🙆नारी🙆 अद्धभुत कृति💇 नारी दिवस पर नारी शक्ति को समर्पित कविता✍ कमल भंसाली

>>> नारी<<<<

अद्धभुत कृति प्रकृति की
नर से ज्यादा स्वीकृति जग की
नारी के बिना जग नहीं होता
नारी बिना मानवता का विकास नहीं होता
नारी की चाहिए प्रेम की धरा
जिसमे हो स्नेह, विश्वास और सम्मान भरा
नारी अद्धभुत…..

हंसते हंसते त्याग देती प्राण , नारी का त्याग महान
इतिहास गवाह है, संकट में नारी देती अपनी पहचान
शक्ति और साहस से सब संकट झेलती
संयम से सयोंजन अपने परिवार का करती
क्षमा की देवी ही नहीं, शिवशक्ति वो कहलाती
नारी अद्धभुत…

धर्म उसकी आस्था में बसता
उसी से संसार पावन कहलाता
सदियों से नारी अत्याचर से लड़ती आई
अपने वजूद की रक्षा स्वयं करती पाई
सत सत प्रणाम नारी ऊर्जा को
उसके माँ,बहन और पत्नी होने के दर्जे को
नारी अद्धभुत….

युग बदला नारी बदली
अपनी शक्ति की पहचान बदली
शिक्षा और ज्ञान की देवी सरस्वती कहलाई
धन सम्पति की देवी लक्ष्मी बन पूजा कराई
सौन्दर्य की देवी बनकर शिव का मन हरसाईं
राधा कृष्ण की जोड़ी बन प्रेम को नये आयाम तक पहुंचाई
नारी अद्धभुत…
👪👪👪👪👪👪👪👪👪👪👪👪👪
युग बदलता रहा, संग संग नारी भी बदलती रही
पर कभी कभी ऐसा लगता नर नहीं बदलाता
न बदली उसकी मानसिकता
नहीं तो क्यों उस पर अत्याचार होता ?
नारी के मान सम्मान और इज्जत पर हमला होता ?
जब कभी वो करता नारी पर करता दूषित आचार
पता नही क्यों भूल जाता उसके पास है माँ के दिए संस्कार
बहन का दिया स्नहे और पत्नी का दिया प्यार
और सच भी तो यही है इसलिए चल रहा यह संसार
जरा बताओ इस से किसको है इंकार
नारी अद्धभुत…

****कमल भंसाली****

08/03/2018

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.