👄तल्खियां💋✍ कमल भंसाली

तल्खियां तमाम उम्र यही रही
जिंदगी आहों में सिमट गई
हर अहसास के आहट तले दब कर
सिर्फ साँसों की मोहताज रह गई

माना दर्द की धूप बड़ी तेज होती
उसमें तड़पती घुटन की उमस होती
अपनत्व की छांव में भी पैर जल जाते
फिर भी मै कहता रहता जिंदगी से
“तूँ इतनी क्यों परेशां है ” ?

आज नहीं तो कल हवाओं का रुख भी बदलेगा
मौसम कभी तो शीतलता का अहसास करायेगा
कल का सबक कभी तो सही राह को अपनायेगा
दर्द के अंधेरे आशियाने में दिल तब नहीं घबराएगा

दर्पण टूट भी जाये तो भी चेहरा कुछ दिखा जाता
कोशिश करने से हार का रुख भी राह बदल लेता
मुस्कराना सीख ले दिल हालात का मन बदल जाता
जरुरी नहीं हर सफलता से जीवन संभल कर चलता

जिन्दगीं की राहों में आशाओं के गुलशन बनाये
फिर उनमें कर्म से कोशिशों के पेड़,फूल लगायें
फल, फूल कुछ भी पाये पर काटों से न घबराये
तल्खियां तमाम उम्र की सदा, उन्हें गले क्यों लगाये

फलसफा जीने का इतना ही जग के लिए अपनाओ
खुद मुस्कराओं फिर उन्हें गैरों के चेहरे पर सजाओ
गिला नहीं जिंदगी से,मंजिल सिर्फ मेरा मकसद नहीं
जो भी बचा,लगता है अब भी वो किसी से कम नहीं

रचियता: कमल भंसाली

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