मन मगन मुठ्ठी में गगन…बेहतर जीवन शैली भाग १० अंश ३


मन मगन, मुठ्ठी में गगन…बेहतर जीवन शैली में हमने मन की जरूरतें और उसका हमारे व्यक्तित्व निर्माण में योगदान पर चर्चा की। मन की हर अवस्था प्रेरणात्मक नहीं हो सकती, परन्तु इसके लिए पछतावा करना उचित नहीं कहा जा सकता । मन की अंतरंगता भावनाओं से जुड़ी है, भावुकता का समावेश अगर भावनाओं में ज्यादा होता है, तो मन में कमजोरी का आना लाजमी है, और यही वो तत्व है, जो हमारी कामयाबी और नाकामी को परिणाम देते है। हमें अपनी हर असफलता को कभी भी इतनी वजह नहीं देनी चाहिए कि मन दूसरे प्रयास के चिंतन की हिम्मत छोड़ दे। आखिर, हमारा संबल हमारा अपना मन हीं है।

Harry Emerson Fosdick का मानना है, हर आदमी का चिंतन ही उसके व्यक्तित्व का धरातल है। जितनी मजबूत मन की नीवं उतना ही मजबूत उसका व्यक्तित्व हो सकता है। तभी वो कहते है “The more one studies the biographies of men like Washington. or women like Florence Nightingale, the more one feels that they might conceivably have been lost in the crowd. What most of all gives them distinction is that they identified themselves with a cause greater than themselves so that when you think of it you think of them”

हर हार पर खुद की आलोचना मत कीजिये, संक्षिप्त चिंतन सहज है, परन्तु मन आघातिक चिंतन उचित नहीं कह सकते। हम अच्छी तरह समझते है, समस्याओं का समाधान ही जीवन है, बिना संघर्ष से प्राप्त उपहार क्षणिक खुशी का मालिक होता है, थोड़ा समय बीत जाने के बाद उसकी ख़ुशी कपूर की तरह उड़ जाती है। संघर्ष और मेहनत से हासिल ख़ुशी जीवन धरोहर होती है, क्योंकि उसमे मन की कस्तूरी छिपी रहती है। इस लिए मन कभी भी खराब न करे, विपरीत क्षणों में भी।मन को सुंदर विचारों से सजाने से हमारा मन सदा स्वस्थ रहेगा, नकारत्मक प्रतिरोध की क्षमता उसकी बनी रहेगी। निश्चित है, वो स्वस्थ तो हम स्वस्थ।

आइये हम मन को स्वस्थ और सार्थक गहनों से सजाने की बात करते है।….
1. मन को हर परिस्थिति की सच्चाई बेहिचक स्वीकार करने की स्वतंत्रता
2. विनय पूर्वक बुद्धिमानी व्यवहार
3. क्रोध और आवेश से दुरी बनाये रखने कि कौशिश
4. निर्णय पर कायम रखने की शक्ति
5. कर्म ही धर्म है, कर्म से लगाव ही जीवन सार
6. ईष्या, द्वेष, अति लालच, हिंसा, आदि हानिकारक तत्वों से बचाव
7. प्रेम, स्नेह, सेवा, सदाचार, अहिंसा आदि शक्तिवर्द्धक गुणों युक्त दैनिक जीवन
8. दान, सेवा, आदर, मान सम्मान के प्रति जागरूकता
9. देश, परिवार और समाज के प्रति स्वस्थ मानसिकता
10.धर्म ग्रन्थ और अच्छे साहित्य का अध्ययन
11. अन्याय करना नहीं, अन्याय सहन कभी नहीं करना

जीवन सहज और सरल नहीं है, सब समय सब गहनों को पहन कर चलना साधारण आदमी के बस की बात नहीं है, परन्तु समय का मूल्यांकन कर अगर हम निर्भीकता से जीवन पथ पर अग्रसर हो तो बहुत सी उपरोक्त बातें हमें अपने जीवन को बेहतर और सफल बनाने में सहयोग कर सकती है। जीवन के लिए कोई समय सीमा तय नहीं होती, जब जागो तभी सवेरा, ये न आपका, न ही मेरा..अमानत है, बाकी अपना चिंतन और मन…..
चलते चलते….
Don’t run away from adventures of the mind which you find hard to understand. Keep an open mind for the things “practical” people say won’t work. Perhaps we have more “senses” than we think. For thousands of years electricity was all around us and we could not use it. How can we be sure there aren’t powers of the mind which we understand as little but could as well if we knew how ?……..Ardis Whiteman…

कमल भंसाली

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