💙नील गगन तले 💙कमल भंसाली

शीर्षक: नील गगन तले

तुम न साथ आये, तो हम कहाँ जाएँगे
कारवाँ जिंदगी, एक दिन बिछड़ जाएँगे

सफर साथ करते, बहुत कुछ हासिल करते
मंजिले मोहताज न होती , प्रयास साथ करते

सोच हमारी, साथ रहकर भी बिखरे से रहते
सिर्फ पहलूँ में बैठ जाने से, दिल नहीं मिलते

हमसफ़र, तन के बनकर, कितनी दूर जाएँगे
सपनें देख कर, क्या हम योहिं सोये से रहेंगे

हक़ीक़क्त तो यही समझायेगी, साथ ही चले
तुम और हम, बने दो सितारे, नील गगन तले
✍️ कमल भंसाली

🎃सपने🎃 कमल भंसाली

शीर्षक: सपने
सपने बड़े प्यार होते है
उनमें से कुछ सितारे होते है
सपने हर रोज देखना
उन्हीं में, मंजिलों के किनारे होते है

हक़ीक़क्त से दूर न हो जाना
बिगड़े सपनों के साथ न जाना
गुलाम न हो जाओ, ख्याल रखना
साकार न हो तो भी, सदा मुस्कराना

मायूस करे जो सपने, दुःखी न होना
ऐसे सपनों को भूल से, अपना न कहना
हुनर तुम्हारा पास है, नये रंग उन्हें देना
चाँदनी रात में, उन्हें नये ढंग से सजाना

नव-कर्म से बिता हर दिन, नये सपने लाता
सपनों का भी बाजार, अच्छा मंहगा होता
गलत सपनों के आने से, मन बैचेन हो जाता
न आये ऐसे सपने तो, हर सपना सच हो जाता
✍️ कमल भंसाली

🎎तुम और मैँ 🏃कमल भन्साली

शीर्षक: तुम और मैँ

दरमियाँ, तुम्हारे और मेरे जो कुछ होता
जिंदगी को, उसी से आगे बढ़ने को होता

करने को वक्त, बहुत कुछ हमारे लिए करता
हम ही जिम्मेदार, बीच कोई समझौता न होता

कल्  तुम कुछ और रुप में जिंदगी को समझोगे
ठहर गया मैं कहीं, शायद तुम वहाँ न रुक पॉओगे

हाँ, हम तुम दो पुतले है, रंगमंच के दोनों दावेदार
गम और खुशी के, दोनों को निभाने वाले अदाकार

अभिनय में कौन कितना होशियार, न कभी कहना
जग एक रंगमंच है, किसी को तो खलनायक बनना

मेहरबां होता जब दर्शक, ताली बजा स्वागत करता
चूक अगर नायक से हुई, तो उसे भी, वो  न बख्शता
✍️ कमल भंसाली

💙किताबे बेवफाई की💙 कमल भंसाली

शीर्षक: किताबे बेवफाई की

घायल हुआ, जिसके अंदाज से
बदनाम हुआ, प्यार, उसी राज से

जब तक समझता, लूट चुका था
प्यार, प्यार नहीं, एक इतफाक था

चेहरे की मोहब्बत में, गलत हो जाता
दिल क्या कहता, वो लाचार हो जाता

प्यार की गलियां, जज्बातों से खेलती
निगाहों में उनके, सूरते कई झलकती

वफ़ा, अब कोई, सवाल का उत्तर न दे पाती
किताबे बेवफाई की ही, अब पसंद की जाती
✍️ कमल भंसाली

🎅दोस्तों कहाँ हो ? 🎅कमल भंसाली

शीर्षक: दोस्तों, कहाँ हो ?

दोस्तो,  कहाँ हो ?, जिंदगी वहीं , तुम जहाँ हो
बदलते परिवेश में, सिर्फ आस्थाओं की राह हो

कल की चाहत में, साथ तुम्हारा ही चाहिए
रिश्तों की माला के बीच, एक मोती चाहिए

सम्पर्क सूत्र के युग की, तुम सीढ़िया बन गए
सफलता के रण-स्थल में, तुम सारथी बन गए

आवाज दूँ, तो तुम विश्वास बन उभर आते
संकटमोचन हुनमान के, सदृश्य नजर आते

युग बदले, दोस्त न बदले, तो कोई गिला नहीं
“कमल” ये सिर्फ सोच है, कोई सिलसिला नहीं
✍️ कमल भंसाली

👉शहर बेवफाई 👈का कमल भंसाली

शहर बेवफाई का, प्यार की आशा न करना
चाहतों का मारा , सिर्फ हसरतों की बात करना
नशा है यहाँ दौलत, जैसे चाहे उसे हासिल करना
सही होता, वफ़ा की राह पर, बेवफा कहलाना

हाँ, यह सही फ़लसफ़ा है, अगर जीना चाहत है
शहर की रोशनी में, अब कहीं न कोई राहत है
कभी गिर गये, तो उठना, बहुत बड़ी आफत है
नजर अंदाज कर चलना, यहॉं सबकी आदत है

न सोचना, कुछ न करने से, यहाँ गुनहगार नहीं
मकसदों का शहर, बिना चले, ठहरना सही नहीं
सही बात यह है, यहाँ अपनों में कोई अपना नहीं
हो नहीं सकता, तुम्हारे  दिल में कोई सपना नहीं

इस शहर में आये हो, तो दस्तूर सभी निभाने होंगे
साधुता के पहनावे में, सभी गलत काम छिपाने होंगे
चेहरे की मुस्कान में, छलावे के अंदाज न दर्शाने होंगे
राही शहर के, तुम्हें,आत्मा के दरवाजे बंद रखने होंगे
✍️ कमल भंसाली

💔तुम्हारी राह देखते है 💔कमल भंसाली

शीर्षक: तुम्हारी राह देखते है

तुम्हारी राह देखते है, नजरों को भी समझाते हैं
चाहतों के इस दौर में, हर आहट पर मुस्कराते है

तुम्हारा आना, मौसम का मिजाज बताता
बहारों में, खुशबुओं के मिलन का राज बताता

कुछ, इस तरह तुम भी आलिंगन में समा जाना
इतंजार भी खूबसूरत होता, जान ले ये जमाना

फूल मुस्कराते गुलशन में, चाँद चमकता नभ में
यार हो अगर बाहों में, क्या कमी है, तब जीने में
✍️ कमल भंसाली

💫राम-रत्न धन 💫कमल भंसाली

शीर्षक: राम-रत्न धन

कहीं धूप खिलेगी, कहीं छाँव मिलेगी
कभी प्रकाश होगा, कभी रात मिलेगी

मनवा रे, तेरी जिंदगी में ये सब बात होगी
हाँ, तेरी इन सब से, हर रोज मुलाकात होगी

तू है प्राणी जग का, सब कुछ तो सहना होगा
सफर जिंदगी का तयः करना, तो चलना होगा

हर की अपनी दास्तां, क्योंकि दुनिया से वास्ता
तेरी हस्ती कोई विशेष नहीं, जो दूसरों पर हंसता

ख्बाब देख पर, पर उनको दावेदारी का ख़ौफ़ न देना
सत्य है, सब कुछ यहीं रहना, चाहे चांदी हो या सोना

मृदुलमय हो समझना क्यों होती धूप ? क्यों छाया ?
समझ मे आ जाये, समझ,”राम-रत्न” धन तूने पाया
✍️ कमल भंसाली