***”सपने” तो सपने *** हकीकत या ख्याल ?★★कमल भंसाली★★

image

सपने तो है, सपने
न ये गैर, न ही अपने
जब भी आते, कुछ संकेत
जीवन को दे जाते
इनके है, कई प्रकार
हम न समझे, ये बात कुछ और..

सच यही लगता,
सपना ही, ख्बाब बन जाता
खुली आँख
मार्गदर्शक बन जाता
बंद पलकों में
तैरता ही रहता
जब तक
आशा, निराशा की
दुनिया का अवलोकन
नहीं कर लेता
न, इसकी मंजिल
न ही, इसका ठौर
हम न समझे, ये बात कुछ और….

सपनों के कई प्रकार
बनते मन अनुसार
चाहतों के फूल खिलाते
हर एक के रंग
दिखते, बेशुमार
सहमा सा दिल
कभी हो जाता, बेजार
तब, ख़ौफ़ इन में छा जाता
मन दहशत से
डर जाता
किसी से कुछ
नहीं कहता
पसीने की बूंदों से
तन, नहा जाता
सपने, ऐसे ही करते सफर
हम न समझे, ये बात कुछ और…

सपनों का भी होता, स्वास्थ्य
विचारों से बनता, इनका आकार
दबे हुए, मन के होते, पहरेदार
रौनक नींद की
करती इनका सत्कार
खुली, आँख
आने से कर देते, इंकार
शुद्ध, सच्चे जब भी आते
मन को विचलित कर जाते
सही रास्ते, की तरफ मोड़ जाते
रंगीन सपने, धीरे से खिसक जाते
ये ही है, सपनों की तस्वीर
हम न समझे, ये बात कुछ और….

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.