💚प्रतिबिम्ब हसरतों का 💚मूर्ति प्यार की💘 कमल भंसाली

प्रतिबिम्ब मेरे प्यार का, जब भी तुम्हारे नैनो में तैरता
कसम तुम्हारी, दिल की कश्ती, हिचकोले लेने लगती
उठती हुई, तेरी साँसे, सरगम बन दिल पर छा जाती
मौहब्बत एक जुनून है, मदहोश जिंदगी कहती जाती

बिखर बिखर तुम्हारे जुल्फे, काले बादल बन जाती
उमड़ घुमड़ चैन मेरा, सब हवा में उड़ा कर ले जाती
जरा समझाओं ना इन्हें वो बरस अब क्यों नहीं जाते
सैलाब ही है, जिंदगी, आओं दोनों ही उसमे बह जाते

दो नैन तुम्हारे, कितने प्यारे, जैसे समुद्र के दो किनारे
मिलने को है, आतुर, पलक झप करते बेबाक से इशारे
कुछ ख्याल तेरे दिल के, ज्वार की तरह अकड़ जाते
आहत कर हसरतों को, यथार्थ के तट पर पटक जाते

तुम्हारे हसीन लबों पर, सुर्ख लाली सी छाई रहती
वो कुछ कहती नहीं, पर खामोशी से तीर छोड़ जाती
घायल कर दिल मेरा, रंगीन चाहतों के जख्म कर जाती
कलियों सी तेरी घातक अंगड़ाई, उन्हें कभी भरने नहीं देती

आईना भी शर्मा जाता, जब बदन तेरा उसके सामने आता
मेरे दिल की बात न कर, बिन धड़के ही सहम ठहर जाता
मजबूरी प्यार की, बिना कहे, तेरी बाहों में खो जाना जाता
पैमाना  हाथों में, फिर भी दिल मेरा प्यासा सा रह जाता
💝💝
प्रिय, देह सुंदरता प्रेम की पहचान नहीं होती
सच्ची हसरते ही हर तरफ से उन्हें सजाती
दिल की खूबसूरती,  हर कली को खिला देती
जिस्म की नहीं, प्यार की मूर्ति प्रतिबिम्ब होती***
रचियता💐💐 कमल भंसाली💐💐

 

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