🔥अनुभव ⭐ एक सार्थक चर्चा 🌞 कमल भंसाली

“अनुभव” एक शानदार शब्द होने के साथ सक्षमता प्रदान करने का सही और सुंदर साधन है। शास्त्रों से लेकर धार्मिक ग्रन्थों ने इसको महत्व दिया है। जीवन अपनी विभीषताओं से जब भी उलझता है, तब अनुभव एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है, शर्त यही है, कि वो हमारे पास अर्जित किया हुआ होना चाहिए। प्रश्न किया जा सकता है, अनुभव में आखिर ऐसा क्या है, जिससे उसे इतना महत्व दिया जा रहा है ? सही वस्तुस्थिति को समझने के लिए हमें अनुभव के साथ परिचय करना सही होगा। अनुभव का हिंदी में शाब्दिक अर्थ प्रत्यक्ष ज्ञान, काम की जानकारी, तजुर्बा आदि होता है। जरा और स्पष्ट शब्दों में अगर कहे तो प्रयोग और परीक्षा से प्राप्त ज्ञान भी अनुभव कहलाया जा सकता है। तर्क संग्रह के अनुसार ज्ञान के दो भेद होते है, स्मृति और अनुभव। संस्कार से प्राप्त ज्ञान स्मृति समझा जाता है, कर्म से प्राप्त ज्ञान अनुभव के दायरे में आता है। भारतीय शास्त्रों ने अनुभव को दो भागों में विभक्त किया है, यथार्थ अनुभव और अयथार्थ अनुभव। यहां तक तो शास्त्र एक मत है, पर उन्होंने जब यथार्थ अनुभव के चार भेद किये तो विभक्ति उनके अंदर भी हुई,। वस्तुतः ज्यादातर जो चार भेद स्वीकार करने योग्य थे, वो है,

1.प्रत्यक्ष, 2. अनुमिति, 3. उपमिति, 4. शाब्द ।

अयथार्थ अनुभव के सिर्फ तीन भेद माने गए,

1.संशय, 2. विपर्यय तथा 3. तर्क

यहां स्पष्ट करना उचित है, संदिग्ध ज्ञान को संशय, मिथ्या ज्ञान को विपर्यय तथा ऊह ( संभावना) को तर्क कहते है। तर्क सभी अनुभव ज्ञान का जबरदस्त दुश्मन है। अनुभव की जगह हम कभी अंग्रेजी शब्द Experience का प्रयोग करते है। इस शब्द में ज्ञान, व्यवहार, अनुभव कौशल, परीक्षा आदि सभी तत्वों का अर्थ सम्मलित है, एक पूरक और व्यवहारिक शब्द होने से इंग्लिश न जानने वाले भी इसको समझ जाते है। अनुभव रहित जीवन बिन दिशा और पतवार के कभी भी साहिल छूं नहीं पाता, यही एक गूढ़ तथ्य जो जीवन दर्शन का कोई भी समझ जाता तो उसे अपनी असफलता के प्रथम चरण पर अफ़सोस नहीं होगा, क्योंकि उसे पता है, असफलता, सफलता की पहली सीढ़ी है, तथा उसके पास रहा अनुभव उसे अपनी उन गलतियों का ज्ञान करा देता है, जो उसकी असफलता के कारण हो सकते हैं।

चूँकि अनुभव का सूक्ष्म सा कण भी सक्षमता को बढ़ाता है, अतः अनुभव के प्रति हमारी लाचारी कभी भी नहीं होनी चाहिए। यह भी समझना होगा कि चूँकि अनुभव दुर्लभ और अमूल्य होता है, किसी भी दुकान में नहीं मिलता, उसको तो उन से प्राप्त किया जाता है, जिन्होंने अपने कर्म, सोच, मेहनत, और आत्मिक ज्ञान से उसे प्राप्त किया है। क्षेत्र के अनुसार अनुभव अपनी विशिष्टता स्वयं इस तरह से तैयार करता है कि कई क्षेत्रों का ज्ञान स्वत् ही उसमे सम्मलित हो जाते है। कहने की बात नहीं अनुभव और ज्ञान एक दूसरे के पूरक है, कह सकते है, इनका चोली दामन का साथ है।

कल्पना करने में कोई हर्ज नहीं होगा की आज जितने रुप के अति आधुनिक साधन का अविष्कार किया गया, क्या बिना अनुभव के उत्तमता की कसौटी पर खरे उतरते ? शायद, कदापि नहीं। निसन्देह कर्म की कोख से ज्यादातर अनुभवों का जन्म स्वत् ही हो जाता है, पर उनका लालन पालन की भूमिका ज्ञान ही निभाता है। जान लेने की बात है, कि इंसान अपने अनुभवों और ज्ञान के द्वारा ही अपना परिचय इस संसार में तय करता है। आज जब हम कभी भी अपने मन की तथा शरीर की अवस्था की जांच करते है, तो भूल जाते है कि हमारे दैनिक कर्मो के अनुभव से वो भी प्रभावित हो सकते है। उदाहरण के तौर पर इस तथ्य को तो स्वीकार करना ही चाहिए कि गुस्से की हालत में हमारे शरीर और मन का हर हिस्सा जर्जर और कमजोर हो जाता है, और उसका विकृत प्रभाव हमारे चेहरे पर स्वयं ही आ जाता है, वैसे ही किसी सकारत्मक, जगहित का आत्मिक काम हमारे चेहरे को चमक देता है।

कोई दो राय नहीं होगी, जो हमें समझाएगी कि सिर्फ अनुभवित होना, या किसी अनुभवी से मार्ग दर्शन प्राप्त करने से विशिष्टता प्राप्त हो जायेगी, सही नहीं है, और क्योंकि अनुभव तभी गुणकारी होता जब हम उसे अभ्यास की कर्मठ कसौटी पर उसके खरे पन को जांचते है। हालांकि अनुभव शुद्ध सोना है, पर हमे दैनिक जीवन में लगातार नये नये गुणों के गहने बनाने है, तो कसौटी पर अनुभव के शुद्धता की जांच कर लगातार अभ्यास की आदत डालनी होगी। क्योंकि कहा गया है, :

करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान,
रसरी आवत जात, सिल पर करत निशान ।

( जब रस्सी को बार बार पत्थर पर रगड़ने से पत्थर पर निशान पड़ सकता है, तो निरन्तर अभ्यास से मुर्ख व्यक्ति भी बुद्धिमान बन सकता है। )

आज संसार चारों तरफ से नवीनतम साधनों की खोज में लगा है, दूसरी तरह से हम कह सकते है, आज ज्ञान चारों तरफ बिखरा है, अगर उसे हमें अपने लिए समेटना है, तो निश्चिन्त है, कि अनुभव और अभ्यास दैनिक जीवन की जरुरत है। परन्तु, जो सबसे मुख्य बात ध्यान रखने की है, वो है, अपनी योग्यता पर विश्वास करके अनुभव प्राप्त करना। जब हम अपने ऊपर विश्वास की बात कर रहे है तो सदा ध्यान रखना होगा की अतिविश्वास से भी बचे।

“Anything that you learn becomes your wealth, that cannot be taken away from you; whether you learn it in a building called school or in the school of life. And not all things that you learn are taught to you, many things you realise you have taught yourself.”…C Joy Bell

इसलिए अपनी आंतरिक चेतना की जागरुकता से अनुभव प्राप्त करना ही उचित लगता है।

जिंदगी को किसी भी क्षेत्र में बेहतर और अनुभवी बनाने के लिए उपरोक्त कथ्य एक शानदार सूत्र है, इंसान का कर्म क्षेत्र में अभ्यास से किया यह अनुबन्ध उसे प्रगति की तरफ ले जाता ही नहीं बल्कि उसे अपने चुने क्षेत्र का विशिष्ट विशेषज्ञ भी बना देता है। यहां पर एक बात स्पष्ट कह देनी जरुरी हो सकती है, जब हम किसी क्षेत्र की बात करते है तो हमारा मकसद मानव और दूसरे प्राणियों को लाभ पंहुचाने वाले क्षेत्र के बारे में है, न कि उन के जो दहशत फैलाते है, हालांकि उनमें भी अनुभव अपनी खासी भूमिका निभाता है। सर्व कल्याण ही स्वयं का कल्याण करता है, इसे हमें कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि सकारत्मक चिंतन ही जीवन को महत्वपूर्ण बनाता है ।

प्रश्न किया जा सकता है, अनुभव को किन स्त्रोतों से पाया जा सकता है ? मनोविज्ञान के अनुभवी जानकार बताते है, कि अनुभव स्वयं अर्जित प्रक्रिया है, जो हर चेतन के अंदर जन्म प्रक्रिया में समाहित रहती है, और जीवन अस्तित्व की सुरक्षा के लिए स्वत् ही समझ में आ जाती है। चूँकि यह प्रक्रिया स्वयं की समझ से तैयार होती है, तो व्यवहारिक जगत के लिए ज्यादा सार्थक नहीं बन पाती और बाहरी अनुभव की जरुरत धीरे धीरे होने लगती है। चूँकि हम मानव जीवन के सन्दर्भ में अनुभव को तलाश रहे है, तो लाजमी है, हम अपने जीवन के अंदर ही इसकी भूमिका को परखे। समझ के बात इतनी ही है, जो पहला जीवन सूत्र है वो है, अपने जीवन के अस्तित्व को सुरक्षित बनाये रखना।

अनुभव का सम्बंध आत्मा और मन से जुड़ा होता है, अतः ये हमारी जीवन रेखा को संचालित करता है। अनुभव प्राप्त करने के लिए हमारे पास वैसे आज बहुत साधन है, जो हमें हमारे अर्थपूर्ण जीवन को कामनामय बनाता है। परन्तु सुख, शान्ति से युक्त जीवन जीने के लिए तथा हमारी असफलताओं को सफलता में परिणित करने के लिए जो ज्ञान हमें चाहिए, वो हम बड़े बुजर्गो, माता-पिता, रिश्तेदारों, शिक्षक, आध्यात्मक धर्म गुरुओं, अच्छी पुस्तकों तथा आसपास के वातावरण की ऊर्जाओं से ज्यादातर प्राप्त होता है। हमें कदापि नहीं भूलना चाहिए, डिग्रियों से मिला ज्ञान हमारी सक्षमता को सर्व श्रेष्ठ बना सकता है, पर शिष्ट नहीं, जो हमें स्वस्थ और मुस्कानभरा वातावरण दे सके। ध्यान रखना होगा प्राप्त धन दैनिक जीवन के साधन जुगाल कर सकता है, पर दैनिक आत्मिक शान्ति नहीं। यह चर्चा तभी सफल हो सकती है, जब हम तकनीकी शिक्षाओं को अंहकार से दूर रखकर अपने से ज्यादा जीवन अनुभवी व्यक्तित्व की तलाश करे और अपने अनुभव को ज्ञान के रूप में बदलने की सोच रखे।

भ्रमित अर्जुन अगर सारथी बने श्रीकृष्ण के अनुभव को ज्ञान के रुप स्वीकार नहीं करता तो महाभारत का उज्ज्वल पक्ष शायद कभी भी हमारे सामने नहीं आ पाता और हम अमृतमय “गीता” ज्ञान से वंचित हो जाते। क्यों नहीं हम अर्जुन बन हमारे जीवन सारथि माता पिता और गुरुओं के अनुभव से ज्ञान लेकर जीवन के महाभारत में विजयी बने।

श्रीकृष्ण प्रदत्त गीता का ज्ञान युगों युगों तक मानव को प्रेरणा देता रहेगा, जिनके पास अनुभव की कमी है, ज्ञान किसी से लेना संकोच कारी लगता है, उन्हें गीता सार समझने की कोशिश करनी चाहिए। सच यहीं है, जहां ध्यान, वही ज्ञान। चलिए, सुखी, सफल जीवन के लिए गीता के कुछ तत्व पर नजर डालते है। ध्यान रहे, पूर्ण गीता ज्ञान प्राप्त करना लेखक जैसे साधारण आदमी के लिए असंभव है।

1. बिना किसी उचित कारण, सन्देह मत करो
2. क्रोध मनुष्य का दुश्मन है
3. मन की लगाम अपने हाथों में रखो
4. उठो और मंजिल की तरफ बढ़ो
5. अपने विश्वास को अटल बनाओं
6. वासना, क्रोध और अति लालच से दूर रहों
7. हर एक पल कुछ सिखाता है
8. अभ्यास आपको सफलता दिलाएगा
9. सम्मान के साथ जियो
10. खुद पर विश्वास रखो
11. कमजोर मत बनना
12. मृत्यु सत्य है, इसे नकारा नहीं जा सकता
13. कुछ भी ऐसा मत करो जिससे खुद को तकलीफ हो
14. मेरे लिए सब एक समान हैं
15. बुद्धिमान बनो
16. सदा कर्म शील रहो
17. डर छोड़ लक्ष्य की तरफ बढ़ो
18. सहारे की तलाश नहीं, सहारा देने लायक बनो

अनुभव की सुंदरता निरन्तरता है, जीवन की सुन्दरता सक्षमता है, दोनों की सुंदरता से प्रभावित होकर जो कर्म हम करते है, उसका परिणाम ही सफलता या असफलता तय करता है, प्रसिद्ध बास्केट बाल खिलाड़ी Tim Duncan ने अनुभव के प्रसंग में कहा, ” Good, better, best. Never let it rest. Until your good is better and your better is best.”……शुभकामनाएं …लेखक कमल भंसाली…

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