😃मुस्कराहटों का गुलशन जीवन “हमारा”😃कमल भंसाली

अगर चाहत हमारी जिंदगी में खुशियों की है, तो निसन्देह हमें मुस्कराहटों की खेती करनी होगी, सवाल स्वयं ही उभरता है क्या मुस्कराहटों की भी पैदावार होती है ? उत्तर में हमें रॉबर्ट लुइस स्टीवेन्सन के उस कथन में तलाशते है, जिन्होंने बड़ी दर्दीली और मार्मिक परिस्थितयों से गुजरते हुए लिखा ” There is no duty that we so much understand as the duty of being happy”। हमारी विडम्बना है हम मुस्कराहट का मूल्यांकन सिर्फ दूसरों के चेहरे पर देखकर करते है जबकि हकीकत यह है हमारे चेहरे की जमीन भी उतनी या उनसे ज्यादा उपजाऊ है। व्यकितत्व का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञ मानते है, जीवन की निराशा को आंशिक सफलता की मुस्कराहट भी कम करती है जिससे शरीर और मन दोनों को अनावयशक तनाव की कमी महसूस हो सकती है, और उत्साह का आगमन जीवन में वापस होना शुरु हो जाता है। प्रसन्नता भरी मुस्कराहट विपरीत परिस्थितयों को अनुकूल होने में संजीवनी का काम कर सकती है।

जिंदगी का सबसे बड़ा तनाव यही है कि हम उसे स्वयं नहीं जीने की कोशिश करते अपितु दूसरों में उसके सही जीने के तरीके ढूंढते रहते है। जबकि हकीकत यही है, जिंदगी बड़ी संजीदगी से रहना चाहती, हर समय उसे मुस्कराना सही नहीं लगता पर कुछ ख़ास लम्हों में वो खुश होकर मुस्कराना जरूर चाहती, हमें इस संक्षिप्त सत्य को समझ लिया तो समझिये मुस्कराहटों की खेती करना भी हमें आ जाएगा।

जीवन क्यों दुखी होता है ? समस्याओं से, जी ‘नहीं’, जीवन हमारी अक्षमताओं से ही घबराता है, जिन्हें हम कभी अपनी सक्षमताओं से नहीं मिलाते। हमारी नैतिक और मानसिक कमजोरियों के कारण हम स्वयं से ही दुःखी होते है। अलबत्ता यह बात जरूर है, हम उसके कारणों का खासकर वो जो प्रायः नहीं होते उनका ही जिक्र करते रहते है। हमारी स्वभाविक चेतना में कई तरह की कमिया होती है, जिन्हें हम नजरअंदाज करते रहते है और यही हमारे व्यकितत्व को शायद मुस्कराने से रोकती है।

कहते है, जीवन के भविष्य को जो खुशनुमा माहौल की सैर कराते है, वो कभी भी निराश का दामन नहीं थामते। सवाल करना भी उचित हो सकता है कि हम किस तरह से जीवन को भविष्य की सैर करा सकते है ? भविष्य के सुनहरे और सक्षमता से ओतप्रोत सपने देखने वाले इंसान में यह क्षमता होती है बनिष्प्त जो अपने उद्देश्यों को हरदम सवालों के घेरे में बंधे रखते है। Marcus Aurellius के इस कथन पर हमें सदा गौर करना सही होगा ” The true worth of a man is to be measured by the objects he pursues” । हमारी सच के दामन से बन्धी मुस्कान हमें हमारे भविष्य के प्रति आशवस्त करती है।

मुस्कराना जीवन की मजबूरी नहीं है, अपितु जीवन को यह निस्फिक्री का सन्देश देती है। हमें दो बातों पर सुखी और प्रसन्न जीवन को जीने के लिए गौर करना चाहिए, एक सत्यता भरा नैतिक जीवन की चाहत दूसरा विध्वंसकारी तत्व चाहतों के दरबार की जी हजुरी से बचना यानी संयमित जीवन की ख्वाईस। विश्वास करना जायज होगा, जीवन में मुस्कराने की वजह नहीं तलाशनी होगी। अपनी किताब ‘The Magic of Thinking Big में Dr David J. Schwartz लिखते है “एक सच्ची और सही मुस्कान दुश्मनी को पिघला देती है, जिससे दैनिक जीवन में आनेवाली कई तकलीफो और कुंठाओं का सहज, सरल समाधान हो सकता है”। सही भी है, हमारी मुस्कान कठिन परिस्थितियों को निर्मल बनाने का काम करती है और हमें निराशा से बचाती है।

हर वस्तु के निर्माण में कुछ तत्वों का सहयोग सदा जरुरी होता है, सही और गुणकारी मुस्कान में दिल की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। “दिल खुश तो चेहरा भी खुश” और मुस्कराते चेहरा का आकर्षण हर कोई को सबसे अलग कर अपना प्रभाव छोड़ता है। दूसरों को सहजता का अनुभव हमारा व्यवहार और मधुरमय भाषा कराती है। भाषा और मुस्कान का चोली दामन का साथ होता है। शब्द और विचार हमारी शारीरिक भावभंगिमाओं को सहज करने में सहयोग देते है। जैसा की Vernon Howrad कहते है ” Happiness is the way you are, not the way things are”। इतने कम तत्वों से संग्रहित मुस्कान अंहिसक होकर भी अपनी सकरात्मक क्षमताओं से लबालब होती है।

इस लेख का कोई बड़ा चौड़ा दावा नहीं है कि इतना कुछ चिंतन करने के बाद हम जिंदगी में मुस्कराने की कला सीख जाएंगे क्योंकि हमारा चिंतन का तरीका ही हमारी जिंदगी जीने का मालिक है। परन्तु, विश्वास करना होगा H. D.Thoreau के इस कथन का ” The man is richest whose pleasures are the cheapest”। आइये संक्षिप्त में कुछ मुस्कान सम्बंधित जानकारीयों पर एक नजर डालते है, जिससे हमारी मुस्कानों की पैदावर सदा बढ़ती रहे।

1.मुस्कान की खेती में आत्मिक शांति एक अच्छी उर्वरक खाद का काम करती है।
2. आंतरिक प्रसन्नता उन अच्छे कार्यों से ही आ सकती है, जिनसे दूसरों के चेहरे खिलखिलाते नजर आते हो।
3. खुशियां देने वाले वातावरण का निर्माण कर हर इंसान एक मुस्कराहटों भरे गुलशन का बागवान बन सकता है।
4. उत्साह, उमंग, जोश से दिल को नित नई रागिनियों से बहलाते रहे।

5. ध्यान रहे हमें, जीवन में सच और संयम के अनुपात से ही ख़ुशी की उत्तम फसल तैयार की जा सकती है जिससे त्याग के फूल दूसरों के प्रसन्नता के देवी देवताओं पर अर्पण होते रहे, और खुशियों की न खत्म होने वाली मंगलमय पैदावर से हमारी जिंदगी सम्पन्न व स्वस्थ रहकर अपनी तय मंजिल पथ पर अविराम अग्रसर होती रहे। जीवन पथ के सजग राही बन गुनगुनाते रहे,

“खुशियां ही, खुशियां
ऐसी हो जिंदगी की डलिया
जिनमे हो मुस्कराहटों के फूल
और खिलखिल करती हजारो कलिया
महकती रहे हर जीवन की बगिया” ।
लेखक: कमल भंसाली

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

w

Connecting to %s