👘मेरी खामोशियों का दरिया👘

मेरी खामोशियों के उस पार
एक दरिया बहता
उस में कभी मृदुल नीर रहता
शायद वो था मेरा प्यार
आज वहां
चन्द यादों के
कुछ घायल परिंदे आते
बीती यादों के
पंख फड़फड़ाते
फिर तन्हा ही उड़ जाते
पर कुछ चोटिले
टूटे पर
वहीं छोड़ जाते
मेरी खामोशियो….

तन्हा होकर
कभी कभी
दिल कहता
अहसास जब मरता
बहना इतना आसान नहीं होता
जीवन के निर्लिप्त जंगलो से
निकलना भी आसान नहीं होता
लालच की चट्टानों से टकरा
लहरें रास्ते बदल लेती
नदी का भी साथ छोड़ देती
जिंदगी भी
किसी गैर के
दामन के दाग से
घबराकर
पहलू बदल लेती
मेरी खामोशियों…..

सुख गया, नयनों के
सघन झील का
खुशियों भरा जल
जिसमें था प्यार सजल
अब प्रस्तर दर्द बन गया
विश्वास भी भटका
सपना हर टूटा
कहने को जो रह गया
वो है, मेरा अंदर का अँधेरा
जहां शांत खामोशी का
अपना ही आशियाना
ठहरी, सहमी जिंदगी
को चाह नहीं
किसी किनारे की
उस पार तो अब मिलेगा
कल का चमन, आज का वीराना
मेरी खामोशियों….

अब मेरी खामोशियां
अक्सर कहती
जिंदगी इस तरह नहीं चलती
तंग करती
पल पल की बैचेनिया
टूटना ही था
एक दिन
दिल को
खामोशियों के आँचल में
टूट जाता
जग जाहिर नहीं होता
बचा कोई धागा
शायद अपना
शेष अस्तित्व
ढूंढ लेता
मेरी खामोशियों……

💖 रचियता 😢 कमल भंसाली💖

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