🌹पुनर्भव रिश्ता🌹 कमल भंसाली💘

एक अजनबी चेहरे
की हल्की सी मधुर मुस्कराहट
आज भी देती झनझनाहट
जैसे कोई उसकी अमानत
मेरी अधूरी ख्वाइसों के गगन में
आज भी बची सलामत
याद आती जब तब
उसकी नूर भरी खिलखिलाहट
था चन्द क्षणों का उसका साथ
किसी लम्बे सफर पर
लौह पथ गामिनी दौड़ रही अपनी डगर
नजरों से गुजर रहें
नदिया, पेड़, खेत बेशूमार
आनन्दित मन था बेखबर
कहते है, कभी वो ही होता
जो दिल कभी कभी चाहता
एक नाजनीन का हुआ दीदार
आई वो मेरी ही ओर
बैठ गई पहलू में मुस्कराकर
कुछ पल बाद बोली हंसकर
कहां तक का है आपका सफर
शर्म की एक रेखा से तनकर
शब्द निकलते रहे जज्बाती मनके बनकर
देखता कभी जब भी नजर छुपाकर
लगी जैसे कोई है, सुंदर तस्वीर
चितवन में उसके चांदनी
नयनों में स्वप्निल रागिनी
गालों के गुलाबी अंगारे
दिखा रहे थे दिन में तारे
जज्बाती फूल खिलकर बिखरे
अजनबी पल भर की
झलक दे रही थी अपनेपन की
भूल गया कुछ क्षणों का है सफर
हम दोनों अजनबी बन गए हमसफ़र
सबका सफर समाप्त नहीं होता साथ
जब आई उसकी मंजिल
उसने दिया मेरे हाथ मे अपना हाथ
कहा धन्यवाद, आपने अच्छा दिया साथ
अलविदा कहता
उससे पहले उसने उसे छोड़ दिया
मुंह मोड़ मंजिल का रुख किया
जिंदगी को अधूरे स्पर्श से
प्रेम का प्रथम अहसास बता दिया
प्यासा को प्यास सहने के दस्तूर सीखा दिया
सहज सन्तुलनता से पवित्रता का आभास दिया
फिर भी दंशित होकर मन सो गया
अजनबी उतर गई अपना अदृश्य प्रेम छोड़ गई
जिंदगी भर न भूलने वाली सौगात नयनों में बसा गई
किसी जन्म का कोई पुनर्भव रिश्ता निभा गई….रचियता✍ 💔कमल भंसाली💔✍

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🌹पुनर्भव रिश्ता🌹 कमल भंसाली💘&rdquo पर एक विचार;

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