना मां वंदना
🌺🌺🌺
दिल में अगर है सच्ची भक्ति
मां बढ़ा दो जग में भारत की शक्ति
हर जीवन में ज्ञान की भक्ति
बढ़ती रहे सही आस्थाओं की आशक्ति
जीवन न हो चाहे महान
इंसानियत का रहे ज्ञान
मां तुम हो महान
वंदना मा वंदना
🌺🌺🌺
बसंत का आगमन
सुन्दरता का सही मूल्यांकन
पवित्रता का सही आंकलन
जीवन मूल्यों का पूर्ण संचालन
उल्लासित अनुशासित हो आत्मा
ये ही दे दो जरा सा विज्ञान
सकल सफल हो हर प्रार्थना
वंदना मां वंदना
🌺🌺🌺
अज्ञानता के अंधेरो के
श्वेत साधारण आराधना के फूल
करना जरा स्वीकार
बढ़ा दो जीवन का आकार
कर दो दूर हर मन का विकार
मानव मन बन जाये निर्मल नीर
जीवन में रहे सदा मंगलमय भोर
बहे स्वस्थ, सम्पन्न पवन जो न कभी हो अधीर
ऐसे जीवन की ही रहे सदा भावना
मंगल रहे सब की हर कामना
वंदना मा वंदना
🌺🌺🌺
✍️ कमल भंसाली

🕊️जीवन आधार🕊️ ✍️कमल भंसाली

गम नहीं अपनी हार का
मकसद फिर तैयार करूंगा
जिसमें जश्न होगा जीत का
नवनीत नव निर्माण का
🌾🌾
नहीं रुकूंगा उन राहों में
जिसमे तमस के फूल खिलते
कदम उन शूलों पर ही रखूंगा
जो मंजिलों तक चुभते
🌻🌻
कल की कलकल का न हो स्वर
न कोई हो उदासी की धीमी लहर
अपने पराये की धूप न लाये कहर
हर दिन को बनाऊंगा और बेहतर
🌺🌺
दोस्ती दुश्मनी में न बीते कोई प्रहर
पल पल में रहे सिर्फ अपनी खबर
चल अब होकर जरा बेखबर बेकरार
मंजिलो को ही रहे सिर्फ अब इंतजार
🥀🥀
कैसी हार कैसी जीत
नादानी के ये सब गीत
दोनों ही मेरे मन के मीत
यही है मधुर जीवन संगीत
🌹🌹
पश्चताप नहीं अपनी हार का
दीवाना हूं बहती हुई बयार का
तूफानों से नहीं डूबती किश्ती
ख्याल रखता अपनी पतवार का
🍂🍂
ज्ञानोदय की भोर से जब भी चमकेगा भास्कर
उसकी रश्मि से संचारित हो जिस्म का चमत्कार
आत्मिक शुद्धि की सारी कल्पनाओं में न हो विकार
हर पीयूष भावनाओं को ऐसे ही मीले जीवन आधार
🍀🕊️रचियता ✍ कमल भंसाली️

👨‍👩‍👧‍👧रिश्तों का बाजार ✍️कमल भंसाली

“रिश्तो” के बाजार मे
दुनिया के “व्यवहार” मे
तलाश है अपने प्यार के अस्तित्व की
जीवन में उनके होने के महत्व की

माना, इस बाजार की महिमा निराली
अनोखी होती इसकी कार्य प्रणाली
यहां सब कुछ बिकता
पर सही कुछ भी नहीं दीखता
जो दीखता वो तो एकदम
“सस्ता” भी नहीं मिलता
जो नहीं पसंद किसी को आता
वो दुकान की धरोहर बन
” पुरानी पहचान ” कहलाता

ऊपरी मान समान अनोखे उत्पादन
ऊंची दुकान फीके पकवान
चलती मुद्रा है ‘झूठी शान’
ठग कर भी लोग नहीं होते यहां परेशान
‘रिश्ते’ ही होते आखिर धरती के भगवान

देखो देखो कितने है यहां महान
गले मिलने से लगता
हो जायेगे अभी हम पर कुर्बान
मानों सब लुटा देंगे ये मेहरबान
शब्दों में होगा प्रेम का इजहार
समय पर नहीं होते दर्शन यार
हां, कुछ ऐसा ही होता
रिश्तों का लुभावना प्यार

खास जरूरत न होगी
जब किसी रिश्ते कि
तो बदल जायेगा इनका व्यवहार
तुम इसे कुछ भी कहलो
दुकानदर तो होता ही ईमानदार
फिर भी
मै तो इतना ही कहूंगा
“रिश्ते ” निभानी की “जिम्मेदारी”
इस दुनिया के बाजार में
सही होती सिर्फ
खरीददार की “समझदारी”
रचयिता ✍️” कमल ” भंसाली