🍥🍥बेवफा ख्वाब🍥🍥कमल भंसाली

जिंदगी को जब मिला
कोई हसीन “ख्वाब”
जिंदगी चहक उठी
इतरा कर बोली
हसरतों से
कितना अच्छा है, “ख्वाब”
लगता कहीं का है, “नबाब”
प्यार इसी से करुंगी
रोज इस के लिये सजूंगी
ख्वाब की महबूबा बनूँगी
जिंदगी……

चली जिंदगी
उस राह की ओर
दूर से ख्वाब और हसीन
नजर आया
नजरे मिली
दोनों मुस्कराये
पथ पर फूल बहारों ने
भी बरसाये
जिंदगी भूल गई
अपना अस्तित्व
ख्वाब के
गले लग गई
जिंदगी….

एक दिन जान गई
ख्वाब सिर्फ उसका नहीं
दूसरा कोई हो
ये कौन सहता
कुछ दिनों बाद
जिंदगी हुई उदास
जब कोई नहीं था पास
हसरतो से कहा
ख्वाब कुछ नहीं करता
निठल्ला बन इधर उधर घूमता
बिना मन
मेरे साथ अब रहता
तुम बताओं
पहले जैसा क्यों नहीं लगता
क्या प्यार सदा
एक जैसा नहीं रहता
जिंदगी…..

हसरतों ने
जिंदगी को समझाया
सूरत से कोई
हसीन नहीं होता
नजरों का ही
धोखा है कोई
सीरत में ही
प्यार करने वालो
की बस्ती भलाई
जो ख्वाब ही देखते
उन्हें जमी से
आसमां के सितारे ही
नजर आते
हकीकत में
वो सिर्फ “ख्वाब” ही
बन रह जाते
धुंधला कर टिमटिमाते
जिंदगी……

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