भारतीय संस्कारों का दस्तावेज….♥♥♥कमल भंसाली♥♥♥

जो जीवन प्रशंसा का भूखा नहीं होता
जिसको उपहारों की चाहना नहीं होती
जो, लेने की जगह देने को तैयार रहता
उसकी जिंदगी कभी मोहताज नहीं होती
उज्ज्वल जीवन की,शायद यह पहचान होती…

अनमोल शब्दों का है, जो है, सम्पूर्ण मालिक
व्यवहार में रहती हो, सदा शीतल चन्दन कि महक
न मंजिल कि चिंता, न तन्हाई में मायूसी कि झलक
सफलता की देवी, उसके ही दरवाजे पर आती
उज्ज्वल जीवन की, शायद, यही एक पहचान होती……

वक्त के साथ, जो दायरों में, खेलते कूदते रहता
जो, दोस्ती की कीमत, विपरीतता में नहीं भूलता
सहयोग और धैर्य से, दोस्त की राह आसान कर देता
उसे ही जिंदगी, सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी मनोनीत करती
उज्ज्वल जीवन की, शायद, यही एक पहचान होती….

नैतिकता का राही, आस्थाओं का संग्रह कर्त्ता
सत्य की दुकान में, कम असत्य का विक्रय कर्त्ता
लालच को, जो संयम की तराजू में तोलता रहता
उसे, लक्ष्मी, सदा परिपूर्णता का वरदान देती रहती
उज्ज्वल जीवन की, शायद, यही एक पहचान होती…

अपने सुख दुःख की जो नहीं बनाता, कोई रुपरेखा
धर्म के आईने में ही, जो अपना हर कर्म निहारता
मानवता का करे सम्मान , न लांघे उसकी लक्ष्मण रेखा
ऐसे ही इन्सान को मिलती रहती, अपूर्व संजीवनी शक्ति
उज्ज्वल जीवन की, शायद, यही एक पहचान होती…

प्रेम की परस्परता में ही जो अपना जीवन सदा बिताता
रिश्तों की गरिमा समझ, उन्हें स्नेह से हर रोज नहलाता
बुजर्गो के सानिध्य में, गुरुओं से ज्ञान की बातें जो सुनता
वो, ही, अमृतमय होकर जान लेता, शुद्ध जीवन की पद्धति
उज्ज्वल जीवन की, शायद, यही भी एक पहचान होती…..

माता पिता को कर सम्मानित, श्रवन का जो एक अंश पाता
उनके जीवन को अमृत की जगह , जहर की बुँदे नहीं पिलाता
उनके चरणों की धूल, जो अपने मन मस्तिष्क पर रोज लगाता
जीवन की हर उत्कृष्टता में, आशीर्वादों के फूलों की बरसात होती
उज्ज्वल जीवन की, शायद, यहीं भी एक पहचान होती…

मधुरतम जीवन, जीवन संगी के साथ जो मधुरता से बिताता
वो ही जीवन की बगिया को, फूल और कलियों से सजाता
परवरिश की सीढ़ियों पर, साथी का हाथ में हाथ लेकर चलता
उसके, उपवन को, समृद्धि सहर्ष आकर रोज नयनों से निहारती
उज्ज्वल जीवन की, शायद, यह भी एक पहचान होती…..

इस पहचान को, “प्रिय साथी”, हम अपने नयनों में बसा लेते
सब को न अपना पाये तो, क्या ?, कुछ को, तो जान लेते
बीत गया, उसका दुःख नहीं, वर्तमान को सही भोग लेते
ज्ञान यह मेरा नहीं, “भारतीय संस्कारो”के दस्तावेज कहते…..कमल भंसाली

कमल भंसाली

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