🌜अधूरा बन्धन🌛⛈⭐ कमल भंसाली⭐

दोस्तों, जीवन पथ काफी मोहक होता है, इसका लुत्फ़ अकेला इंसान मजेदारी से कभी नहीं ले सकता, इसलिए दुनिया के हर देश ने शादी के बन्धन की खूबसूरती को सराहाऔर समझा। ये ही एक बन्धन है, जो हमें यह समझा सकता है कि किसी भी उम्र का ज्यादा भटकाव अच्छा नहीं होता है। रास्ते वो ही अच्छे लगते जिनमे हर तरह के राही आपसी समझ से चलते रहे और दूसरे राही की उपस्थिति मात्र उन्हें सुरक्षा का आभास देते रहे। तब भला सोचिये उस सम्बंध के बारे में जो आपको जिंदगी भर के लिए आशस्वत करता है, कि आप अकेले नहीं है, किसी का साथ है, जो तन, मन, धन और आत्मा से आपका जीवन भर साथ निभाने के लिए कृत संकल्प है, उसे हम छोटी मोटी गलतियों से कैसे अमृत से जहर बनने का मौका दे सकते है ! गलतफमियां दैनिक जीवन में आ सकती है, साथ में रहने वाले बर्तन भी कभी हवाओं के झोंके से टकरा सकते है, पर वो कभी नहीं अहसास देते कि उन पर इस टकराहट का कोई असर हुआ है। हम तो इन्सान है, बचपन में जैसे माता पिता की संरक्षता से जीवन को प्यार और अनुशासन की प्रेरणा मिलती ठीक वैसे ही दाम्पत्य-जीवन की अपनी विशेषता है, जो यौवन अवस्था में सब तरह के सुख के निर्माण में सहयोग करता है, और जीवन सन्ध्या के लिए एक आश्वस्त व्यवहार भरा स्नेह और प्यार भरा सेवाकारी माहौल तैयार करने में सहयोग करता है। इसलिए ये कविता उन साक्ष्य सम्बंधों को दृश्यत् कर लिखी है। इस कविता को ह्रदय की सूक्ष्म संवेदना को स्पर्शमय बना कर अगर पढ़े, तो निश्चित एक सही भाव आत्मा में जरुर आ सकेगा कि रिश्तों की पवित्रता उन्हें निभाने में है, न की आवेश में आकर तोड़ने के लिए। कोई लेखक या साहित्यिक कवि नहीं हूँ, अतः प्रार्थना यही है, भावना को ही समझने की कौशिश करे, और प्रेममय जीवन के लिए संयम और क्षमा का प्रयोग अपने जीवन में ज्यादा करे। ……कमल भंसाली

जख्म जिगर के
तड़प मन की
प्यास तन की
मेरे नाराज सनम
तूं बात सुन मेरे दिल की

चाहत हमारी
नहीं कोई मजबूरी
संशय से बनी जो दूरी
वो है अभी भी अधूरी
अन्तर्मनी जज्बात
जब करते बहकी बात
उसी पल
याद कर
वो हसीन मुलाक़ात
थी, कितनी सुनहरी
वो तारों छायी रात
जब तुमने
प्रथम बार दिया
मेरे हाथों में
अपना मेहँदी वाला हाथ
हां, यही था वादा
जिंदगी भर रहेंगे साथ साथ

आज भीआहों में तेरे
सभी ख्याल मेरे
करते बहकी बहकी बाते
हकीकत में वो याद करते
मदहोशी भरे
बाँहों के कसाव
जिनमें से बहता
प्यार का अनोखा रिसाव
मेहबूब
समझ जरा
प्यार नहीं होता
तेरा मेरा
ये तो है वही सवेरा
दूर करता हर अँधेरा
अजनबी बन
कब तक तलाशेंगे
उस संशय को
जो नहीं प्रियकर हमारा
आ, हाथ पकड़ मेरा
कहे जग से
आज भी सच्चा प्यार
थोडा नहीं बेशुमार
मेरा तेरा नहीं
सिर्फ “हमारा”

रचियता: कमल भंसाली

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