🌞 परछाई🌜कमल भंसाली


अधूरे से मेरे ख्बाब
बिखरी सी उनकी जुल्फे
दोनों में सिमट गया
मेरी जिंदगी का शबाब
🌸
रात को आईने में
जब चाँद तैरता
उनकी निगाहों में
कोई “कमल” खिलता
🌺
फलसफा प्यार का
दिल धड़कता यार का
सांस रुक कर कहती
बैचेनियां कितनी तंग करती
🌷
उनकी एक अंगड़ाई
कितने सवाल कर जाती
सागर जैसे गहरे उत्तर
मेरी साँसों में तलाशती
🍀
खुशबुओं भरा प्यार
मदहोश करता इकरार
बन्धनो में बंधा रहता
वो ही है, “प्यार”, “प्यार”
🌻
कितना कुछ बहारों में
झोंका बन खो जाता
यादों भरे ,धुंधले नजारो में
बिछड़ा प्यार चांदनी बन
उम्र की सीढ़ियों से
उतर जीवन के प्रांगण में
धुंधली “परछाई”बन जाता…..🌾

🌴रचियता…कमल भंसाली 🌴

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