सफर ही तो है, जीवन…मेरे हमसफ़र..कमल भंसाली

सफर ही तो है, जीवन

जो तुम हम
हर रोज करते
चलते चलते
कई ठहराव पर
थोड़े रुकते
उसी दौरान
आपस में मिलते
दूसरे पल
बिछड़ जाते
फिर मिलेंगे
कहकर उतर जाते
अजनबी बन
फिर कहीं
खो जाते
वापस नहीं मिलते
पर सफर
नहीं रुकता
चलता ही रहता…..

ये सफर बड़ा
अनजाना
पर लगता
बड़ा सुहावना
कभी रहस्य की
गुफाओं से गुजरना
कहीं शंकाओं
कि नदियों पार करना
खिड़की के
उस पार के
दृश्य पल पल
तेजी से पलटते
कभी रौशनी
में अँधेरे भागते
कभी उजालों में
धुंआ उड़ता
पर सफर नही रुकता
चलता ही रहता…

उसी पल
हम हंसते, रोते
पर, साथ रहते
कभी, तुम खिलखिलाते
कभी, मैं चहकता
अतीत की गर्मी
भविष्य की सर्दी
वर्तमान की उमस में
दिल घबराता
मायूसी के जब
जंगल आते
उदासियों की शाम में
कितने वीराने दिखते
रात की
तन्हाई में
भ्रम की
सीटिया
सुनाई देती
दहसत सी होती
नींद के आगोश में
तेज धड़कनों की
लय बढ़ जाती
दिल घबराता
पर सफर नहीं रुकता
चलता ही रहता..

मंजिल के
हम मुसाफिर
किसको कहां जाना
पूछते रहते
दूसरों के मकसद में
अपना अस्तित्व
तलाशने लग जाते
धीमा होता सफर
हड़कंप मचा देता
कल का अपनापन
आज बिखर जाता
सच तो यही है
सब समेटने के चक्कर में
यात्री अकेला ही
रह जाता
पर सफर नहीं रुकता
जीवन पथ, गामिनी का
सफर, मेरे हमसफ़र
चलता ही रहता…..

कमल भंसाली

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.