🐞 संघर्ष 🐞 जीवन सूत्र भाग 5🌱कमल भंसाली

कई जीवन चिंतको के अनुसार “संघर्ष” जीवन के सम्बंध में एक अनचाहा सा शब्द है, ये शब्द जीवन को तकलीफ महसूस कराता है, पर हकीकत में वैसा नहीं है, क्योंकि संघर्ष जीवन की अति आवश्यक मूलभूत जरुरत है। जब तक इसमें व्यक्तिगत किसी की क्षति न हो, तो इसमें सार्थकता का अनुभव किया जा सकता है। संघर्ष ऐसे कई शब्दों के रुप से भी जाना जाता है, जिनमें उसका नकारत्मक रुप सामने आता है, जैसे लड़ाई, झगड़ा,विरोध, टक्कर, युद्ध, जंग, संग्राम आदि, इन सब में जब आपसी क्षति का परिणाम प्रलक्षित हो तो, यह शब्द जीवन को गलत दृष्टिकोण देता नजर आता है। सचमुच क्या ये ही उसकी सच्चाई है ? नहीं, हकीकत में जीवन के सन्दर्भ में संघर्ष मजबूती का आधार है। संसार किसी एक वृति की आकृति नहीं है, इसमें अनगनित रुप से इन्सान के सामने समस्याएं आती है, और तय है, उनका समाधान बिना संघर्ष मुश्किल है। संघर्ष को दैनिक जीवन की कार्यशैली से दूर रखना, इंसान के वश की बात नहीं है। अतः हम इस शब्द की व्याख्या में इतना जरुर शामिल कर सकते है कि संघर्ष जब नकारत्मक तत्वों के लिए न हो तब तक संघर्ष को हमें शक्ति उपर्जन के रुप में ही देखना चाहिए। अंग्रेजी में एक शब्द है, जो इसकी व्याख्या ज्यादातर स्कारत्मक्ता से करता है, वो है, “Struggle”, इसका अर्थ होता है, “किसी बिगड़ी स्थिति को सही रुप में देने की जबरदस्त कौशिश”। हम अपने व्यक्तित्व के सन्दर्भ में ज्यादातर इसी शब्द का प्रयोग करते है।
मानव जीवन अति साधनों से भरपूर होते हुए भी सदा अलग अलग तरह की समस्याओं का सामना करता है। सच कहे तो कह सकते है, उन समस्याओं में ही वो अपना जीवन और व्यक्तित्व तलाशता है। हम भी इसी तथ्य को स्वीकार करते हुए, कि संघर्ष हमारे जीवन को कैसे बदल सकता है ! और कैसे हमें कमजोर से शक्तिशाली बना सकता है, इसको जानने की कौशिश करते है।

फ्रेडरिक डगलस के अनुसार अगर “जीवन में संघर्ष न हो तो जीवन प्रगति की तरफ अग्रसर नहीं हो सकता”, काफी हद तक सच ही लगता उनका कहना क्योंकि हर आदमी जब कभी अपने चुने क्षेत्र में सफलता अपने परिश्रम और संघर्ष से पाता है, तो वो अनुभव करता है कि “परिश्रम का फल” मीठा होता है। संघर्ष यहां परिश्रम की आवश्यकता तय करता है और अनुभव को संचय कर उससे अपने आप को शक्तिशाली बनाता है। ज्यादातर, इन तीन तत्वों के संगम से सफलता का जो फल पैदा होता है, कहना न होगा अति मीठा और नैतिक जीवन के लिए स्वास्थ्यवर्द्धक होता है। “हर संघर्ष की बुनियाद चिंतन होती है”, इस तथ्य पर जरा गंभीरता से विचार करना सही होगा कि बिना चिंतन का संघर्ष सिर्फ प्रयास की श्रेणी में आता है, उसका नतीजा कई अनिश्चितताओं को भी जन्म दे सकता है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है, प्रयास करना तभी सही होता है, जब उस प्रयास के हर पहलू पर अच्छी तरह से खुले दिमाग से और गहनता से विचार किया जाय।

हकीकत यही है, जीवन की शुरुआत संघर्ष से शुरु होती और उसी को करते करते जीवन का अस्तित्व विलीन हो जाता यानी संघर्ष कुछ भी नहीं अस्तित्व बोध का साधन मात्र है। अंतिम समय में साँसों का संघर्ष जीवन की वास्तिवक सच्चाई है, इसका ज्ञान जीवन को भटकने से बचा सकता है तथा इसका ख्याल कर तमाम उम्र के संघर्ष का मूल्यांकन भी किया जा सकता है। हर संघर्ष के पीछे कारण होना भी लाजमी होता है, बिना कारण न तो कोई प्रयास करता है, न ही संघर्ष का स्वाद वो चखता नजर आता है।

अगर हम अपने देश के सन्दर्भ में संघर्ष की भूमिका टटोले तो बड़ा अजीब लगता है कि यहां आज हर नेता कहता है, भारत एक गरीब देश है, उनसे कोई नहीं पूछता फिर आप नेता बन कर अरबों के मालिक कैसे बन जाते है ? क्या फर्क है, हमारे और आपके संघर्ष में ? इसके उत्तर में इतना ही कहा जा सकता है, उनका प्रयास देश की उन्नति नहीं उनका संघर्ष अपनी गरीबी को खत्म करना है। संघर्ष उनका सही रास्ते का है, क्योंकि सफल अपने मकसद में हो जाते है अपने लिए, पर देश के लिए उनका संघर्ष नाम मात्र और दिखावे का होता है। हमारे देश में आज भी ज्यादातर संधर्ष दैनिक जीवन के अस्तित्व को बचाने के लिए किया जाता है, अतः इस तरह के संघर्ष को हम ” अस्तित्व” संघर्ष कह सकते है। इस संघर्ष का अस्तित्व हमारे यहां सदियों से जारी है, और इस से ज्यादा राहत आम आदमी मिले संभव नहीं है, क्योंकि आज भी हम शोषण की नीति को ज्यादा पसन्द करते है।

हर संघर्ष का सिक्के की तरह दो पहलू होते है, दोनों का मूल्य बराबर ही होता है, एक पहलू में परिणाम नम्बर में होता है, दूसरी तरफ विवरण भी होता है यानी हर संघर्ष मूल्यवान है। हमें अपने संघर्ष की कीमत ऊँची चाहिए तो संघर्ष को चिंतन और बुद्धिमानी से करना उचित होता है। सही संघर्ष में अगर शरीर, मन और आत्मा तीनों मिल कर काम करते है, तो कोई भी कारण नहीं हो सकता जो असफलता का बोध कराये। असफलता में ज्यादातर देखा गया कि मन और आत्मा कई कारणों से कमजोर हो सकती है।

संसार में जितने ही ज्ञानी और धर्म के सही जानकार है, वो संघर्ष को उन्नति की क्रिया मानते है। क्षेत्र कोई भी हो, संघर्ष बिना सफलता मिलना भाग्य की बात ही कही जा सकती है, और उस सफलता का कोई मूल्य नहीं होता, यह भी सही है। अचानक बिना संघर्ष पायी सफलता कुछ बूंदों की मेहमान होती है। इसलिए संघर्ष को जीवन का आधार माना गया, यह सही भी है।

संघर्ष अगर मानव हितकारी साधनों के तहत किया जाय तो उसका मूल्यांकन नहीं किया जा सकता क्योंकि इसका प्रभाव सब के लिए कल्याण कारी होता है। गलत काम करने वालों को भी अपने मकसद को अंजाम देने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, और निश्चिन्त है, ऐसे संघर्ष का अंतिम फल मुसीबतों के अलावा और कोई नहीं होता। संघर्ष का जो सही महत्व समझते है, वो ही हकीकत में जिंदगी को पूर्णता दे पाते है, और प्रेरणा प्रेरक होते है। अतः संघर्ष से न घबराये, जीवन पथ की अनेक समस्याओं का समाधान स्वत् ही हो जाएगा। ध्यान रखने की बात है, संघर्ष का मूल्यांकन पद, धन, आदि से करनें पर उसमें नैतिकता की मात्रा कम होती नजर आएगी।

संघर्ष को रचनात्मक और सही फलदायक बनाने के लिए आइये इसके कुछ मनोवैज्ञानिक तथ्यों को तलाशने की कौशिश करते है।

1. ज्यादातर संघर्ष को विचलित इंसान की अपनी गलत आदतें करती है, उन्हें जानकर दूर कर से हर संघर्ष को सही दिशा दी जा सकती है।

2. अपने महत्वपूर्ण संघर्ष को सदा गति धैर्य से देते रहना चाहिए, इससे संघर्ष को अपनी मंजिल का आभास होता रहता है।

3. सफल व्यक्तित्व के संघर्ष की प्रेरणादायक कहानियों से आत्मा और मन का सम्पर्क बनाया रखना सही कदम है।

4. लक्ष्य के प्रति पूर्ण समपर्ण से संघर्ष विचलित नहीं होता।

5. संघर्ष सम्बंधित पुस्तके, संघर्ष में सुधार करने की प्रक्रिया जारी रख सकती है। हो सके तो इन लेखकों की बहुचर्चित पुस्तकों के अनुभव का ज्ञान करना सही होगा

a. The Japanese Art of Acceptance…..Shikata ganai
b. A Father’s Greatest Gift to his Son…Stephen Murphy
c. Mindset….Carol S.Dweck . Ph.D
d. Struggle of Pshychological Independence… Rana, Sohel
e. Mindful Path To Self- compassion…Christopher.K. Germer Ph.D

ऐसी अनेक जीवन उपयोगी अनेक पुस्तके है, जो जीवन के संधर्ष को अनेक पौष्टिक तत्वों से मजबूत कर सकती है। भारतीय साहित्य भी जीवन उपयोगी पुस्तकों से भरा है। जिन्हें छूने की कौशिश से संघर्ष को नया आयाम मिल सकता है, वो है, रामायण, महाभारत तथा सभी धर्मों का साहित्य। ध्यान रखे, गीता का ज्ञान तो जीवन का आधार ही संघर्ष बताता है।

6. संघर्ष को जितना सात्विक रखा जाय, उतना ही वो अमृतमय हो सकता है।

7. हर संघर्ष अपनी मंजिल खुद बताता है, अतः विश्वास का होना जरुरी होता है।

8.अपने से बड़ों के संघर्ष उपार्जित ज्ञान का लाभ लेना, संघर्ष को प्रेरणा दायक बनाता है।

9.सत्य के बिना हर संघर्ष अधूरी सफलता ही देता है, हम उसे पूर्ण सफलता मान लेते है, यह हमारी अपनी मजबूरी है।

10. ज्यादातर संघर्ष हमें अकेले ही करनें होते है, हर संघर्ष यही बताता है, कोई किसी का नहीं होता।

11. संघर्ष का नैतिकता के साथ चलते रहना ही “जीवन” कहलाता है।

12. ध्यान रखने की बात है, आलस्य को जीवन में ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए क्योंकि ज्ञान ग्रन्थों के अनुसार ” आलस्य संघर्ष की मृत्यु है” संस्कृत में कहा गया ” अल्सस्य कुतो विद्या कुतो वितं कुतो यश” ( आलसी मानव को विद्या, धन, यश कहाँ से प्राप्त हो ?) ।

13. निराशा संघर्ष के लिए कैंसर जैसी बीमारी है, अतः निराशा से दुरी सही होगी। किसी भी तरह की कोई भी असफलता को संघर्ष की हार नही जीवन की गहराई को समझना का तरीका समझना चाहिए । Elisabeth Kubler- Ross के अनुसार ” The most beautiful people we have known are those who have known suffering, known struggle, known loss, and have found their way out of those depths”

14. कार्य और कर्तव्य के प्रति प्राप्त हुई आलोचना से घबराना और उतेजित होना सही नहीं होता, सच यह है, यह संघर्ष की खूबसूरती का बखान है। गर्व करना सही होगा की हमको परखने वाले भी है। नेपोलियन हिल के उस कथन में विश्वास रखना होगा, जिसमें कहा गया, ” Strenth and growth come only through continuous efforts and struggle”l

15. मानकर चले ” मन की हार ही, हार है, इच्छित सफलता तो सामने मुस्कराती खड़ी है, बाहों में भरने की देरी है।

लेखक**कमल भंसाली

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