जवानी, दीवानी..बेवफा रानी….♥ कमल भंसाली ♥

चंचल चितवन के मालिक, नैन तुम्हारे
जिधर भी घूम जाए, उतने आशिक तेरे
जवानी, प्यार मेरा न समझे तूं, न नैन तेरे
समय की बात है,आशिक हम भी थे, तेरे

मानते है, खुशबुओं की हसीन मलिका हो
जन्नत की देवी जैसे, कई नामों से मशूहर हो
कोई के लिए परी, कोई के लिए चश्मे बददूर हो
जरा,बताओ, क्यों,अब हमारे दिल से दूर हो

सजकर रहती हो, मादक अंगड़ाई भी लेती हो
सच कहें,गुस्से में तो और भी हसीन लगती हो
कयामत ही आ जाती, जब खिलखिलाती हो
जख्म देकर, कितनी संजीदगी से सहम जाती हो

होठों में तेरे “कमल” खिलते, गालों पर उसकी लाली
कभी संगीत की देवी, कभी लगती हो महाकाली
सच कहे, सादगी में तो बहुत ही सुंदर दिखती हो
रंगो के छंदों में , पथिक को रस्ते से भटका देती हो

क्या है तुम में ऐसा प्रिय, लोग तेरा नाम ही गुनगुनाते
सोते, जगते, तुम्हे और जवान, हसीन देखना चाहते
ख्याल, तेरे हजारों होंगे उनकी निगाहों में तुम्हारे लिए
तभी तो तुम्हे, वो एक बार आगोश में भर लेना चाहते

खुदा भी होगा हैरान, शायद थोड़ा होगा परेशान
उसकी चाहत में, सब कशीदे तेरे प्यार के करते गान
पता नही,समय के पंख पर बैठ, तुम कब उड़ जाओगी
अपनी बेवफाई के, हजारों कारण का उपहार दे जाओगी

सच ही कहते है, सही भी कहते है, सब ज्ञानी
पहचानों, संभलो, जानों तुम्हारा नाम है जवानी
एक झलक से फुसलाती रहती, ख्बाब दिखाती
अरमानों को दंश कर, नागिन वापिस नहीं आती

चाहत जगत में जितनी, उतनी ही तू बदनाम
जितने तेरे आशिक, उतने ही है तेरे नाम
कोई कहे दीवानी, कोई चार दिनों की चांदनी
कोई कहे, बिन वफ़ा की प्रमदा, अजीब मस्तानी

सबकी हो प्रियतमा, कुछ की हो, प्रमत्त दाता
निम्नतम उम्र की तुम हो, मधुरतम उत्तमता
उतेजना के चर्मबिन्दु की, हो बिन मधु मधुशाला
तुम बिन जीवन, बन जाता धर्म की धर्मशाला

कोई कुछ भी कहे, तू , हर उम्र में अच्छी लगती
बिन तुम्हारे, जिंदगी गंभीर नि:संबल विधवा लगती
निराकुल राते सवेरे को, शाम से तलाशने में लग जाती
प्रेम की प्यासी जिंदगानी, लाचार बंजर बाँझ कहलाती

रूप, नाज, नखरे, रंग बदल, ढंग बदलते रहेंगे तेरे
चंचल चितवन के मालिक, नैन जो ठहरे, तेरे
जवानी जिंदाबाद, जवानी जिंदाबाद
मैं नहीं, दीवाने कह रहे, सारे…….. तेरे…..कमल भंसाली

कमल भंसाली

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