🕟 वक्त का जैविक “अर्थ”💰कमल भंसाली✒

दोस्तों, “वक्त” या “समय ” शायद संसार का पहला आश्चर्य है, जो अपनी एक ही लय में चलता है, फिर भी, संसार में हर परिवर्तन का जिम्मेदार माना जाता है। वक्त की यह जादूगिरि काफी कुछ सोचने पर मजबूर करती है, आखिर वक्त कि इस कलाकारी का मानव जीवन पर इतना गहरा प्रभाव क्यों है। मानव आखिर वक्त से डरता क्यों है, ? खराब वक्त के नाम से सहम क्यों जाता है ? क्यों वो आखिर अपने कार्यो कलापों के परिणामों के लिए वक्त पर निर्भर रहता है ?, सवाल और भी कई हो सकते है पर जबाब एक ही दिया जा सकता है, कि हम माने या नही, वक्त संसार का राजा है, एक छत्र इस सृष्टि पर राज कर रहा है, और अंत तक करता रहेगा, बिना किसी विरोध के । सृष्टि निर्माण की प्रक्रिया में शायद वक्त का निर्माण प्रथम हुआ, ऐसा माना जा सकता है, क्योंकि हर तत्व की उपयोगिता का निर्णय वक्त के द्वारा कराया जाता है। सृष्टि के निर्माण में वक्त की भूमिका को दो तत्वों के अंतर्गत स्वीकार किया जा सकता है। दोनों ही तत्वों को हम साकारत्मक्ता और नकारत्मक्ता के नाम से पहचानते है, इन के अंतर्गत ही कर्मफल का निर्माण किया गया, यह एक विश्लेषण के अंतर्गत ही समझना होगा, क्योंकि किसी भी जीवन सम्बन्धी तत्व निर्माण को जानना हमारे वश में नहीं है। इसका एक ही कारण है, सृष्टि निर्माण हमारी देन नहीं, अपितु हम उसका एक अंश मात्र है। कोई हमारी भी भूमिका होगी, जिसके कारण अभी हम यहां है। पर यह तय किया जा सकता है, हम अपने जीवन में वक्त से बंधे है, और उसकी आज्ञा अनुसार ही चलने में समझदारी होगी। वक्त को हम यहां जीवन निर्माण और आत्मिक निर्माण के तहत ही समझने की कोशिश करे, तो शायद हमारा जीवन कुछ मूल्यांकित हो, विशिष्ठ नहीं, तो कम से कम सार्थकता प्रदान करने लायक हो जाए। इन्हीं सन्दर्भों में हम वक्त से प्रभावित अपने जीवन को एक सही दिशा की ओर मोड़ने की चेस्टा कर सकते है, अगर हम किसी दिशा से भ्रमित जीवन जी रहे है। चलिए आगे बढ़कर वक्त की गुणवत्ता की हल्की तलाश करते है, पूर्ण तलाश की शायद हमारी क्षमता न हों।

सबसे पहले हम अपने ही जीवन के बारे में थोड़ी सी चर्चा कर लेते है। आखिर जीवन क्या है ? सवाल सीधा है, सही उत्तर देना शायद कठिन हो पर इतना जरुर समझते है, “स्पंदन” जीवन की कसौटी है। इसके अंतर्गत वो हर वस्तु आ जाती है, जिसमे जीवन है, मानव, पशु, प्रकृति सभी वो शामिल है, जिनमे स्पंदन हो। जिसमे स्पंदन हो उसे जीवित माना जाता है, स्पंदन अगर चला जाता है, या नहीं है, तो उसे निर्जीव के नाम से पुकारा जाता है। सृष्टि का निर्माण सजीव तत्व से किया गया, इसलिए स्पंदन का होना न होना सजीव, निर्जीव को परिभाषित करता है।

सभी प्राणी अपना जीवन जीते है, और वक्त के अनुरुप जीवन जीना शायद उनकी समझदारी है। हम यहां मानव जीवन में वक्त की भूमिका तलाश रहे, अतः हमारा सारा ध्यान अपने जीवन को वक्त के अनुसार खुशमय बनाना हीं होना चाहिए। सबसे पहले हम इस बात को स्वीकार कर लेते है, कि वक्त की लय साँसों के साथ ही चलना होता है। इसलिए वक्त का साथ हमारे लिए अमृतमय है, अतः वक्त को मान सम्मान देना हमारी जिम्मेदारी बन सकती है। वक्त के समय, क्षण, पल कुछ इसके अतिरिक्त सुनहरे नाम है, इन्हीं नामों के साथ हम जीवन की सफलताओं और असफलताओं में इसकी भूमिका की चर्चा करते रहते है। इंग्लिश में लोग TIME के नाम से ज्यादातर इसे परिभाषित करते है।

चूँकि, वक्त से जीवन अपनी पूर्णता की सीमा रेखा तैयार करवाता है, अतः हमारी ख़ुशी और उम्मीदों के लिए उसके प्रति हमारा पूर्ण समर्पण होना आवश्यक हो जाता है। सही होगा, उसका सही उपयोग हम जीवन को मान्यता दिलाने के लिए बड़ी बुद्धिमानी से करे। इसकी ऊर्जा आशा और निराशा दोनों का निर्माण कर सकती है। पल पल से बना समय अपनी गुणवत्ता के प्रति अति जागरुक होता है। किसी एक खेल को ही उदाहरण के तौर पर लीजिये, उसमे हर क्षण वो अपनी ऊर्जा का दान करता है, और खेल अपने नियमों के अनुसार परिणाम सहित तय सीमा के अंतर्गत मंजिल प्राप्त कर लेता है। यहां वक्त की भूमिका पूर्णता तक है। कुछ इस तरह भी हमारा जीवन अनगनित घटनाओं से अपना विस्तृत रुप धारण करता है। यहां शेक्सपियर के उन शब्दों को याद करना सही होगा जिसमें उन्होंने वक्त के साथ मानव भूमिका को परिभाषित करने की सही कौशिश की, वो कहते है ” हम सभी प्राणी संसार रूपी रंग मच के कलाकार है, उसमे हमें एक निश्चित समय के लिए कई प्रकार की भूमिकाएं करनी होती है, इनके के लिए हमें आना और जाना पड़ता है।” कुछ ऐसे ही विचार मार्क्स ओरेलियस प्रकट करते है, जब वो कहते ” Time is a sort of river of passing events, and strong is its current; no sooner is a thing brought to sight than it is swept by and another takes its place, and this too will be swept away.”

हम हमारी विडम्बना ही कह सकते है, कि यह जानते हुए भी कि समय या वक्त हमारे जीवन को हर तरह से पल पल प्रभावित करता है, हम उसका सही उपयोग करने में अक्षम है। सन्दर्भों की बात करे तो हमारी हर चीज समय से प्रभावित होती है, चाहे, विचार हो, योजना, कार्य , आलोचना या और कुछ। पल के अनुसार फल का अनुमान भी बनता बिगड़ता नजर आता है। हम कई तरह से समय की चाल को बदलने की चेस्टा भी करते है, पर हकीकत में हम ही उसके अनुकूल अपना व्यवहार बदलते रहते है। सही माने तो यह हमारी विवशता है, दूसरे शब्दों में कहे तो हम “वक्त के दास” है, उसकी हर आज्ञा ही हमारा जीवन स्पंदन है। सच्चाई यही है, जो समय की लय को समझ कर वर्तमान का निर्माण करना चाहता है, वो वक्त का कभी दुरुपयोग नहीं कर सकता । कुछ लोग समय का अपमान गलत कार्य से करते है, और, कुछ देर तक उसका परिणाम अपनी ओर कर लेते है, पर वक्त का पलटा वार उनको एक ही सीख दे कर समझा देता है, मुझे बदलते देर नहीं लगती, तुमने जो महसूस किया वो यह फल या परिणाम नहीं था, परिणाम तो तुम अब भोगोगे। समय की निरन्तरता तभी तक सही रहती है, जब तक उसका ध्रुविकर्ण नहीं किया जाता। Stanford University के सेवा मुक्त प्रोफेसर फिलिप जिम्बारडो ने समय को परिदृश्य करने की चेस्टा की, अपने दस साल के अनुसन्धान के बाद उन्होंने कहा कि “समय को हम अपने व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार ही समझने की कोशिश करते है, इसलिए हमारा हर आचरण उसी रुप से प्रभावित होता है”।

चूँकि वर्तमान में हम जी रहे है, तो समय की कीमत का मूल्यांकन आज आर्थिक भाषा में करे तो समय बहुमूल्य है, एक एक पल कीमती हो गया है, परन्तु इसकी कीमत बढ़ने के साथ जीवन के बाजार में सुख, चैन, शांति, प्रेम, सत्य, भाईचारा, मान,सम्मान , इज्जत आदि तत्वों के मूल्यों में भारी गिरावट आ गई, और लेने वाले नगण्य रह गए। ये एक चिंता की बात है। जीवन की विवशता देखिये, वो साधनों की अधिकता से थका और निराश हो रहा है, उसकी प्राणदायी और प्रेमदायी जीवन जीने की क्षमता कमजोर पड़ रही है, क्योंकि साधनों के अनुरुप वक्त की अवधि नहीं बढ़ रही। सवाल उठ रहे है, आखिर हम क्या करे ? उत्तर संक्षिप्त में इतना ही हो सकता है, वक्त की पवित्रता को समझे, जिन उद्धेश्यों के लिए हमें जीवन मिला, उनमे सकारत्मक ऊर्जा की बहुतायत रहे, इसकी कोशिश होनी चाहिए। हमारी जरुरतें वक्त के अनुसार संयमित रहे, पर्यावरण की शुद्धता को वक्त के सन्दर्भ में जाने, अपनी हर अति से वक्त की लय न बिगाड़े, तो वक्त को जरुर लगेगा, कि मानवता को उसकी आज भी जरुरत है।इसका सबसे बड़ा असर ये हो सकता है, कि हम प्राकृतिक आपदाओं से जीवन को सुरक्षित रख सकते और शायद एक अच्छे भविष्य का गुलदस्ता लेकर वक्त हमारा अभिनन्दन करे। याद रखिये, Everyday is a bank account and time is our currency. No one is rich, no one is poor, we’ ve got 24 hours each—Christopher Rice……लेखक **कमल भंसाली**

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