प्यार और वासना…एक चिंतन, भरी चर्चा…भाग 2 अंश 1 *****कमल भंसाली

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दोस्तों, हमने प्रेम के रिश्तों के सन्दर्भ में कुछ पारिवारिक रिश्तों की चर्चा की, परन्तु कुछ रिश्तें जो आज के जीवन में काफी उभर कर पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों पर भारी पड़ रहे है, उनमे कुछ को समझना बहुत जरुरी है। “दोस्ती” और “प्रेयसी” का सम्बन्ध आज के आधुनिक युग में काफी महत्वपूर्ण बनते जा रहे है। दोस्ती का रिश्ता आपसी सहमति से बनने के कारण जीवन को काफी प्रभावित करता है । कुछ इस तरह के रिश्तें जब दैहिक सीमा रेखा को पार करने लगते है, तो काफी संवेदनशील होने का डर रहता है। कहना न होगा, इनके लिये संयम, धैर्य और सही चिंतन की बहुत जरुरत होती है। सबसे पहले हम दोस्ती के रिश्ते की तरफ नजर करते है । इस रिश्ते में एक खूबसूरती है, यह परम्परागत बन्धनों से आजाद होता है । सबसे बड़ी सावधानी दोस्ती के रिश्तें में यही है, कि इसमे वित्तीय लेनदेन से बचना चाहिए, परन्तु आज अर्थ तन्त्र का युग है, अतः इसमे जब वित्तीय लेनदेन होना ,कभी कभी जरुरी हो सकता है। ज्यादातर दोस्ती इस कारण प्रभावित होती है, अतः इसकी सावधानी रखी जाए, तो जीवन के क्षेत्र में दोस्ती चमत्कारी साबित हो सकती है। अमेरिका में एक कहावत का प्रचलन है कि ” जब आप किसी दोस्त से रुपया मांगों तो पहले आपको निश्चित कर लेना चाहिए की आपके लिए दोस्त और रुपये में कौन ज्यादा महत्वपूर्ण है “। दूसरे कारणों में आपसी प्रतिस्पर्धा होती है, यह एक ही क्षेत्र विशेष में दोनों के होने के कारण हो सकती है। हालांकि ज्यादातर दोस्ती स्वभाव, और व्यवहार के आकर्षण से की जाती है, पर धीरे धीरे इसमे परिपक्वता आती रहती है,और समझदार आदमी उसकी सीमा रेखा को पहचान कर दायरे के अंतर्गत दोस्ती निभाता है। इसमे बिना रिश्ते के प्रेम के बावजूद काफी अंतरंगता होती है, यह अनमोल हो, तो कृष्ण सुदामा जैसी दोस्ती समझी जाती है।

प्रेयसी और प्रेमी के सम्बन्ध में यह चिंतन काम नहीं कर सकता, क्योंकि उसमे प्रत्यक्ष वासना ज्यादा होती है, प्रेम की जगह आकर्षण ही ज्यादातर होता है। इसकी बुनियाद में अगर सच्चा प्यार हो तो अलग बात है, नहीं तो आजकल स्वार्थ का भरपूर प्रयोग दोनों पक्ष करते है। प्रेयसी या प्रेमी दोनों ही विस्फोटक स्थिति में रहते है, क्योंकि इस तरह के सम्बंधों को ज्यादातर गुप्त ही रखा जाता है, जब तक यह किसी कारण से उजगार नहीं होते या दोनों इसे कानूनी मान्यता नहीं देते। ऐसे कई उदाहरण हमारे सामने है, जो अनैतिक और कानून के विरुद्ध है, फिर भी, ऐसे रिश्ते को परिवार और समाज की मान्यता मिल जाती है, अतः आजकल विरोध भी नगण्य नजर आता है, शायद, यह कोई नई सोच का नया चमत्कार है, जहां समाज शांत रहता है।

भारतीय संस्कृति की एक विशेषता है, यह युग के अनुसार बदलती है, परन्तु गति धीमी होती है, अतः संघर्ष भी हर बदलाव को झेलना पड़ता है। आज रिश्तों के सन्दर्भ में कुछ ख़ास परिवर्तन की बात हम यहां करना चाहेंगे, जैसे आज के दौर में लड़का लड़की का बिना शादी साथ रहना। आज से कुछ वर्षो पहले किसी लड़के का किसी लड़की से बात करना मामूली बात नहीं होती थी, यहां तक की पति पत्नी दिन में मिलना मुश्किल होता था। प्यार का इजहार करने में कई तरीकों का इस्तेमाल करना पड़ता था। समय बदला, तरीके बदले, प्रेम पत्र का विकास हुआ। कहते है, इंतजार के साथ प्राप्त हुई वस्तु का एक अलग ही रोमांच होता है, सच भी है, प्रेम जाने अनजाने कई कसौटियों पर परखा जाताऔर पूर्ण सम्पूर्णता प्राप्त करता। स्थानीय आय के साधन कम होनें के कारण लोग दूसरे राज्यों या देश उपार्जन करने के लिए जाते थे, इस जाने को “परदेश” जाना कहते थे। दूरिया प्रेम करने वालों को असहनीय विरह देती है, अतः वेदना को कम करने के लिए प्रेम पत्रों का अविष्कार हुआ। निश्चित तौर पर यह कहना मुश्किल होगा कि पत्रों का आदान प्रदान कब शुरु हुआ, परन्तु प्रेम पत्र इंसानी भावनाओं को प्रकट करने का एक अनुपम साधन है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता, जिसमे प्रेम के प्रति शालीनता, स्वस्थता, और संस्कारित चाहत का समावेश किया जाता है। इन पत्रों में कस्तूरी की तरह सुंदर शब्दों से ही प्रेम या प्रणय प्रकट किया जाता, भाषा का काव्यमय हो जाना इन पत्रों में मामूली बात होती है। हालांकि आज के युग में फेसबुक और वाट्सअप पर ज्यादातर फूहड़ सन्देशों की भरमार ही नजर आती है।

जरा गौर कीजिये नेपोलियन के इस पत्र के अंश पर जो उसने अपनी प्रेमिका जोशफिन को लिखा था । ” जब से, मैं तुमसे बिछड़ा, मैं बहुत उदास हूं । लगता है, मेरी सारी खुशिया तुम्हारें पास रह गई, मैंने सारे समय तुम्हारी यादों की बाहों में, तुम्हारे आंसुओ में, तुम्हारे स्नेहपूर्ण प्रेम में रहता हूं। जोशफिन, तुम्हारी अपरुव खूबसूरती मेरे दिल को लगातार जलाने वाली मशाल बन गई। तुम्हारा एक महीने का प्यार, जब से अलग हुआ, मुझे अहसास कराता है, मैं तुम्हे उससे हजार गुना प्यार ज्यादा करने लगा हूं। हर दिन यह प्यार तुम्हारे लिए बढ़ता ही जाता है”।
सच्चा प्यार जीवन को कितना खूबसूरत बना देता है ? है, ना दोस्तों। क्रमश*****कमल भंसाली

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