🐙मुक्तक🐙

जिंदगी कट जाती है यों ही तुच्छ तुच्छ बातों में
बहुत कुछ छूट जाता तेरी मेरी की कश्मकश में
अहसान कर गिनती न करे सही मकसद जीने में
हम वापस आये पिछला कर्ज कोई चुकाने संसार में

               🐫 🐫🐪🐪🐪

सब कुछ समझे पर न समझे वो है दुनियादारी
इससे भी टेढ़ी खीर होती है रिश्तों की रिश्तेदारी
ऊपरी महक के नीचे दब जाती अपनी ही खुद्दारी
जरुरत के समय इनकी गायब हो जाती खुशबू सारी

                  🐒🐒🐒🐒🐒

जिंदगी बीते लम्हों की है कोई अनचाहि दास्तान
इसमें बचपन और जवानी चन्द दिनों के मेहमान
मिलन और बिछड़ने के सुख दुःख जिसमें समान
अफ़सोस की मोहताज हो अपने आप से परेशान

                    🐘🐘🐘🐘🐘

बुलन्दियों की तमन्नाओं में नैतिकता को ही रोना पड़ता
सत्य को भी अपने परिचय में झूठ को सहलाना पड़ता
जग की ख़ुशी के लिए खुद को भी बिक जाना पड़ता
अरमान हजारों है दिल में आँखों में ही ठहराना पड़ता

                      🐓🐓🐓🐓🐓

जीवनआशा निराशा के सफेद पन्नो पर लिखी दास्तान
सुख दुःख की स्याही में लिपटा साँसों का निरीही स्पंदन
कर्म की कलम तैयार करता मानव का आत्मिक दर्शन
विधाता ही भूमिका लिखता जग करता उसका विमोचन

                       🐝🐝🐝🐝🐝

समय कहता है, सुन रे इन्सान कर मेरा “सम्मान”
मै तेरे पास कम हूँ यह कह कर न कर मेरा अपमान
निरन्तर बह रहा हूँ तेरे ही लिए लगाकर जी जान
तेरी नाकामियों से हो परेशां हर पल जाते मेरे प्राण

                         🐞🐞🐞🐞🐞

                🌺 रचियता🌺 कमल भंसाली

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