“सम्बन्धों” मुक्तक आज के संदर्भ में

दोस्तों,
मुक्तक के रुप आज के बनते -बिगड़ते सम्बन्धों को समझने की एक मेरी अनचाही कोशिश है। नहीं चाहता सांसारिक सम्बन्ध जीवन की गरिमा भूल जाये। सबसे बड़ा खतरा संस्कारों को भूल नई स्वतंत्र राहों की तलाश से है। पर कहते है जो जुड़ता वो बढ़ता जो टूटता वो विलीन हो जाता। भगवान से प्रार्थना है सम्बन्धों की दुनिया सदाबहार रहे। शुभकामनाओं सहित✍ लेखक व रचियता**कमल भंसाली
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रिश्ते जो एक बार बिगड़ जाते
वापस कम ही जुड़ पाते
क्योंकि सच्चाई के जो पन्ने होते
वो नदारद हो जाते
बिन सही मलहम के हरे घाव तो
हरे ही रह जाते
लगे जख्म भी कभी सूख नहीं पाते
इसलिए
बिगड़े आपसी सम्बन्ध कभी सुधर नहीं पाते

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समझने की बात समझनी जरूरी होती
हर सम्बन्ध की अपनी कुछ मजबूरी होती
छोटी चिंगारी बन जब कोई बात बिगड़ जाती
निश्चित है, हर रिश्तों को स्वार्थ की बीमारी लग जाती
अच्छे रिश्तों की छवि दिल छोड़ दिमाग में चढ़ जाती
लाइलाज बीमारी है यह रिश्तों के प्राण तक ले जाती

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जीवन और सम्बन्ध का है आपसी गढ़ बंधन
एक दूसरे के पूरक करते समझ के अनुबन्धन
“खुद जियो और दूसरों को जीने दो” है प्रबंधन
जिससे विश्वास की सीमा का न हो कभी उल्लंघन

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अर्थ के संसार ने आज रिश्तों की परिभाषा बदल दी
हर रिश्तों की कीमत जरुरत अनुसार तय कर दी
बिन संस्कारों की जिंदगी बिन परवाह की राह चलती
“कल को किसने देखा” कहकर आज पर ही इतराती
जब तन्हा हो असहाय बन जाती, फांसी पर चढ़ जाती
जीवन में सम्बन्धों के महत्व का अदृश्य संदेश दे जाती

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न कोई माता, न कोई पिता, युग अब यही सन्देश देता
स्वयं से ही स्वयं बना रिश्तों की महिमा को ठुकरा देता
जीना खुद का अधिकार, अब खुद को यह ही भाता
हर सम्बन्ध अब दिल के अंदर की यात्रा नहीं करता
बाहरी दुआ सलाम में मधुरता से मुस्करा कर रह जाता
सतह पर जरुरत के समय तक थोड़ी देर साथ चलता
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सब मुक्तक यही कहते “सम्बन्धों” से जीवन बनता
सम्बन्ध से ही जीवन आगे की तरफ यात्रा करता
हर रिश्ता हर दिन का सहयात्री, सोये को जगाता
भावपूर्ण हो जो स्नेह,विश्वास और प्रेम से निभाता
जीवन की हर मंजिल तक हर “सम्बन्ध”अमर रहता
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💖💖 ✍ रचियता💘 कमल भंसाली 💝💝

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