💐मान-सम्मान💐कमल भंसाली🌺

“सम्मान” यानि इज्जत या प्रतिष्ठा हर जीवन की जरुरत है, इससे हमारा इंकार करना जरा मुश्किल है, पर सबको मिलना मुश्किल भी है, पर असंभव नहीं क्योंकि ये प्रेम, श्रद्धा, स्नेह, ज्ञान के व्यवहारिक उत्पादन है। इनको और भी गुणों के मिश्रण से गुणकारक और उपयोगी बनाया जा सकता है। काफी हद तक सम्मान जीवन के उज्ज्वल व्यवाहरिक पहलू दर्शाता है, और एक सक्षम व्यक्तित्व को और इंगित करता है। अगर इस शब्द में मान और जोड़ दिया जाय तो “मान -सम्मान” काफी सशक्त होकर प्रतिष्ठमय शब्द बन जाता है, जिसे हम इंग्लिश में “RESPECT” नाम से बेहतर जानते है। मान का मतलब नाप, परिमाण, तौल, योग्यता भी होता है परन्तु मान को सम्मान, इज्जत के लिए भी प्रयोग करना सही है। सम्मान का मतलब आदरपूर्ण भाव, मान, प्रतिष्ठा होता है। चूँकि जिंदगी मकसदों के आधार पर चलती है, अतः सफलता को भी मापदण्ड की जरुरत हो सकती है, तब हम मान सम्मान से गर्वित होना पसन्द करते है। हमारे पास कितना भी ज्ञान क्यों नहीं हो परन्तु जब तक उसका उपयोग हम दूसरों की भलाई में नहीं उपयोग करते है, तब तक सम्मान और प्रतिष्ठा के उम्मीदवार नहीं हो सकते। सफलता इंसानी जज्बातों का उच्चतम परिणाम होता है, परन्तु जिस सफलता से मान सम्मान और इज्जत नहीं मिलती, उसे अवमूल्यित सफलता ही कहा जायेगा। संसार विचित्रताओं का अजीब संगम है, यहां गलत कारणों के कारण लोग अपराधिक प्रसिद्ध तो हो जाते, परन्तु सन्देह है, कि उन्हें मान सम्मान या इज्जत की नजरों से देखा जा सकता है !

सम्मान प्राप्त करना, जिंदगी का अहम् हिस्सा होता है, एक रिक्शा चलाने वाला गरीब आदमी भी सम्मान के प्रति जागरूक होता है, और एक पैसा वाला धनी आदमी भी चाहता कि उसे भी सम्मान मिले, चाहे उसमे पैसे की ताकत भी क्यों न लगे। पर सिद्धान्त यही कहता है, जो दूसरों को सम्मान या इज्जत देने की कद्र करता है, वो ही उसका मूल्यांकन कराता है, कि वो इसके लायक है या नहीं। सम्मान की जरुरत जिंदगी के आखरी पड़ाव तक की सबसे बड़ी जरुरत होती है, और इसे वो ही प्राप्त कर सकते है, जो दूसरों की इज्ज्त करना जानते है, और एक साफ़ सुथरी जिंदगी उन्होंने दूसरों के लिए जी है, जिसमे बेशुमार प्यार, स्नेह और दया का समावेश हो।

आदमी अपने घर का राजा होता है, उसकी चाह होती है कि घर के सब सदस्य उसका मान सम्मान करे और अपने कार्यों स समाज और दुनिया में मान-सम्मान भरा परिचय परिवार का दे । चिंतन सही है, परन्तु यह समझने की बात है, यह तभी संभव है, जब परिवार में पलने वाले बच्चों को महसूस हो की उनके माता- पिता अपने से बड़ों की इज्जत तो करते है, और उन्हें मान-सम्मान भरा प्रेम और आदर का व्यवहार भी देते है। कहा जाता है कि “श्रद्धा” ज्ञान देती है, “नम्रता” मान देती है, “योग्यता” स्थान देती है, तीनो मिल जाऍ तो व्यक्ति को हर जगह “सम्मान” मिलता है। इसका तरोताजा उदाहरण खेल जगत से ले तो भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल, पहलवान साक्षी मलिक जैसी लड़कियों ने खुद अपने मजबूत इरादो के बदौलत स्वयं मान सम्मान प्राप्त किया और अपने परिवार, राज्य और देश को भी मान- सम्मान का हकदार बनाया। निश्चित है, इसमे उनके परिवार की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है, जिन्होंने उन्हें सिर्फ साधन ही नहीं एक सकारत्मक माहौल प्रदान किया। तय हो जाता है, स्कारत्मक्ता मान सम्मान प्राप्त करने की बुनियादी जरुरत होती है।

जरुरी हो जाता है कि हम जब सम्मान की इच्छा करते है, तो उसको अर्जित करने वाले गुणों को प्राप्त करने की चेष्टा करे। इंग्लिश लेखक ने कहा भी है, “Self respect is best respect”, चीन के दार्शनिक कनफ्यूसियस भी कुछ इसी तरह की बात कहते है, ” Respect yourself and other’s will respect you”l सम्मान और इज्जत का प्रभाव एक लहर की तरह होता है, आप का रुख स्वतः ही उनको आदर देना शुरु हो जाता है, जिनको दूसरे भी दे रहे है। इसलिए जरुरी है, हमारा प्रारंभिक प्रभाव आसपास से शुरु हो, उसके लिये हमें दूसरों को मान सम्मान और इज्जत देनी होगी, तभी हमारा व्यवहारिक पहलू उन्हें हमारी तरफ आकर्षित कर सकेगा।

ध्यान रखने की बात है, मान सम्मान गुणवत्ता के आधार पर ही प्राप्त होता है, अपने आप का सही विश्वास ही इन्सान को मंजिल की तरफ अग्रसर करता है, इस भावना के साथ की जीवन मे हर तरह के मोड़ से गुजर ने से ही चन्द्रमा जैसी स्वस्थ, धवल शुद्ध आत्मिक सफलता प्राप्त की जा सकती है, कहना न होगा जीवन का हर मोड़ आसानी से पार नहीं किया जा सकता। ध्यान रहे हमे, जालसाजी, छद्मता, बेईमानी, अस्थाई धन, क्षणिक शोहरत स्वार्थिक प्रशंसा तो दे सकती है, परन्तु अखण्ड मान, सम्मान और इज्जत नहीं। हमारी स्वस्थ आस्थाए ही हमारे दैनिक जीवन की गुणवत्ता तय करती है, और उसमे मानवीय प्रेम की प्रमुखता जरुरी है, चाहे वो गली के आदमी से शुरु हो फिर परिवार से। हमारी व्यक्तिगत और सामाजिक जिंदगी का सही तालमेल हमारे मान सम्मान के तराजू के दो पलड़े है, और दोनों का समान रहना हमारी ईमानदारी, सच्चाई से भरे व्यवहार पर निर्भर है, कथनी और करनी का भेद यहां खतरनाक साबित हो सकता है।

आइये कुछ उन तथ्यों पर भी गौर करते है, जो हमे हमारी ही नजर में मान सम्मान और इज्जत का अधिकारी बनाते है।

1. व्यवहार और संस्कार शुरुवाती जरुरत होती है, जो आसपास के लोग हमसे व हमारे परिवार से मिलकर आंकलन करते है। अतः परिवार के प्रति हमारी आस्था संस्कारिक और नम्रपूर्ण होनी चाहिए। हमें लोग सहायक के रुप में पहचाने तो सही होगा।

2. कर्मक्षेत्र मान सम्मान की एक कसौटी ही होती है, उसमें ही मान सम्मान का अमृत्व रहता है। क्षेत्र कोई भी हो, उनके नियम कानूनों का आदर करने से इज्जत बढ़ती है, परिणाम या फल बाद की बात होती है। अपने पद, ओहदे के अनुरुप किये सही कर्म ही इज्जत बढ़ा सकते है, इनका दुरुपयोग बदनामी का कारण बनते है।

3. ईष्या, द्वेष, जलन, अंहकार, लोभ, क्रोध, अनादर,व असत्य और दूषित वाणी मान सम्मान विरोधी तत्व है, इनसे पूर्ण रूप से बचना आज के आर्थिक व भोगवादी संसार में मुश्किल है, पर संयमित होकर इनसे दुरी काफी हद तक बनायी जा सकती है।

4. सहयोग और प्रेम दो तत्व काफी सहायक होते है, इज्जत के लिए। एक मुस्कराहट भरा विरोध दुश्मनी से बचा सकता है।

5. आर्थिक मजबूती, मानसिक क्षमता, वैचारिक शुद्धता , संयमित जीवन, व्यवहारिक स्वभाव, साहित्यिक ज्ञान, और धार्मिक अनुभव मान सम्मान को निरन्तरता प्रदान करता रहता है।ध्यान रखना उचित होगा कि मान-सम्मान सिर्फ नियति से ही नहीं प्राप्त होता, इसमें इन्सान की अपनी सही नियत भी काफी मायने रखती है।

समय, परिस्थितियों के अनुसार हर मानव की खुद की समझ और उसके अनुसार अपना बदलाव मिले “मान सम्मान” को दृढ़ता से संभाल कर रख सकता है। चलते चलते यही प्रार्थना है, हम सभी अखण्ड “मान- सम्मान” के अधिकारी बने। **लेखक….कमल भंसाली**

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