🙏मुक्ति पथ🙏कमल भंसाली

मुक्त हो जाऊंगा जिस दिन शरीर दर्शना से
एक प्रेम गीत लहरों को अर्पित कर जाऊंगा
न लौटूंगा फिर कभी किसी जीवेश चेतना से
जन्म के सब गिले शिकवो का अंत कर जाऊंगा
🙏🙏🙏
तुम याद न करना मेरे किसी अस्तित्व को
न ही कभी महसूस करना मेरी भावना को
हर रिश्ते के बंधन से आजाद हो जाऊंगा
🙏🙏🙏
कभी रहा था तुम्हारी आंखों में तस्वीर बन के
धुंधला देना हर रंग की धुंधली चित्रकारी को
स्याह हुई हर द्रष्टव्य स्मृति को मिटा जाऊंगा
🙏🙏🙏
जमी हो कोई धूल किसी स्मृति के दर्पण पर
अपने आंसू की एक निःशेष बूंद मुझे दान देना
पड़ी कालिमा तुम्हारे दिल पर साफ कर जाऊंगा
🙏🙏🙏
विषाद के अवशेषों का हर क्षण शेषांस कर जाऊंगा
जीने की हर नकारत्मकता को सत्यता से नहाऊंगा
उसी सत्य के अस्तित्व में स्वयं को विलीन कर जाऊंगा
🙏🙏🙏
अंत नहीं होगा मेरा सिर्फ अंतर्मन जुदा होगा
कर्म की चौपाल में न्याय का दीप जलाऊंगा
चेतना मय मुक्ति की ईश से गुहार लगाऊंगा
🙏🙌🙏
रचियता✍️ कमल भंसाली

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