💘शंकित प्यार💘 कमल भंसाली

दोस्तो,
कहते है, जीवन की विस्तृता प्रेम की समझ पर निर्भर करती है, वैसे प्रेम का अनुदान सभी रिश्तों में समाया है। परन्तु प्रेम अनुमोदित जीवन कभी कभी शक या संशय का शिकार हो जाता है, उसमें दूसरे रिश्तों पर चाहे कम असर हो पर पति, पत्नी या प्रेमी,प्रेमिका के रिश्ते काफी हद तक प्रभावित हो जाते है उनका आपसी तनाव दिल को सहमा देता है और एक उदासी जीवन में आ जाती है। आज के युग में चारित्रिक गलतियां सहज ही हो जाती है अगर नहीं भी हो तो किसी अज्ञात कारण से आपसी सम्बन्ध संशय के दायरे में आ जाते है। ये कविता किसी भी स्थिति का कोई समाधान तो नहीं कर सकती पर एक चेतावनी जरुर प्रेषित कर सकती है, कि “शक और संशय से बचिये, सच्चा प्रेम कभी दूषित नहीं हो सकता क्योंकि उसे अपनी सक्षमता पर पूरा विश्वास होता है”। आज के माहौल में प्यार को सहजता से समझना और उसे मर्यादित करना आसान नहीं है, सम्बधों की खटास की परवाह नहीं करने वाले अक्सर भूल जाते है, जीवन एक दिन की चांदनी नहीं है। समय अपने पास हर घटनाक्रम का परिणाम भविष्य के लिए सुरक्षित रखता है, जिसमें शंकित सम्बन्धों की नकारत्मक्ता संगीन घटनाक्रमों को अंजाम देने की क्षमता रखती है। आशा है, आप इसे सिर्फ सन्देश तक ही महत्व नहीं देंगे एक प्रेममयी कविता के रुप में आनन्द लेंगे। चाहना है, आप सभी के आपसी तथा पारिवारिक सम्बन्ध सदा सदाबहार रहे।अगर आप को लगे ये चन्द पंक्तिया लुभावनी, सन्देशमयी तथा प्रेरणामयी है, तो ब्लॉग साइड पर अपने विचार जरूर प्रेषित करे या पसन्द करे।
धन्यवाद, शुभकामनाओं सहित…..✍कमल भंसाली✍

प्रिय संगिनी
जीवन बंधनी
झुकी झुकी सी रहती तेरी निगाहें
जब भी खुली तुम्हारे लिए मेरी बाहें
नजर आ रहें पराये अहसासों अदृषत साये
पता नहीं क्यों बिन बोले तेरे अधर थरथराये
देख तेरी ये हालात मुझे बेवफाई के किस्से याद आये
कुछ तो हुआ सनम जो तुम इस तरह उखड़े नजर आये

माना प्यार तुमने अभी तक मुझसे ही शायद किया
अपनी जिन्दगीं के हर लम्हें को मेरे लिए ही जीया
कसमों वादों की क्यारी में फिर भी शंकित फूल उगआया
बदलती दुनिया में तुम भटक न जाओं डर उर में समाया

प्रियवर, बिखरी सी सांसे थकी सी सुस्तआहे
कितना कुछ कहती प्रणय से जैसे हो सूनी राहें
देख तेरे नयनों में बेबसी के संकुचित अधखिलें गुल
सहमी सी कह रही फिजायें कहीं कुछ तो हुई है भूल

दिलवर…
चाह मेरी इतनी ही प्यार दिल के गागर में ही समाया रहें
शक का कोई कंकर न गिरे जिससे कोई बूंद टपकती रहे
आरजू इतनी दिल करता, पवित्रता प्यार में अनुलिप्त रहे
गैर का ख्याल न आये हमारा मन सदा अनुरागी बना रहे

💖🌷💘
प्रियतम….
समर्पण जब अधूरा होता संकुचित हो जाता है दिल
प्रेम के प्रांगण में जब मायूसी का अंधेरा हो बोझिल
आपसी समझ मे तब शक हो जाता और भी ग्रँथिल
प्रेम उपासना, मान दिलवर, रख विशद प्रकीर्ण दिल

✍रचियता✍ कमल भंसाली

2 विचार “💘शंकित प्यार💘 कमल भंसाली&rdquo पर;

    1. धन्यवाद रजनी जी आप भी खूबसूरत लिखती है, पर मै जानता हूं मेरा लेखन प्रथम क्लाश के बच्चे जैसा है, आप अनुभवी लेखक है, मार्गदर्शन दीजिएगा।

      पसंद करें

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