😂”अफसोस” 😯आत्महत्या😢 के चिंतन से पहले की कविता ✍कमल भंसाली

दोस्तों, जिंदगी कभी कभी विषम परिस्थितियों से गुजरते हुऐ नकारत्मक्ता के चंगुल में फंस जाती है तथा सम्बंधों और रिश्तों के ऊपरी व्यवहार के कारण तन्हा ही सारे दर्द का अनुभव संचित करती है। जब विपरीतता से निकलने में असमर्थ हो जाती है तो उसे अपने वजूद पर अफ़सोस होता है। वो इसी “अफ़सोस” की गिरफ्त में आते ही स्वयं को समाप्त करने की सोचती है। “अफ़सोस” जिंदगी की आखरी खव्वाहिस मौत के चिंतन को मजबूती प्रदान कर सकारत्मक चिंतन से पीड़ित को दूर ले जाती है। अफ़सोस से पीड़ित आदमी “आत्महत्या” को अपनी सारी समस्याओं का समाधान मान कर उसे अपना लेता है। इस कविता का उद्धेश्य सिर्फ इतना ही बताना है, कि जिंदगी बड़ी कीमत और हिम्मत वाली होती है वैसे भी हर परेशानी की उम्र भी ज्यादा नहीं होती।अतः सकारात्मक व आशावादी रहकर ही जीवन को सक्षम रखना उचित होता है। सही चिंतन यही है, परिस्थिति कितनी ही विषम हो, सम्बंधों और रिश्तों का भ्रम टूट चूका हो पर अपनी हिम्मत और सक्षमता पर भरोसा रखना ही सही और उचित है। आप सभी से अनुरोध है कि कविता के उद्देश्य पर गौर करे और अच्छी कोशिश लगे तो सन्देश के रुप में सभी अपनों से शेयर करे। शुभकामनाओं सहित***कमल भंसाली

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उपासित हुआ जीवन जब लड़खड़ाया
तो तथ्यों ने उसे कुछ इस तरह समझाया
*****
“अफसोस” न कर जिंदगी
जो मिला उसी पर सन्तोष कर
वक्त की मेहरबानियों की
कुछ तो कद्र कर
जरा अपनी काबिलयत पर भी
एक बार तो गौर कर
नाजायज उदासियों से
यों स्वयं को बर्बाद न कर
अफ़सोस…..

💔

वक्त के पन्नों पर लिखे
अपने ही अनुभवों पर एक नजर डाल
फिर बता जरा
क्या सब वक्त ने ही नाजायज किया
तेरा गिरना
खुद की नजरों से
तो नहीं था कहीं कोई कमाल
उलहाना न समझ इसे
सही समय पर
पहले अपने को संभाल
अफ़सोस……

दोस्त
हवाओं का रुख
सदा एक ओर नहीं रहता
अंदाज न बदल
विपरीतता में “सच” सामने रहता
पहले भद्दा दिखता
पर अपन्नाने से सच्ची दोस्ती निभाता
कर इसकी पहचान
मौसम
कितना ही बदले
पर ये साथ कभी न छोड़ता
जग की क्या परवाह
वो तो सदा दूसरे पर हंसता
दूसरों के
दरवाजों के शीशे में ही झांकता
अफ़सोस…

💘

मानता
अफ़सोस
जब तुम गलतियों का करती
जग से डरती
आहें भर सारी रात रोती
अपनों के
आँचल में राहत ढूंढती
न मिलनें पर
बैचनियों की शिकार हो जाती
भूल जाती
हर कोई अपनी साँसों का दीवाना
सीमितता का यही अफ़साना
अब और न घबराना
जीना ही सही रास्ता
“मौत” जहरीला फूल
इसे अपने गुलशन में न पनाह देना
अफ़सोस…..

👀

जब तेरा सब कुछ तेरा
तो बता
कैसे होगा तेरा दुःख
किसी का मेरा
दर्द की पहचान को भूलना
अपनी तुच्छ उपलब्धियों पर
शेर की तरह दहाड़ना
और
जब शिकार खुद हो जाये
तो
स्वयं से ही घबराना
बता क्या मूल्य ?
बचा तेरा
अफ़सोस ……

👓

कर अहसास
धूप छावं में
हर दिन का निवास
सब कुछ बदलना तय
फिर क्यों करती भय
आज नहीं
तो कल होगा तेरा
इसी चिंतन में रख विश्वास गहरा
हर समय नहीं रहता
काला कलूटा अंधियारा
आशा की पो फटने दे
देखेगी तूं सफलता का सवेरा
अफ़सोस….

👚

बिखरना न
जिंदगी
हर गम छोटा ही होता
नकारत्मक्ता से
पोषित हो बड़ा हो जाता
उदासियों के फूलों सें
आँगन भर देता
समझ जरा
हर कोई अपना नहीं
पर दिल तो तेरा दीवाना
उसे कभी जुदा न करना
बेवफाई का
कोई गलत किस्सा
इस जग में छोड़ न जाना
स्वयं की
इस बदनामी को समझना
हर समस्या का
एक दूसरा खूबसूरत पहलू
“समाधान”
उस और ही अंगड़ाई लेना
प्यार से
सदा मुस्करा आगे बढ़ते जाना
अफ़सोस…

💢💢💢
✍रचियता॥ कमल भंसाली॥

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