आओ, कर नमन विदाई दे, भाई
वर्तमान साल से हो रही, जुदाई
जाना आना प्रकृति का आधार
विगत ही देता सुख का उपहार
आओ…

जानेवाले को करते सत सत प्रणाम
आने वाले का भी करते  अभिवादन
जीवन का यही है सर्व सच्चा बन्धन
इस बन्धन को करे सहस्त्रों सलाम
आओ….

नया साल सबका हो अति शुभकारी
अनुभव और ज्ञान से बने उपकारी
मानव का मानव से, हो कल्याण
जीवन से किसी का न हो पलायन
आओ…

देखो, सर्द ऋतु लवलीन हो मुस्करा रही
फूलों से, वादियों को भी दुल्हन बना रही
नये साल का भास्कर भी होगा, अति प्रखर
उल्लसित हो मन पायेगा सफलता का शिखर
आओ…

हर साल है अनूठा  न सच्चा न ही झूठा
वक्त का करिश्मा  कितना तीखा मीठा
सत्यता की धुरी पर ही घूमता, हर वर्ष
कभी गम कभी खुशी, स्वीकृत हों सहर्ष
आओ…

अनुभव विरासत की देकर कर वर्ष करे विहार
जगत जननी जन्मभूमि को कर के नमस्कार
आने वाले का जाना तय, यही है जीवन का सफर
नव में रहे, पर भव में बने रहे देवत्व सा व्यवहार
आओ…..

 

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