📤न जाने क्यों 📥 कमल भंसाली

न जाने क्यों
मुस्कराहट किसी की भी हो
सदा प्यारी लगती
क्रोध में तो
हर एक की आँख जलती
🌞
न जाने क्यों
दुःख किसी का ही क्यों न हो
दिल में बैचेनी लगती
ख़ुशी किसी की कैसी भी हो
नाचने का मन करता
💃
न जाने क्यों
नैतिकता की चाह
सभी को होती
पर अपनाने के समय
चालाकी अपना दामन थमा जाती
🙏
न जाने क्यों
सत्य कितना ही कड़वा हो
पीने का मन करता
गलतफेमिया कैसी भी हो
दूर करने का मन करता
🎅
न जाने क्यों
रिश्तों में दरार आ जाए
फिर भी निभाने का मन करता
शंकाये कितनी भी हो
दोस्ती बनाये रखने का मन करता
💆
न जाने क्यों
दुरी मन में कितनी भी आ जाए
साथ परिवार का ही अच्छा लगता
सन्तान कितनी भी नालायक हो
आशीर्वाद कहना ही अच्छा लगता
👃
न जाने क्यों
कितने ही आडम्बर क्यों न हो
अपना समाज ही अच्छा लगता
विकास कितना ही कमजोर हो
देश तो अपना ही अच्छा लगता
🚩
न जाने क्यों
जिंदगी कितनी ही जहरीली हो
फिर भी अच्छी लगती
पाप कितने भी किये हो
पर तमन्ना स्वर्ग की अच्छी लगती

न जाने क्यों….? ? ?

रचियता:)कमल भंसाली

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