रंगो की कुंडली……..कमल भंसाली


हजारों रंग से सजी दुनिया
हर रंग है, निराला
पर दो रंग करते कमाल
एक सफेद, दूसरा काला
सत्य की सफेदी,
हर रंग चमकाए
झूठ का काला
सब को, भरमाये
नित,नई दुनिया की
परिभाषा बनाये

लाल को ही, देखिये
करता रहता, नित नए कमाल
नाड़ियों में बहने वाला लहू
का रंग होता लाल
होता कीमती, रखे संभाल
हर शुभता का सूचक
बदलता सबका भाल
कहता रहता
निरन्तरता, में ही प्रभाव
उन्नति ही, सम भाव
सर्व सुखाय: सर्व हिताय:
अहिंसा, परमों धर्म
हो, सबका स्वभाव

हरा रंग, खुशियों का बादशाह
हरी भरी धरा
कितना प्यार है, भरा
जीवन में हो, जब हरियाली
मन तरंगे नाचती
हर्ष उल्लास के फूलों
से झूमती हर
जीवन की डाली
यह न हो, तो
सब कुछ, समझों खाली

पीला रंग बहुत कुछ कहता
धूप, छांव सब सहता
कभी उल्लसित
कभी प्रस्तावित
अति से घबराता
कमजोरी में जल्दी
स्याहा हो जाता
इस लिए अग्नि को
ही, ज्यादा भाता
लाल के संग मिल जाय
कहर ढ़ह, जाय
सफेद के संग मिल जाए
क्रान्ति का बिगुल बजाए
इसलिए केसरिया कहलाए

रंग नीला
साथ में रखता, पीला
नील गगन में
जैसे सितारों का
सुनहरा किला
शासन में करता, विश्वास
भाग्य के लिए ख़ास
पर करता
उसी से परिहास
अंतिम प्रहर
का अंतिम विश्वास
सत्यम, शिवम, सुंदरम
सही तो, जीवन मंगलम
कम अवधि का मालिक
पर, अनन्त का प्रेरक
हकीकत में, सबका सेवक

रंग गुलाबी
सुंदरता का पुजारी
नयनों में जब बसता
प्रेम ही बरसाता
अति में, स्वभाव बदलता
विभोहिरत हो
मदहोशी में रहता
पथ का दावेदार
पर, अत्यंत कमजोर
मार्ग ही भटका देता
एक सही के लिए
अनेक गलतियां कर जाता
फिर भी मानव मन, को अति भाता
जीवन के प्रारुप
और स्वरुप बदलता
पर, क्षण भर में
सब कुछ भूल जाता
इस लिए गुलाबी कहलाता

काला रंग
अकेला, तन्हा
ही, अच्छा लगता
राह पर पसर कर
मंजिलों का अंबार लगा देता
घटना, दुर्घटनाओं का मालिक
चेतनाओं का है, अभिभावक
सहजता से आता
पर जल्दी नहीं जाता
कर्म से ही है, बंधा
धर्म से घबराता
पर इसी के नाम से
कई गलत काम करवा जाता
इस पर रखे, जो ध्यान
वो ही, हो सकता
सही, और महान

रंग, सफेद
न ख़ुशी, न खेद
नंगा ही रहता
सत्य से लिपटा रहता
कभी लज्जा से
झूठ की तह में छिप जाता
ताप इसका निराला
एक दिन सामने
वापस आ जाता
तब इंसान शर्म से
सफ़ेद स्याह हो जाता
शान्ति, सहअस्तित्व
का है , यह मालिक
सहायक, पर निर्णायक
इस लिए धवल भी कहलाता
जिसके जीवन में जितना
उतनी ही, प्रतिष्ठा दे जाता

रंग कई है, और,
सभी, दुःख,सुख में दिख जाते
सच के दर्पण में
गलत, सही दिखा जाते
प्रेम् के आवरण में
हर ख़ुशी का परिचय करा जाते
विलीन होकर
आत्मा का अस्तित्व
बोध करा जाते…….

कमल भंसाली

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