💙किताबे बेवफाई की💙 कमल भंसाली

शीर्षक: किताबे बेवफाई की

घायल हुआ, जिसके अंदाज से
बदनाम हुआ, प्यार, उसी राज से

जब तक समझता, लूट चुका था
प्यार, प्यार नहीं, एक इतफाक था

चेहरे की मोहब्बत में, गलत हो जाता
दिल क्या कहता, वो लाचार हो जाता

प्यार की गलियां, जज्बातों से खेलती
निगाहों में उनके, सूरते कई झलकती

वफ़ा, अब कोई, सवाल का उत्तर न दे पाती
किताबे बेवफाई की ही, अब पसंद की जाती
✍️ कमल भंसाली

🎅दोस्तों कहाँ हो ? 🎅कमल भंसाली

शीर्षक: दोस्तों, कहाँ हो ?

दोस्तो,  कहाँ हो ?, जिंदगी वहीं , तुम जहाँ हो
बदलते परिवेश में, सिर्फ आस्थाओं की राह हो

कल की चाहत में, साथ तुम्हारा ही चाहिए
रिश्तों की माला के बीच, एक मोती चाहिए

सम्पर्क सूत्र के युग की, तुम सीढ़िया बन गए
सफलता के रण-स्थल में, तुम सारथी बन गए

आवाज दूँ, तो तुम विश्वास बन उभर आते
संकटमोचन हुनमान के, सदृश्य नजर आते

युग बदले, दोस्त न बदले, तो कोई गिला नहीं
“कमल” ये सिर्फ सोच है, कोई सिलसिला नहीं
✍️ कमल भंसाली

👉शहर बेवफाई 👈का कमल भंसाली

शहर बेवफाई का, प्यार की आशा न करना
चाहतों का मारा , सिर्फ हसरतों की बात करना
नशा है यहाँ दौलत, जैसे चाहे उसे हासिल करना
सही होता, वफ़ा की राह पर, बेवफा कहलाना

हाँ, यह सही फ़लसफ़ा है, अगर जीना चाहत है
शहर की रोशनी में, अब कहीं न कोई राहत है
कभी गिर गये, तो उठना, बहुत बड़ी आफत है
नजर अंदाज कर चलना, यहॉं सबकी आदत है

न सोचना, कुछ न करने से, यहाँ गुनहगार नहीं
मकसदों का शहर, बिना चले, ठहरना सही नहीं
सही बात यह है, यहाँ अपनों में कोई अपना नहीं
हो नहीं सकता, तुम्हारे  दिल में कोई सपना नहीं

इस शहर में आये हो, तो दस्तूर सभी निभाने होंगे
साधुता के पहनावे में, सभी गलत काम छिपाने होंगे
चेहरे की मुस्कान में, छलावे के अंदाज न दर्शाने होंगे
राही शहर के, तुम्हें,आत्मा के दरवाजे बंद रखने होंगे
✍️ कमल भंसाली

💔तुम्हारी राह देखते है 💔कमल भंसाली

शीर्षक: तुम्हारी राह देखते है

तुम्हारी राह देखते है, नजरों को भी समझाते हैं
चाहतों के इस दौर में, हर आहट पर मुस्कराते है

तुम्हारा आना, मौसम का मिजाज बताता
बहारों में, खुशबुओं के मिलन का राज बताता

कुछ, इस तरह तुम भी आलिंगन में समा जाना
इतंजार भी खूबसूरत होता, जान ले ये जमाना

फूल मुस्कराते गुलशन में, चाँद चमकता नभ में
यार हो अगर बाहों में, क्या कमी है, तब जीने में
✍️ कमल भंसाली

💫राम-रत्न धन 💫कमल भंसाली

शीर्षक: राम-रत्न धन

कहीं धूप खिलेगी, कहीं छाँव मिलेगी
कभी प्रकाश होगा, कभी रात मिलेगी

मनवा रे, तेरी जिंदगी में ये सब बात होगी
हाँ, तेरी इन सब से, हर रोज मुलाकात होगी

तू है प्राणी जग का, सब कुछ तो सहना होगा
सफर जिंदगी का तयः करना, तो चलना होगा

हर की अपनी दास्तां, क्योंकि दुनिया से वास्ता
तेरी हस्ती कोई विशेष नहीं, जो दूसरों पर हंसता

ख्बाब देख पर, पर उनको दावेदारी का ख़ौफ़ न देना
सत्य है, सब कुछ यहीं रहना, चाहे चांदी हो या सोना

मृदुलमय हो समझना क्यों होती धूप ? क्यों छाया ?
समझ मे आ जाये, समझ,”राम-रत्न” धन तूने पाया
✍️ कमल भंसाली

🎎पिता का दर्द🎃 कमल भंसाली

शीर्षक : पिता का दर्द

किस ख्याल को,  अपना कहता
हर ख्याल में, सपना, तुम्हारा रहता

बेहतर से बेहतर हो, हर कल तुम्हारा
इसी में खोया रहता, ये पिता तुम्हारा

कल तुम क्या होंगे, ये, ये कह नहीं सकता ?
हाँ, तुम्हारी जीत पर, पिता हो, गर्व कर सकता

पिता के सराहने से, संतान आगे नहीं बढ़ती
हर सफलता पर,  पिता की छाती चौड़ी होती

ख्याल इतना ही रखना, इंसान बन रहना
ये जन्म तुम्हारा है, इसे सदा सँजोये रखना

चाह मेरी इतनी ही, स्नेह सब से बनाये रखना
गुलशन है परिवार हमारा , फूल बन सदा खिलना

भूल हुई कोई तुम्हें बड़ा करने में, माफ कर देना
कोई ऐसी भूल, तुम अपनी संतान के लिए न करना

आज कुछ भी नहीं पास में, चंद साँसों के सिवाय
उत्तर नहीं, कभी पूछोगे, क्या किया पालने के सिवाय
                         *****
अंत में पिता के पास, आशीर्वाद के वचन दिल में रहते
संतान समझे या न समझे, “दौलत” इसी को तो कहते

✍️कमल भंसाली