🐳नदी का कोना🐋 कमल भंसाली

हाँ,
मै बहती नदी
का एक बदनसीब कोना
अस्तित्व तब तक रोना
दूर से देखो तो
तपता सोना
हकीकत में आलसी
निकम्मा बोना
मेरी माँ नदी सदा कहती
बेटा चलते रहना
यही हमारा कर्म
बहता पानी ही हमारा धर्म
सीख उसकी
पर अच्छी नहीं लगती
उम्र गुजर गई
मेरी माँ आज भी जब चलती
लहरो से धरती हिलती
उससे जीवन को गति मिलती
पर मेरी कहानी कुछऔर
असहाय मजबूर ठहरा रहता
सबकी गन्दगी को सहता
हां, मै..….

मेर जीवन कि धुरी
मेरी लाचारी मेरी मजबूरी
कर्म विहीन जीवन दर्शन
जब सब साथी आगे चलते
मेरे मन में आलस्य के धागे बनते
सोचता दुनिया पागल
चलने से कोई मंजिल मिलती
बस यही मेरी गलती
न समझा, चलना ही जिंदगी है
रुकने से मेरे जेसी
हालत होती
इसे को सच समझना
बन्धुओं मेरे
आप चलते ही रहना
चलना ही जिंदा रहना
कर्मित जीवन ही है जीना
नहीं तो
फिर मेरी तरह
बन जाओगे एक कोना
जिसमे रोना ही रोना
हां, मै …….
****कमल***

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