क्षमता समर्थित जीवन🐴एक तथ्य🐄 नैतिकता भरा प्रेम✍कमल भंसाली

विडम्बना ही कहिये जब कुछ लोग कठिन समय में स्वयं की क्षमताओं से अनजान होकर अपने बिना चिंतन के व्यवहारों और कार्यों से परिस्थितियों को और कठिन कर लेते है। सारी दुनिया की बुराइयों के विशेषज्ञ बन, नुक्ताचीनी को अपना कर अपने समय को और कठिनता प्रदान करते रहते है। दुनिया में दो तरह के इंसान की आज बहुत कीमत आंकी जाती है, एक जो पैसे से धनवान होता है, दूसरा जिसके पास राजनैतिक और हिंसक शक्ति होती है। पर हकीकत में दोनों ही समय की मेहरवानी के मोहताज होते है। भविष्य को दृष्टिगत कर हम चिंतन करे तो एक बात साफ़ हो सकती है कि मानवीय मूल्यों से ज्यादा कीमत किसी की नहीं होती क्योंकि उनका वितरण होता है। प्रकृति को ही लीजिये, उसका महत्व हमारे जीवन में कितना है ? आंकिये, प्रकृति से कोई ज्यादा धनवान और सक्षम शायद ही इस धरा पर होगा, परन्तु उसने अपनी हर सम्पदा के वितरण पर कभी प्रतिबन्ध नहीं लगाया और कभी भी खाली नहीं हुई और शायद खाली होगी भी नहीं। पर मानव स्वभाव प्रकृति की तरह पूर्ण वितरण को स्वीकार नहीं कर सकता यह तो तय है, इसका कारण उसका स्वयं का चिंतन ही होता है और डर यही है कि कहीं ऐसा न हो उसका बिगड़ता चिंतन उसे इस धरा से अस्तित्व हिन् नहीं कर दे।

प्रकृति के बाद मानव ही सबसे सक्षम प्राणी है, परन्तु आंतरिक कमजोरी भय के रोग से ग्रस्त है, अतः हर क्षेत्र की सक्षमता का उपयोग वो एक जन्म में नहीं कर पाता। मानव की सबसे बड़ी कमजोरी है स्वार्थ भरी खुशियों की तलाश और उसकी सोच में इसको प्राप्त करने में वो शंकित और स्वार्थी हो जाता है, यह ही वो एक भूल उसे कभी सक्षम नहीं बनने देती। हकीकत में आज भी संसार को सक्षम, बुद्धिमान और नैतिक इंसानों की जरुरत है। हमारे देश में भी सही नेताओं की जरूरत सदा ही रहेगी, परन्तु अफ़सोस ही होता है आज जब आस पास नजर करते है, तो नैतिकता समर्पित सक्षमता से भरपूर कोई भी नजर नहीं आता। विडम्बना ही है, तकनीक युग में नैतिकता अपना प्रभाव नहीं जमा पा रही और उसका आकर्षण भी कम होता जा रहा है।

सवाल यही है क्या नैतिकता विरोधी कार्य कर सुख की प्राप्ति को सही माना जाय और क्या दौलत की चाह में जीवन की अनिश्चता को न समझा जाय और उसी अनुसार जीवन मूल्यांकित कर्मो को दैनिक जीवन में जगह देकर स्वयं की खुशियों के साथ दूसरों की खुशियों की कामना नहीं किया जाय ? हम यहां जिंदगी के कुछ महत्वपूर्ण मर्म स्थल की कमजोरी को जानने की कोशिश करते है, और अपने जीवन के छिपे हुए आत्मिक सुख शान्ति प्रदान जीवन को महसूस करने की कोशिश करते है। शायद अनजाने में ही इस कोशिश से हमें अपने जीवन मूल्यों की पहचान हो जाए। आज हम अपने देश की वर्तमान स्थिति पर अगर क्षण भर के लिए गौर करे तो एकबात अंदर से जरुर स्वीकार करेंगे कि पूर्ण देशभक्ति से हम बहुत दूर बैठे है। देश की व्यवस्थाओं पर हमारी नकारत्मक्ता हर समय हमारे सामने ही खड़ी रहती है। यह बात और है, अनजान बनकर जीना हमारी आदत बन चुकी है। कभी कभी नाटककार Euripides के इस इस कथन पर गौर भी करना पड़ता है कि ” Man’s most valuable trait is judicious sense of what not to believe.” । कुछ हिंसक तरह का माहौल अपराध् बनकर देश की स्वतन्त्रता को कमजोर बनाता है, तो एक प्रश्न स्वयं से ही पूछना पड़ता कि वाकई मैं अपने देश से सही प्यार करता हूं ! सवाल के जबाब में इतना ही उत्तर उभर रहा है, आजकल के माहौल को देखकर तय है, भारतीय संस्कारों में अहिंसा की खुशबू आज भी झलकती, हालांकि आपसी विश्वास डांवाडोल हो रहा है। हालांकि अस्थाई स्थितियों से देश के प्रति आस्था कभी कम नहीं हो सकती पर जन्म लेने वाली धरा पर मृत्यू तक कुछ कर्तव्य तो निभाने की सोच होनी जरुरी है। इस सत्य को कोई भी नकार नहीं सकता कि देश अगर सुरक्षित रहेगा तो हम और हमारी सन्तानें अपना तनावरहित जीवन जी सकेंगे। इस सूत्र के कथ्य पर अगर आप विश्वास नहीं कर पा रहे है, तो Jim Morrison ने व्यक्तिगत स्वतन्त्रता पर क्या कहा है, उस पर एक नजर डालना उचित ही लगता है।
” The most important kind of freedom is to be what you really are. There can’t be any large-scale revolution until there’s a personal revoulation, on an individual level.”

फ्रेंकलिन रुजलवेट के अनुसार खुशियों को कतई धन से नहीं ढूंढा जा सकता, अपितु मानव हित आत्मिक कार्यो की सफलता में और मानव उपयोगी रचनात्मक कार्य से सहजता से पाया जा सकता है। परन्तु ये बात आज के सन्दर्भ कोई अपना अस्तित्व बोध कराने में असफल ही होगी क्योंकि दुनिया में साधनों का अद्भुत साम्राज्य स्थापित हो कर अपना विस्तार कर रहा है। रिश्तों की डोर अब अपनत्व के हाथों से निकल कर स्वार्थ के हाथों में चली गई और सिर्फ जरुरत योग्य दिखावटी प्रेम का अहसास तक ही अपनत्व बोध कराना ही पसन्द करती है। बाहरी सतह पर दौलत का प्रेम न चाहते हुए भी अंदर में छिपी हमारी इच्छाएं उजगार कर देती है। हकीकत यही है शरीर जरूर साधुता की चाह रखता होगा पर मन की अस्वीकार्ता से मजबूर हो विलासिता और भोग के दलदल में अपने हर असहज अस्तित्व का समर्पण कर देता है। हर इंसान जानता है, कि जितना भी उसने हर क्षद्म से प्राप्त किया उस पर भविष्य में किसी दूसरे का शासन हो जाता है। जीवन की निर्थक्ता की बात उसे कम पचती क्योंकि ऐसी बातों को धर्म गुरुओं ने आत्मा से जकड़ दिया इसलिए दैनिक जीवन में इसका उपयोग साधनों की तरह मुश्किल से ही हो पाता है। हम अगर दौलत को हमारे जीवन में प्रभावकारी तत्व की तरह से इस्तेमाल करने की इच्छा रखते है तो सबसे पहले हमें कुछ इस तरह से धन अर्जित करने की कोशिश करनी चाहिए जिसमें नैतिकता की कुछ शक्ति हो। कितनी ही दौलत इकठ्ठी कीजिये अनैतिकता से पर तय है आप उससे कभी क्षमता का बोध नहीं कर पाएंगे क्योंकि हकीकत में वो रोग उत्पादक दवा है, जिससे हर दिन आप कुछ क्षय होनें का बोध करते रहेंगे, पर बोल नही सकेंगे क्योंकि आपकी चिंतनमय क्षमताये घट रही है। कबीरदासजी जैसे संत जब यह कहते कि
” साईं इतना दीजिये, जा में कुटुम समाय ।
मैं भी भूखा न रहूं, साधु ना भूखा जाय ।।
तो निश्चित है, कभी इंसानी चिंतन में स्वयं के साथ नैतिकता ज्यादा रहती थी आज जमाना बिल गेट्स से भी आगे का है, और हमारा चिंतन भी आज ‘कबीर’ नहीं ढूंढता। परन्तु हकीकत भी यही कहती है कि अति दौलत से बिल गेट भी घबरा गए और उन्होंने उसे सही जगह वापस भेजने को ही सही चिंतन माना। ” Success is a lousy teacher. It seducess smart people into they can’t lose”। आगे बढ़े उससे पहले यह तय करना जरुरी है क्या हम अपने देश के प्रति समर्पित है, क्या हम अपने जीवन के प्रति सही समर्पित है तो निश्चित है, जीवन की समझ हम में है। हम अपने जीवन को सही नैतिक जीवन का राही बना दे तो यकीन कीजिये जिंदगी हमारे लिए मुस्कराहटों का गुलशन लगा देगी शर्त यही है हम दूसरों के मुस्कराहटों की कीमत जाने, उनके प्रति किसी भी तरह की नकारत्मक्ता से दूर रहे। जीवन की सारी सार्थकता मुस्कानों में ही छिपी रहती है, चाहे किसी की भी क्यों न हो। अतः सदा मुसकरते रहिये…..लेखक :कमल भंसाली

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.