उपहार मय २०१७ आपके लीये ***कमल भंसाली

यह साल भी हमारे जीवन में अपना अंतिम क्षण तक का सफर तय कर अपनी मंजिल की पूर्णता की ऒर बढ़ रहा है,और एक नये साल का तोहफा हमें देने की तैयारी भी कर रहा है। हमें उसके इस तोहफा का अहसास है, हम भी उसके स्वागत के लिए कई तरह की तैयारी कर रहे है, इस आशा से शायद यह मेहमान हमारे जीवन को आनन्दित और मंगलमय करेगा। मेरी भी यही प्रार्थना हम सबके लिए है, कि हम अपने जीवन को आनेवाले साल में सुखी जीवन का आधार बनाये, और उसे प्रफुल्ल और आनन्दित बनाये। कोई भी मेहमान जीवन भर हमारा साथ नहीं निभाता परन्तु उसके साथ बिताये क्षण जीवन को बहुत कुछ ऐसा अहसास करा देता है, जिससे हमें यह अहसास तो जरुर हो सकता है, कि हम भी यहां मेहमान है, हमारी भी जीवन अवधि है, हमको भी किसी ख़ास जरुरत के अंतर्गत ही यहां मेहमान बन कर आना पड़ा है। अतः हमारा जीवन सदा प्रेरणामय बने, यही अगर हमारा इस साल का अपने आपसे एक पूर्ण वादा रहें और हम अपने इस मकसद को इस साल की उपलिब्धि का प्रेरक लक्ष्य बनाये, निश्चित है, नया साल हमारे लिए मंगलकारी होगा।

“जीवन एक अनबूझ पहेली” पता नहीं किस दार्शनिक ने किस सन्दर्भ में जीवन को इस स्वरुप में परिभाषित किया, हो सकता है जीवन की कुछ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष न समझने वाली घटनाओं ने उस दार्शनिक को मजबूर किया हो, जीवन को इस तरह परिभाषित करने को। परन्तु सभी को जीवन इस तरह का अनुभव नहीं करा सकता क्योंकि जीवन की अपनी कोई विरासत नहीं है, वो तो लयमय ही चलता है। चूँकि निरन्तरता ही उसका स्वभाव है, अतः हर क्षण चलना उसकी मजबूरी है। जीवन की जिम्मेदारी प्राणी के शरीर, मन, और आत्मा अनुमोदित कार्य को सम्पूर्ण करना है। अतः हमारे लिए जरुरी है, हम अपने जीवन का आंकलन सूक्ष्मता और समझदारी से करे, तो जीवन हमें मित्र ही लगेगा l सही जिंदगी स्वभाविक रफ़्तार से प्रेम, स्नेह, और आपसी समझ का सही उपयोग करती है, तो कहना नहीं पड़ सकता की जिंदगी न समझने वाली कोई वस्तु या फिर कोई असामान्य सूत्र है।

जिंदगी का फलसफा उम्र के हिसाब से न चलता, तो सफलता और असफलता का अनुभव कोई प्राणी शायद ही कर पाता और अनुभव की कभी कोई कीमत भी नहीं आंकता। धरती पर जन्म के बाद जब इंसानी शरीर को कपड़े के आवरण से ढका जाता है, तो हकीकत में उसे समझ में आ जाता है, कि उसे एक ऐसा जीवन मिला है, जो संसार के लिए जरुरी है और प्रेम और स्नेह से उसका स्वागत हुआ है, तो निश्चित है, उसे भी अपने कर्मो की जिम्मेदारी धीरे धीरे समझनी होगी और जब किसी की मौत से उसका पहला साक्षात्कार यह समझा देता है कि जीवन मिलना भाग्य की बात है और मृत्यु होना समय की बात है। तब उसकी समझ में यह भी आ जाता है कि दूसरों के दिल में रहना ” अच्छे कर्मो” की बात है। अगर शास्त्रो की बात करे, तो वो भी ऐसे दर्शाते है कि कर्म ही जन्म निर्माण में लम्बी भूमिका निभाते है। इंसानी शरीर काफी विकट होता है, वो जल्द मौत को स्वीकार नहीं करता तभी तो एक आदमी के मरने के बाद भी उसका ह्रदय 10 मिनट, मस्तिष्क 20, आँखे 4 घंटे, त्वचा 5 दिन, हड्डिया 30 दिन तक जीवित रह सकती है। सूक्ष्मता से अवलोकन करने से जीवन स्थिति और आधार को कुछ हद तक हम अपने जीवन उद्देश्यों को सही मार्ग और सन्तोषमय बनाने की कोशिश कर सकते है, जो उचित भी है। एक साधारण मानव का जीवन सिर्फ दो स्थितियों का अनुभव ज्यादा करता है, सुख, और दुःख का उन्हें आप आनन्द, गम या और कोई अनुकूल शब्द दे सकते है पर जीवन यहीं लक्षित करना भी गलत होगा क्योंकि आत्मिक सन्तोष का जब तक जीवन को अनुभव नहीं हो, तो वो अधूरा ही रहता है। भारतीय पूरातन सभी शास्त्र हमारे जीवन को काफी गंभीरता से लेकर उसे श्रेष्ठ बनाने में विश्वास करते है, तभी उन्होंने जीवन को सहज प्रक्रिया के तहत् न रखकर सृष्टिकर्ता का दिया उत्तम उपहार माना।

आज जो संसार का स्वरुप नजर आ रहा है, उसमे शायद मानवता कठिनतम यात्रा के पड़ावों से गुजर रही है। समझदार होती मानवता नासमझी को अपनी बुद्धिमानी समझ उसका उपयोग कर रही है। जीवन की जो न्यूनतम जरुरत होती है, उसमे भोजन, पानी तथा हवा का शुद्ध होना हर एक प्राणी के लिए अत्यंत जरुरी है, नहीं तो जीवन को शारीरिक सुख का अनुभव होना मुश्किल ही लगता है। आज वो इनको ही अर्थ उपार्जन का साधन समझ कर इनका दुरुपयोग करने में नहीं हिचकिचा रहा। नैतिकता के हजारों पाठ पढ़ने वाला इंसान अपनी लालची मन की सीमाओं संयमित करने की जगह उसे बढ़ावा दे रहा है। अच्छी तरह से जानते है हम, सदाबहार नहीं हम परन्तु सुख दुःख की परिभाषाओं के अंतर्गत ही तो जीवन मापते है, और आज हम सबसे ज्यादा तनावग्रस्त जीवन जी रहे है। क्या ये हमारी स्वयं निर्मित मजबूरी है ? आप और हम शायद संकोच वश इस प्रश्न का उत्तर देने में टालमटोल करे, पर हकीकत यही है,इंसान ही इंसान का आज शत्रु ज्यादा मित्र कम नजर आ रहा है। इसका एक ही कारण है, हम अशुद्ध विचारों के मालिक बनते जा रहे है, पवित्रता हमारी सिर्फ जबानी जमा खर्च का हिस्सा बन कर रह गई। इसलिए जीवन एक पहेली बन कर रह गया। हर रोज इसकी हर नई पहेली का उत्तर देना हमारी जिंदगी का अनिवार्य हिस्सा बनता जा रहा है। अपेक्षाओं के संसार में हमारी निरहिता स्पष्ट झलक दे रही है, और हम बेखबर आज भी उस जीने में लगे जो शायद समय गुजारने के अलावा कुछ भी नहीं लगता।

दोस्तों, नये साल की नई सुबह की पहली किरण से अपनी चेतना को अगर स्फूर्ति, आनन्द देना का ध्यान हों तो कुछ नया चिंतन कर आप उसे अपने जीवन को प्रभावकारी बनाने में सफल हो सकते है, एक अंग्रेजी कहावत है “A good begning makes a good end” ।

हमारे जीवन के कुछ क्षेत्र है, हो हमारी दैनिक जीवन को महत्वपूर्ण बनाता है, उन्हें याद कर उनसे निर्मित गुणों के चवनप्राश का रोज उपयोग करे, तो शायद ही हम इस साल में निराशा को अपने आसपास फटकने दे, और गतिमय जीवन की लय बिना रोकटोक अपनी मंजिल की तरफ अग्रसर होती रहेगी।

मुख्य क्षेत्र जो जीवन साधना के हिस्से है, उनमें जो हमें महत्वपूर्ण बना सकते है, उनकी एक संक्षिप्त सूची नीचे तैयार कर, हमें इस साल इन पर गौर करना चाहिए, वो हो सकती है….( मेरे अनुसार)

1. अमूल्य समय की सही उपयोग की समझ
2. व्यवहारिक सन्तुलन हर कार्य और सम्बंधों के निर्वाह में
3. हर रिश्ते की गरिमा पहचान उसका मान बढ़ाना
4. प्रेम और स्नेह का दिल में स्पंदन
5. समझदारी से पूर्ण संवेदनशीलता
6. चारित्रिक सक्षमता को मजबूत रखना
7. ईष्या, द्वेष, लोभ, हिंसा, कपट को रोज जीवन द्वार से बाहर फैंकना
8. स्वास्थ्य और पर्यावरण को स्वस्थ रखना
9. आशा, आस्था, सत्य और विश्वास का जीवन में सदुपयोग करना
10. संघर्ष, संयम, नैतिकता, देश, धर्म, दया समावेश जीवन में रहना
11. हार को जल्दी से स्वीकार न करना, सतत प्रयासी जीवन जीना
12. आर्थिक, सामाजिक जीवन को मजबूत बनाना

नववर्ष के आगमन को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण अंश बनाने के लिए हमें कुछ शक्तिवर्द्धक सिद्धान्तों को समझ कर उनका शुरुवात से ही पालन करने की दृढ़ता होनी चाहिए। इसका प्रभाव आनेवाला वर्ष हमें एक सार्थकता आभास जरुर दे सकता है, जो जीवन को एक अद्धभुत मानसिकता तो देगा ही, साथ में हमें कभी भी किसी चुनोती के सामने लज्जित नहीं होने देगा। शायद यही सफलता का सही मापदण्ड होता है।

कुछ जीवन विशेषज्ञों के अनुसार कुछ स्वयं सिद्ध सिद्धांत हर जीवन को सार्थकता अनुभव करा सकते है, उनमे से कुछ तथ्य उदाहरण स्वरुप प्रस्तुत करने की कोशिश की है। आप भी अपनी जरुरत के अनुसार बना कर उन्हें अपनाने की चेष्टा अगरआनेवाले साल के प्रारंभ से कर सके तो शायद यह सोने में सुहागा जैसा प्रयोग आपके जीवन में माना जा सकता है।

1. आशा किसी से भी नहीं करना।
2. सत्य बहुत सी आफतों को दूर रख सकता है।
3. आलोचना दैनिक जीवन में सिर्फ वैचारिक तो हो पर व्यक्तिगत नहीं।
4. अपनी गलती का मूल्यांकन कर, स्वीकार करना उचित है।
5. सात्विक और पौष्टिक आहार स्वास्थ्य और मन दोनों को दमदार बनाता है।
6. समय के अनुरुप अपना बदलाव उचित होता है
7. मितव्यता और संयम को सच्चे दिल से अपनाना सही है।
8. सही दिनचर्या समय का सही उपयोग करा सकती है।
9. अच्छा साहित्य सही जीवन दर्शन का ज्ञान करा सकता है।
10. सिर्फ सार्थक परिश्रम से जीवन को आर्थिक व सामाजिक महत्व मिलता है।

आप अपने जीवन को जिस तरह दृष्टिमय बनाना चाहते, उसी अनुसार उन क्षेत्रो को और जोड़ हर नये साल को और नवीनतम कर सकते है। सिर्फ ध्यान रखने की बात यही है की ” आप जब तक कुछ हासिल नहीं करोगे, जब तक उसकी शुरुवात नहीं करोगे”।

कोई किसी का
आशा सहित, मंगलकामनाये, नया साल आप सभी को प्रफुल्लित और आनंदित जीवन का उपहार दे।…….लेखक💐.कमल भंसाली💐

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.