🍀अपनत्व के साये🍀……🌾कमल भंसाली

निगाहों में हमारे, जो है, आपसी अपनत्व के साये
पता नहीं क्यों आज कल लगते है, गैर और पराये
सूखे पुष्पों की तरह मुरझाये,स्याह और अलसाये
खुशबू बिन अहसास, कैसे हर जीवन समझ पाये

दूर दिशा की रौशनी, आज भी है, वैसी ही सुनहरी
विस्मय में डाल रहीं परायी नजर हमारी, तुम्हारी
विरासत की हिस्सेदारी, आज लग रही मजबूरी
मानो, निराश हो कर कह रही, हर रिश्ते की डोरी

नील गगन की विस्तृतता में, चाँद कितना ही सहर्ष मुस्कराले
लगता सितारों के साथ ही अच्छा, अगर सर थोड़ा झुकाले
बिन दीप दिवाली नहीं होती, बिन रिश्तों बारात नहीं सजती
बिन रिश्तों के ‘खुशिया’ कभी शुभता का तिलक नहीं पाती

जगमग के बाजार में, रिश्तें कभी नही सजते
रिश्ते वही सच्चे, जो दिल के साथ धड़कते
नाम कोई भी दे दो, खून के साथ मन में बहते
बिन प्यार, स्नेह के, नाम के ही होते है,रिश्ते

आज कितना हीं हो सुनहरा, कल तो नहीं हमारा
जो बुनियाद जीवन पथ आसान करे, वो है, सहारा
ख्याल इतना ही रखना, कोई रिश्ता नहीं रहे बेसहारा
अपनों के जब दिल जलते, प्रेम पुष्प कैसे खिले प्यारा

रिश्तों की चाह, जरा सा सम्मान, न की अपमान
लेन देन की तराजू में न तोलें इसकी आनबान शान
रिश्तो की हरियाली से जीवन धरा लगती हरी भरी
उपजाए, संजीविनी मरहम, दिलाशाकारी, उपकारी

आओं बदलते है, अपनी निगाहों का दायरा
सत्य की धरा पर रखते है, हर रिश्ता हमारा
मूल्यांकित अपनत्व अब नयनों मे नहीं बसाना
जीवन है, अपनों के प्यार से ही, उसी से सजाना……कमल भंसाली

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.