😃मंजिल की खुशबू 💆✍ कमल भंसाली

सपनें हजारों देखे तुमने प्यारी जिंदगी
ख्याल भी बहुत आते तुम्हें प्यारी जिंदगी
समझ जरा हर आहट को आना नहीं कहते
दूर के ढोल तो सदा योंही सुहाने लगते
सपने सच नहीं होते, सब ख्याल अपने नहीं होते

आ जरा
बैठ मेरे पास
दे, अपना हाथ
अब समझ जरा
जीने का राज गहरा
मेहमानी अंश हम में है भरा
समझ ज्यादा सुविधाओं का खतरा
तन मन जिसने बनाया हमारा
वो रखता सारा हिसाब तुम्हारा

हर कोई, किसी का साथ नहीं निभाता
हर दीप पथ को आलोकित नहीं करता
तुम निहार, सबको सबका एक ही यथार्थ
इस जहां का दस्तूर प्यार में भी होता स्वार्थ

हर क्षण, यह समझाता
कर्म ही सच्चा दोस्त
हर, हकीकत में साथ निभाता
फल कुछ भी मिले
स्वीकार दिल से करता
नये आयामों से उसे सजाता
फिर, हमसफ़र बन साथ सदा निभाता
तेरी चाही मंजिल तक तुम्हें पंहुचाता

न गम कर न पाने का
न मायूस हो
किसी के बेगानेपन का
आगे तेरी, प्यारी मंजिल
कर रहीं, इंतजार तेरे आने का
आ ले चलता, उस राह पर
जहां अपनी मंजिल से
मिलकर, हर कोई मुस्कराता
अपने होने के अहसास को
नन्हीं आशा की बूंदों से खुशनुमां बनाता
हर ख्याल, हर सपना
जिसके आलिंगन को तरसता…रचियता✍कमल भंसाली

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