संगम दो जीवन का ★★🎂 कमल भंसाली🎂

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दोस्तों, जीवन के दो रिश्ते दिल की आपसी सहमति से तय होते है, एक “पति-पत्नी” का, दूसरा “दोस्ती” का। दोनों ही रिश्तों की कमजोरी होती है, “गलत फहमी”, दोनों को हि विश्वास की डोरी चाहिए। दोस्ती के रिश्ते में दरार आने के कई कारण हो सकते है, परन्तु दाम्पत्य जीवन में गलतफहमी सबसे खतरनाक बीमारी मानी जाती है, इससे बचना बहुत जरुरी होता है, क्योंकि यह जीवन समर्थक बन्धन है। अभिमान में कोई भी कह सकता है, मैं क्यों परवाह करुं पर हकीकत यही कहती है, यह रिश्ता परवाह करने के लिए बनाया गया है। धर्म शास्त्रों ने इस रिश्ते में अपनी सारी शुभता दी है, ताकि मानव अपने आपको विषम स्थिति में अकेला अनुभव न करे, अपने लिए सुखद भविष्य तैयार कर सके। नर-नारी सृजनकारी होते है, उनसे भविष्य निर्माण होता है, सभी के लिए। कितना अभूतपूर्व है, यह बन्धन। फिर भी आज, इतने “तलाक” ! विस्मय की बात जिस बन्धन में दिल बिना कोई गाँठ बंधा रह सकता है, उसमे ही गाँठ लगाने की जरुरत हो जाती है। मेरा प्रयास इतना ही है, आज के युगल इस बात को समझे, और थोड़ी नम्रता से चिंतन करे, “प्रेम” अमृत की बून्द है, सुख-दुःख झेलनेवाली छतरी है। गलतफेमियों का शिकार इस रिश्ते को न बनाये, वक्त उन्ही को सुखी करता, जो हर रिश्ते की कदर करते है। मैं कोई प्रशिक्षित कवि नहीं हूं, सिर्फ अपनी भावनाये प्रकट करने के लिए लिखता हूं, अतः इसे एक संदेश ही समझे। मैंने इस विषय पर और भी कविताये लिखी है, जो इस ब्लॉग साईड पर उपलब्ध है, पढ़कर सुझाव जरुर दे। “धन्यवाद”।

उस राह की क्या बात करुं
जो तुम तक नहीं पहुंचती
उस याद को क्या समझुं
जो तुम्हे कभी नहीं आती

प्यार किया, उससे इंकार नही
पर गुलाम कहलाऊँ, स्वीकार नहीं
हकीकत यही है, प्यार बन्धन है
दो दिलों की एक नायाब मंजिल है

वक्त कोई फ़रिश्ता नहीं
पर कसौटी है, हर रिश्ते की
जिस सम्बन्ध की डोर कमजोर
तय,उस की उम्र ज्यादा नहीं

चाह थी, गुलशन का हर फूल
जैसी तेरी मुस्कान रहे
हम दोनों की निगाहों में
आपसी दर्द की पहचान रहे

भूल हुई हमसे, छोटी सी सही
कुछ तुमने की, कुछ मुझ से हुई
रास्ता, जब एक सामने
पता, नहीं, फिर
मंजिल, हमसे क्यों दूर हुई

आओं, गिला, शिकवा को
नाप लेते
फिर, से दिल
टटोल लेते
एक बून्द “प्यार” की
अपने दिल में तलाश लेते

न तेरे पास हों, अभिमान
न मेरे पास शान
अब है, दो जान
और एक प्राण
यही है, वो सवेरा
यह घर न तेरा, न मेरा
है, सिर्फ “हमारा”

हम दो
छोटी सी जिंदगी
उसमे कितना कुछ कर जाते
अब नादानी को
अलविदा कहकर, मुस्करा जाते
हमसफ़र है, दोनों
“आ”
दूनिया अपनी, फिर सजा लेते…कमल भंसाली

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