🚶न रुको🏃कमल भंसाली

माना कोई भी मंजिल पास नहीं होती
उस ओर कि राहे भी आसान नहीं होती
अगर चलने वाले के पास हिम्मत होती
तो अफसोस कि कोई वजह नहीं होती

जो चलकर कभी रुकते नहीं
वो हर राह की निरन्तता को समझते
जो कभी थककर कहीं ठहरते नही
वो ही मंजिल की नजाकत को पहचानते

जो चलते ठोकर उन्हीं को ही लगती
संभलने की कीमत भी कम नहीं होती
आसान नहीं है जीवन की पगडंडिया
तय है उनकी हार भी कभी नहीं होती

इस “कमल’का इतना ही है कहना
मंजिल का राही अद्भ्य साहस रखना
राहों की मृचिकाओं में न कभी खो जाना
निरुत्साह से हर रुकावट पर खेद न जताना

सन्तुलन अपना बनाये जो है रखते
वो संयम अपने दिल मे संजोये रखते
आस- निराश की धूप छांव में चलते रहते
बढ़ते कदम लोभ- लालच में नहीं लड़खड़ाते

आज भी उसका ही होता जो चलते
कल उनका ही आता जो कभी न थकते
मंजिल भी उन्हीं का आदर सत्कार करती
जो अविराम कांटों भरे रास्तो से गुजरते

दोस्तो,मंजिले वो ही हासिल कर सकते
जो गिर कर बिन अफसोस उठ सकते
और, गिरने की वजह के चिंतन्हार हो सकते
फिर, प्रयास तप से जो कर्म उपासना कर सकते
रचियता✍️ कमल भंसाली

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