💘सपने अपने💘✍ कमल भंसाली

दर्द बहुत है दिल मे किस किस की बात करुं
पर जब अपनों से मिले तो दिल कहता कुछ करुं
बेबसी मेरी वो समंझे नहीं अब गिला किससे करु
भूल गये जो दिए संस्कार उनकी क्या बात करुं
🐷🐷🐷🐷
बदल गए वो जिनके लिए को जीवन किया अर्पण
अपनी सूरत न देख उनकी सूरत को समझा दर्पण
आज वही मेरे चहेते, चाहते अपने कदमों में समर्पण
जिंदगी बता क्या खता हुई जो टूट रहे सपने हरक्षण
🐪🐪🐪🐪
जिनकी अंगुली को छू प्रेम का प्रथम स्पर्श कराया
वही प्रेम आज तरस कर दिल से उनके निकल गया
खामोशी कमजोरी रही या मेरी कोई अपनी मजबूरी
दामन तो भीग गया पर जीवन की प्यास रहीअधूरी
🐆🐆🐆🐆
दिशा निर्देश से उनके हर पल को सजाता रहा
जीवन के आनेवाले अंधेरों से उन्हें बचाता रहा
शिक्षा के रंगों से उनके जीवन को रंगता ही रहा
भूल थी जिंदगी, परायेपन का कभी अहसास न रहा
🐒🐒🐒🐒
अपनेपन के रिश्तों के साये में जब बिखर जाऊंगा
शायद हर दर्द के हर रंग में एक दिन डूब जाँऊगा जिंदगी के हर सितम की गहराई से न उभर पाऊंगा
अफसोस के पत्थर का शिलालेख बन पसरजाँऊगा
🐂🐂🐂🐂
अब अहसास न कर जिंदगी किसी भी प्यार का
लगे कोई सौदा है चाहत के नाजायज व्यापार का
दस्तूरों के लिए सही नहीं फलसफा परिवार का
वर्तमान जंग है स्वयं से स्वयं के ही एतबार का
🐘🐘🐘🐘
कुछ पल का बचा जीवन कहता हो के मगन
अंत ही करता भला, शुरुआत तो है छलावा
दौड़ उम्र की, अनुभव का है सदाबहार चमन
कर्म के फूल ही जीवन की बगिया में लगवा
रिश्तों के बेगानेपन में ही सिर्फ न भटका मन
🐵🐵🐵🐵
✍रचियता : कमल भंसाली

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