🌺मुक्तक अपनों के🌺 कमल भंसाली🌺

वक्त की मेहरबानियों पर न कीजिये इतना गुरुर
जरा अपनों के स्नेह, पर भी ध्यान दीजिये, हुजूर
हवाओं का रुख बदलते देरी कभी नहीं लगती
डालियों से ही पेड़ की भव्य गरिमा सुरक्षित रहती
                        🐰🐰
जीवन जब निराश होता, हमदर्द की तलाश करता
स्वार्थ के फूल उगाने से, दर्द ही खुशबू उनमें भरता
रौनक नभ में सितारे ही करते जब चाँद नही उगता
जीवन अपनों के त्याग और प्यार से ही फलता फूलता
                          🐸🐸
हकीकत के उन पन्नो पर एक सरसरी नजर तो डालिये
वजूद में अपनों की श्रमित मेहरबानी को कम न आंकिये
कहते है, उनका प्यार ही नये जीवन को आधारित करता
मकसद के पौधों को उर्वर बना कर उन्हें प्रफुल्लित करता
                           🐓🐓
परेशानियों की बेचैनियों को क्षण की मजबूरी समझिये
समय बड़ा बलवान है, अपनी क्षमता को कम न आंकिये
दुःख की बूंदों को जहर नहीं, अमृत समझ कर पीजिये
जो मिला और मिल रहा,उसे प्रसाद समझ ग्रहण कीजिये
                            🐳🐳
आज हम है, कल कहां होंगे, कभी कह नहीं सकते
बिना उसकी मर्जी के अगली सांस भी नहीं ले सकते
धन मखमली सुनहरी चादरों का उपहार तो दे सकता
पर तय नहीं सुख शान्ति भरा, जीवन उधार भी दे सकता
                             🐉🐉
प्यार भरी दुनिया सिर्फ सिक्को से नहीं मिल सकती
अहसास की बूंदों बिना सीप भी मोती पैदा नही करती
रिश्तों की गरिमा न पाकर जिंदगी खूबसूरती नहीं पाती
अपने तो अपने ही होते, प्रीत की रीत तो यही समझाती
                              🐍🐍
🐧 रचियता🐭 कमल भंसाली

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